किसान संगठनों में मतभेद : टिकैत बोले- एक अक्टूबर के बंद में संयुक्त किसान मोर्चा शामिल नहीं

Amresh Kushwaha | Sept 21, 2024, 08:27 IST
पॉलिटिकल लोग अलग आंदोलन करें
एक अक्टूबर को मध्‍य प्रदेश में हाईवे जाम का ऐलान किया गया है। इसको लेकर टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) इसमें शामिल नहीं होगा। सोयाबीन की MSP बढ़ाने की मांग पर सरकार से तुरंत संज्ञान लेने की अपील की गई है।

मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें बढ़ाने की मांग पर किसान संगठनों और सरकार के बीच संघर्ष जारी है। राज्य के कई किसान संगठन 1 अक्टूबर को प्रदेश के सभी हाईवे पर चक्का जाम करने का ऐलान कर चुके हैं। हालांकि, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया है कि SKM इस बंद में शामिल नहीं होगा।



किसान संगठनों में बढ़ते मतभेद

पॉलिटिकल लोगों से दूरी

राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहते हैं, लेकिन SKM के घटक दल उनके साथ आंदोलन नहीं करेंगे। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे अपने अलग आंदोलन चलाएं और किसान संगठनों के साथ भ्रम की स्थिति न पैदा करें। टिकैत ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों का मकसद सिर्फ फायदा उठाना होता है, जबकि किसान संगठनों का आंदोलन सरकार से वास्तविक मांगों को लेकर है।



सोयाबीन की MSP पर टिकैत का बयान

टिकैत ने सरकार से मांग की कि वह सोयाबीन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को तुरंत बढ़ाए। वर्तमान में सोयाबीन की MSP 4 हजार 800 रुपए प्रति क्विंटल है, जो 12 साल पहले तय की गई थी। टिकैत का कहना है कि पांच-छह साल पहले सोयाबीन की कीमत 8 से 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी, लेकिन अब इसके दाम बेहद कम हो गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 1 अक्टूबर को SKM का कोई आंदोलन नहीं होगा, और यदि मध्य प्रदेश के किसान उन्हें बुलाते हैं तो वह वहां जरूर जाएंगे।



SKM की बैठक में हुआ निर्णय

18 सितंबर को भोपाल में SKM के बैनर तले एक बैठक आयोजित की गई थी, जहां सोयाबीन के दाम को लेकर भविष्य की रणनीति बनाई गई थी। बैठक में मौजूद किसान नेताओं ने कहा कि गांव-गांव में ज्ञापन दिए गए, लेकिन सरकार ने 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल की मांग को अभी तक नहीं माना है। SKM ने 24 से 30 सितंबर तक मशाल जुलूस निकालने और 1 अक्टूबर को प्रदेशभर के हाईवे पर चक्का जाम करने की योजना बनाई थी। लेकिन, टिकैत के इस बयान के बाद किसान संगठनों में मतभेद साफ नजर आ रहे हैं।



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