Fire Safety Rules 2026: आग लगी तो जिम्मेदार कौन? MP में अब हर साल देना होगा भवनों की सुरक्षा का हिसाब

Ramanand Tiwari | Oct 13, 2026, 21:26 IST
मध्यप्रदेश में आग से सुरक्षा के नए नियम लागू किए गए हैं।
मध्यप्रदेश में आग से सुरक्षा के नए नियम लागू किए गए हैं। अब तय श्रेणी के भवन मालिकों को हर साल फायर ऑडिट कराना होगा। फायर एनओसी से जुड़े नियमों का पालन भी जरूरी होगा। इसके अलावा संपत्तियों पर फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। ऐसे में सवाल उठता है कि टैक्स वसूलने वाले नगरीय निकाय आग बुझाने के लिए कितने तैयार हैं?
Madhya Pradesh introduces new fire safety rules requiring annual audits for specified buildings.

टैक्स वसूलेंगे निकाय, सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

मध्यप्रदेश में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के नए नियमों (MP Fire Safety Rules 2026) का उद्देश्य आग लगने से पहले सुरक्षा इंतजाम मजबूत करना है। इसके तहत भवन मालिकों को फायर ऑडिट और प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।



संपत्तियों पर फायर टैक्स लगाने का भी प्रावधान है। ऐसे में नगरीय निकायों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। क्या उनके पास पर्याप्त दमकल गाड़ियां हैं? क्या आग बुझाने के लिए पानी और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं? क्या जरूरत पड़ने पर बचाव उपकरण समय पर पहुंच सकेंगे?



फरवरी में विधानसभा में भी उठा था मुद्दा

आग से सुरक्षा का मुद्दा 25 फरवरी 2026 को विधानसभा में भी उठा था। विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने फायर सेफ्टी कानून और नियमित ऑडिट की व्यवस्था का मुद्दा उठाया था।



उन्होंने व्यावसायिक परिसरों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर आग से सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।



इसके बाद जुलाई में विधानसभा ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से संबंधित विधेयक पारित किया। अब अक्टूबर में नए नियमों की अधिसूचना सामने आई है।



सवाल यह है कि जिन सुरक्षा इंतजामों को लेकर विधानसभा में चिंता जताई गई थी, उनमें जमीन पर कितना सुधार होगा?



हर साल 30 जून तक देनी होगी फायर ऑडिट रिपोर्ट

नए नियमों के मुताबिक, तय श्रेणी के बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक भवनों को हर साल फायर ऑडिट कराना होगा। इसकी रिपोर्ट 30 जून तक जमा करनी होगी।



अगर कोई भवन मालिक तय समय पर रिपोर्ट नहीं देता है तो उसे कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद तीन महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा। इस दौरान भी नियमों का पालन नहीं हुआ तो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट निरस्त किया जा सकता है।



हालांकि, यहां एक बड़ा सवाल है। क्या ऑडिट में सिर्फ अग्निशमन उपकरणों की मौजूदगी देखी जाएगी या यह भी जांचा जाएगा कि आग लगने पर वे सही तरीके से काम करेंगे या नहीं?



बंद निकास द्वार, खराब फायर अलार्म और काम नहीं करने वाले अग्निशमन उपकरण भी खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल रिपोर्ट जमा कराना काफी नहीं होगा। सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक जांच भी जरूरी होगी।



किन भवनों के लिए फायर एनओसी जरूरी?

उपलब्ध नियम संबंधी विवरण के मुताबिक, भवनों की ऊंचाई, उनके उपयोग और प्रति मंजिल क्षेत्रफल के आधार पर फायर एनओसी की शर्तें तय की गई हैं।



भवन की श्रेणीबताए गए मानक
आवासीय भवन24 मीटर से अधिक ऊंचाई और 750 वर्गमीटर से अधिक प्रति मंजिल क्षेत्रफल
शैक्षणिक एवं संस्थागत भवन15 मीटर से अधिक ऊंचाई और 500 वर्गमीटर से अधिक प्रति मंजिल क्षेत्रफल
व्यावसायिक एवं सभा भवन15 मीटर से अधिक ऊंचाई और 750 वर्गमीटर से अधिक प्रति मंजिल क्षेत्रफल

इन मानकों की अंतिम कानूनी पुष्टि मूल राजपत्र की संबंधित अनुसूची से करना जरूरी है। खासकर यह देखना होगा कि ऊंचाई और क्षेत्रफल की शर्तें एक साथ लागू होंगी या अलग-अलग।



फायर टैक्स का पैसा कहां खर्च होगा?

