एमपी फूड सेफ्टी रेड का सच: कहीं चूहे तो कहीं मिले कॉकरोच, इसके बाद भी बच निकले मिलावटखोर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग बड़े होटलों और फूड ब्रांड्स पर छापेमारी कर रहा है।
- रेडिसन, सयाजी, डोमिनोज और KFC जैसे नामों में गड़बड़ी मिली है।
- यह अभियान 12 से 26 सितंबर तक चलेगा।
- दूसरी ओर इन मामलों में एक अलग ही सच्चाई निकलकर सामने आई है।
- पिछले 5 साल में दर्ज मामलों में से सिर्फ 3% में ही सजा हो पाई है।
छापे तो हुए, पर नतीजा क्या निकला
त्योहारों का सीजन नजदीक है और बाजार में मिठाई से लेकर फास्ट फूड तक की खपत बढ़ रही है। इसी को देखते हुए एफडीए (FDA – Food Safety Department) ने पूरे प्रदेश में सख्ती बढ़ा दी है।
इंदौर, भोपाल और जबलपुर में लगातार छापे मारे जा रहे हैं। FDA कमिश्नर मनोज पुष्प के मुताबिक एक हफ्ते में ही 400 जगहों पर कार्रवाई हो चुकी है।
पर सवाल यह है कि इतनी कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोरों पर असर क्यों नहीं दिखता। इसका जवाब कोर्ट के आंकड़ों में छिपा है।
5 साल का रिपोर्ट कार्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने जुलाई 2026 में राज्यसभा में आंकड़े रखे थे। इसके मुताबिक 2021 से जून 2026 तक मध्य प्रदेश में 68 हजार 932 सैंपल जांचे गए। इनमें से 9 हजार 406 सैंपल अमानक या मिसब्रांडेड निकले।
इन 9 हजार 406 मामलों में से सिर्फ 243 में आपराधिक दोषसिद्धि हो सकी। बाकी 10 हजार 263 मामले जुर्माने, कंपाउंडिंग या दीवानी कार्रवाई से ही निपटा दिए गए। यानी कड़ी सजा की दर बेहद कम रही है।
कोर्ट में क्यों बरी हो जाते हैं आरोपी
ग्वालियर डेयरी केस
अगस्त 2023 में ग्वालियर की श्रीराम डेयरी से दही का सैंपल लिया गया था। इसमें सॉलिड्स नॉन-फैट तय मानक से कम मिला था। अधिकारी ने 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
वहीं मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो पता चला कि सैंपल की रिपोर्ट आने में 4 महीने लग गए। तय समय सिर्फ 14 दिन का था। कोर्ट ने माना कि इतनी देरी से सैंपल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर जुर्माना रद्द कर दिया गया।
रतलाम दूध सैंपल केस
रतलाम में 2011 में दूध का सैंपल लिया गया था। इसे लैब भेजने में भी देरी हुई। प्रिजर्वेटिव डालने की तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था। अधिकारियों के हस्ताक्षर भी एक हफ्ते बाद हुए।
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने भी यही फैसला बरकरार रखा। दोनों ही मामलों में एक बात साफ है, प्रक्रिया में चूक से केस कमजोर पड़ जाता है।
एक्सपर्ट की राय
सीनियर एडवोकेट अजय गुप्ता के मुताबिक इसकी तीन बड़ी वजहें हैं। पहली जांच में देरी होना। दूसरी सैंपलिंग की प्रक्रिया में खामी रहना। तीसरी, सरकारी लैब में संसाधनों की कमी होना। इनकी वजह से आरोपियों को कोर्ट में आसानी से राहत मिल जाती है।
बड़े ब्रांड्स में मिली गंदगी
चालू अभियान के दौरान भी कई जगह गंभीर लापरवाही सामने आई है।
मक्खियां और चूहों के अवशेष
इंदौर में 15 सितंबर को डोमिनोज, सबवे, पिज्जा हट, KFC और ला पिनोज के आउटलेट्स पर मक्खियां और चूहों के अवशेष मिले। इससे पहले सोशल इंदौर, बिग बास्केट और हेडेली पिज्जा के लाइसेंस भी निलंबित किए जा चुके हैं।
होटल से 50 किलो सड़े आलू जब्त
भोपाल में रेडिसन होटल से 50 किलो सड़े आलू जब्त हुए। सयाजी होटल के फ्रीजर में एक्सपायर्ड फिश और चिकन मिला। गुरु कृपा कैटरर्स के किचन में कॉकरोच पाए गए।
फ्रिज में बासी दाल मखनी
जबलपुर में सागर रत्ना के फ्रिज में बासी दाल मखनी मिली। जैक्सन होटल के असांजो रेस्टोरेंट के किचन में गंदगी मिली। यहां प्रतिबंधित एनालॉग चीज के इस्तेमाल की बात भी सामने आई।
अफसरों का जवाब
एफडीए कमिश्नर मनोज पुष्प का कहना है कि विभाग सिर्फ छापेमारी तक सीमित नहीं रहेगा। जहां स्थिति गंभीर थी वहां लाइसेंस तुरंत निलंबित किए गए हैं। साथ ही टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने पर भी काम चल रहा है, ताकि जांच रिपोर्ट जल्दी मिल सके और केस कोर्ट में कमजोर न पड़े।
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