एमपी के वित्तीय सुधारों पर नीति आयोग की मुहर, सड़कों और स्कूलों पर सरकार का खास ध्यान
NEWS IN SHORT
- नीति आयोग की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के बेहतर वित्तीय प्रबंधन की सराहना हुई है।
- राज्य ने साल 2021-22 से लगातार अपने रेवेन्यू सरप्लस के रिकॉर्ड को बरकरार रखा है।
- पिछले 5 सालों में एमपी की कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5% की बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
- प्रदेश का पूंजीगत खर्च दोगुना होकर विकास कार्यों की नई रफ्तार को दर्शा रहा है।
- जीएसटी और एक्साइज ड्यूटी की बेहतर वसूली से खजाने में भारी इजाफा दर्ज हुआ है।
News In Detail
फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में एमपी में वित्तीय प्रबंधनकी तारीफ की गई है। ये रिपोर्ट नीति आयोग ने जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने 2021-22 से लगातार राजस्व का अधिशेष बनाए रखा है।
पिछले पांच सालों में मध्य प्रदेश का कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5% और कर राजस्व में 62.52% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ये सफलता मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की बेहतर वसूली की वजह से मिली है।
5 सालों में खर्च दोगुना
राज्य सरकार ने पिछले 5 सालों में पूंजीगत खर्च को लगभग दोगुना कर दिया है। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह दिखाता है कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक विकास पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
सड़क, स्कूल और सिंचाई परियोजनाओं पर खास ध्यान
देवड़ा के मुताबिक सड़कों, स्कूलों और सिंचाई परियोजनाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 2023-24 में पूंजीगत खर्चा 57 हजार 348 करोड़ था। अब यह 2025-26 के संशोधित अनुमान में 30% बढ़कर 74 हजार 662 करोड़ तक पहुंच गया है।
प्रदेश ने लगातार रेवेन्यू सरप्लस को बनाए रखा
रिपोर्ट में राज्य की अर्थव्यवस्था के अच्छे पहलू के तौर पर यह सामने आया है कि प्रदेश ने लगातार अपने रेवेन्यू सरप्लस को बनाए रखा है। ये 2023-24 में बढ़कर 12 हजार 488 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसके अलावा सरकार ने विकास कार्यों को तेजी से करने के लिए Capital Outlayमें भारी निवेश किया है, जो पिछले पांच वर्षों में 29 हजार 812 करोड़ रुपए से बढ़कर 56 हजार 539 करोड़ रुपए हो गया है।
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