संस्कृति और कृषि विभाग की खींचतान में अटके किसानों के इनाम, 45 हजार प्रतिभागियों को ट्रैक्टर-बुलेट का इंतजार
45 हजार किसानों ने लिया था भाग, 7 करोड़ के हैं प्राइज
संस्कृति विभाग के अधीन काम करने वाले वीर भारत न्यास ने किसानों के लिए किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व क्विज नाम से एक ऑनलाइन प्रतियोगिता रखी थी। यह प्रतियोगिता 29 जनवरी से 15 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थी।
इस क्विज में प्रदेश भर से लगभग 45 हजार किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था। तय योजना के मुताबिक प्रतियोगिता खत्म होते ही विजेताओं को चुनकर इनाम बांटने थे। सिर्फ इन तीन बड़े पुरस्कारों पर ही करीब 7 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। वहीं राशि न मिलने से प्रक्रिया अटक गई है। इसके अलावा कुछ अन्य प्राइज भी रखे गए हैं।
जानिए किस श्रेणी में क्या मिलना तय हुआ था
- पहला पुरस्कार: 55 किसानों को 9 लाख रुपए कीमत का एक एक ट्रैक्टर मिलना है। (कुल खर्च 4.95 करोड़ रुपए)।
- दूसरा पुरस्कार: 55 किसानों को 2 लाख रुपए कीमत की एक-एक बुलेट मोटरसाइकिल मिलनी है। (कुल खर्च 1.10 करोड़ रुपए)।
- तीसरा पुरस्कार: 55 किसानों को 1.30 लाख रुपए कीमत की एक-एक ई-स्कूटी मिलनी है। (कुल खर्च 71.50 लाख रुपए)।
कृषि लोकोत्सव में बंटने थे इनाम
मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के मौके पर 1 से 3 नवंबर के बीच भोपाल सहित पूरे प्रदेश में कृषि लोकोत्सव का बड़ा आयोजन होना है। भोपाल के मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री खुद मौजूद रहेंगे। जबकि जिलों में प्रभारी मंत्री कमान संभालेंगे। इसी मंच से किसानों को ये शानदार तोहफे बांटे जाने थे।
इस पूरे आयोजन और इनाम वितरण पर कुल 10 से 11 करोड़ रुपए का खर्च आना है। संस्कृति विभाग ने कृषि विभाग से लोकोत्सव के लिए 7 करोड़ रुपए और दूसरे खर्चों के लिए 2 करोड़ रुपए मांगे हैं। किसानों के इनाम और बाकी चीजें मिलाकर कुल मांग 20 करोड़ रुपए तक पहुंचती है।
सुमिरन यात्रा और पुराना 80 लाख का बकाया भी अटका
कृषि लोकोत्सव के तहत प्रदेश के सभी जिलों में धार्मिक और आस्था के केंद्रों पर सुमिरन यात्रा निकालने की योजना है। इस यात्रा में गायन, वादन और धार्मिक अनुष्ठान होने हैं। हर जिले के लिए 5 लाख रुपए के हिसाब से कुल 2.75 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है।
इतना ही नहीं संस्कृति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनवरी 2026 में भोपाल के रवींद्र भवन में हुए कृषि लोकोत्सव का भी 80 लाख रुपए का बिल अभी अटका हुआ है। यह पुराना बकाया भी कृषि विभाग ने अब तक नहीं चुकाया है।
जिम्मेदार अधिकारियों के बयान
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी का कहना है कि अगर पैसा मिल भी जाता है, तो इतनी जल्दी गाड़ियां और ट्रैक्टर खरीदना मुश्किल होगा। इसलिए कृषि विभाग को ही अपने स्तर पर इनकी खरीदी करनी होगी, क्योंकि विभाग में पहले से टेंडर की प्रक्रिया चलती रहती है।
दूसरी ओर कृषि उपज मंडी के एमडी राघवेंद्र सिंह का कहना है कि अगर यह शासन की योजना या कार्यक्रम है, तो वह जरूर होगा। इसमें किसी तरह का कोई कन्फ्यूजन नहीं है।