MP के किसानों पर दोहरी मार : 28 मार्च तक चुकाना है कर्ज और 7 अप्रैल से शुरू होगी गेहूं खरीदी

Sanjay Dhiman | Mar 23, 2026, 22:10 IST
Photograph: (the sootr)
MP के किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी और कर्ज चुकाने के फैसलों से तनाव का सामना करना पड़ रहा है। 28 मार्च तक कर्ज चुकाना है और 7 अप्रैल से खरीदी होगी।

Maharajpur. मध्य प्रदेश के किसान इस समय सरकारी फैसलों के कारण दुविधा में फंसे हुए हैं। किसानों को 28 मार्च तक सहकारी समितियों को अपना कर्ज चुकाना है। इधर, गेहूं की खरीदी की तारीख 7 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। इस स्थिति में किसानों को यह समझ नहीं आ रहा कि पहले कर्ज चुकाएं या अपनी फसल बेचें ताकि उन्हें समर्थन मूल्य मिल सके।



दो अलग-अलग समयसीमा से परेशानी

12 मार्च को खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आदेश जारी किया कि रबी की फसल 7 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। लेकिन इस समय तक किसान अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि उनका कर्ज 28 मार्च तक चुकाना अनिवार्य है। किसानों के लिए यह स्थिति बहुत ही कष्टकारी है, क्योंकि फसल तैयार है लेकिन सरकार के आदेशों के कारण वे उसे बेचने में असमर्थ हैं।



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किसानों का संकट

जिला सहकारी बैंक महाराजपुर के अंतर्गत छह समितियों के हजारों किसान इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें महाराजपुर, मनकारी, टटम, गढ़ीमलहरा, कुर्राहा और ऊजरा जैसी प्रमुख समितियां शामिल हैं। इन किसानों को इस समय सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही है। उधर, सहकारी समितियों से ऋण चुकाने की समय सीमा आ रही है। अगर किसानों ने 28 मार्च तक ऋण चुकाया नहीं, तो उन्हें शून्य प्रतिशत ब्याज की योजना का लाभ नहीं मिलेगा और 10 प्रतिशत ब्याज देना होगा।



निजी व्यापारियों से फसल बेचना मजबूरी

किसानों के पास कोई और विकल्प नहीं बचता, सिवाय इसके कि वे अपनी फसल को निजी व्यापारियों को कम दामों पर बेचें। इस वजह से वे समर्थन मूल्य से बहुत कम कीमत पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे न सिर्फ किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वे सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से भी वंचित हो रहे हैं।



किसानों की अपील- समय सीमा बढ़ाई जाए

किसान संगठनों ने सरकार से अपील की है कि यदि गेहूं की खरीदी की तारीख बढ़ाई गई है, तो ऋण जमा करने की समय सीमा भी बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले किसानों पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। उन्हें समय रहते अपनी फसल बेचने और कर्ज चुकाने का मौका मिलना चाहिए, ताकि वे आर्थिक संकट में न फंसे। अगर यह समस्या हल नहीं होती, तो हजारों किसान आर्थिक संकट में आ सकते हैं और उनका भविष्य अंधकारमय हो सकता है।



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समाधान की आवश्यकता

सरकारी फैसलों में फेरबदल करने और किसानों की परेशानियों का समाधान निकालने की जरूरत है। सरकार को किसानों की समस्याओं को समझते हुए उनके हित में फैसले लेने चाहिए। सरकार के फैसलों के बीच फंसा किसान इस समय खुद को असहाय महसूस कर रहा है और उसे मदद की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस मुद्दे का हल नहीं निकाला गया, तो यह किसानों के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट बन सकता है।



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