नए कानून में फायर टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन केवल टैक्स वसूलने से आग बुझाने की व्यवस्था अपने आप बेहतर नहीं होगी।



सवाल यह है कि टैक्स से मिलने वाला पैसा कहां खर्च किया जाएगा। क्या इससे नई दमकल गाड़ियां खरीदी जाएंगी? क्या फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ेगी? क्या कर्मचारियों को आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण मिलेगा?



इसके अलावा क्या नगरीय निकाय इस राशि का हिसाब सार्वजनिक करेंगे? क्या लोगों को बताया जाएगा कि उनके इलाके में आग लगने पर दमकल कितनी देर में पहुंचेगी?



फायर टैक्स की वास्तविक दर और इसे लागू करने की तारीख संबंधित अधिसूचनाओं से स्पष्ट होगी।



नियम तोड़े तो कार्रवाई, अधिकारियों की जवाबदेही क्या?

नए कानून में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।



खतरनाक भवनों का निरीक्षण किया जा सकेगा। जहां लोगों की जान या संपत्ति को खतरा होगा, वहां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। सुनवाई का अवसर देने के बाद भवन सील करने का प्रावधान भी है।



लेकिन सवाल यह है कि अगर किसी भवन को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मिल गया और बाद में वहां गंभीर कमी सामने आई तो जिम्मेदारी किसकी होगी?



क्या संबंधित अधिकारी से भी जवाब मांगा जाएगा? क्योंकि केवल प्रमाणपत्र जारी होने का मतलब यह नहीं है कि भवन में आग लगने का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है।



नए नियमों से क्या फायदा होगा?

नियमित फायर ऑडिट से भवनों में सुरक्षा की कमियों का समय रहते पता चल सकता है। अग्निशमन उपकरणों की जांच होगी। आपातकालीन निकास और फायर अलार्म जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना होगा।



इससे भवन मालिकों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। फायर टैक्स से नगरीय निकायों को अग्निशमन सेवाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन भी मिल सकते हैं।



हालांकि, इसका फायदा तभी मिलेगा जब नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाएगा।



नए नियमों के सामने क्या चुनौतियां होंगी?

नए नियमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनका पालन कराना है। अगर निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह गया तो सुरक्षा व्यवस्था में खास सुधार नहीं होगा।



बिना पर्याप्त जांच के प्रमाणपत्र जारी करने से भी जोखिम बना रहेगा। इसके अलावा अगर फायर टैक्स से मिलने वाला पैसा अग्निशमन सेवाओं पर खर्च नहीं हुआ तो नए नियमों का अपेक्षित लाभ सीमित रह सकता है।



इसलिए जरूरी है कि भवन मालिकों के साथ नगरीय निकायों की जवाबदेही भी तय हो।



नियमों की फाइल या सुरक्षित शहर?

मध्यप्रदेश में आग से सुरक्षा के नए नियमों का असर तभी दिखाई देगा, जब जमीन पर व्यवस्थाएं बेहतर होंगी। इसके लिए नियमित ऑडिट के साथ दमकल गाड़ियों, फायर स्टेशनों, प्रशिक्षित कर्मचारियों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता भी जरूरी है।



आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आग लगने पर दमकल कितनी जल्दी पहुंचती है। साथ ही सुरक्षा इंतजामों की मदद से कितनी घटनाओं को रोका जा सकता है।



अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन मालिकों के लिए हर साल फायर ऑडिट जरूरी है, तो क्या नगरीय निकायों की दमकल तैयारियों का भी सालाना ऑडिट होना चाहिए?

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