एमपी में डेयरी प्रोडक्ट में मिलावटी जहर, दो हजार से ज्यादा सैंपल फेल, ग्वालियर सबसे आगे

Aman Vaishnav | Apr 01, 2026, 08:56 IST
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मध्यप्रदेश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट अब गंभीर संकट बन चुकी है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट में दो हजार से ज्यादा सैंपल फेल पाए गए हैं। इन मिलावटी सामान के इस्तेमाल से शरीर में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

हाल ही में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की रिपोर्ट सामने आई है। इसमें दो हजार से ज्यादा फूड सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले ग्वालियर से सामने आए हैं जहां लगभग 420 सैंपल मिलावटी पाए गए हैं।



डेयरी प्रोडक्ट्स में सबसे ज्यादा मिलावट

हैरानी की बात ये है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में ही सबसे ज्यादा मिलावट पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये मिलावट फूड पॉइजनिंग, डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हार्मोनल बीमारियों जैसे गंभीर रोगों का कारण बन रही है।



FDA की यह रिपोर्ट मोबाइल वैन के जरिए लिए गए सैंपल और उनके टेस्ट रिजल्ट पर आधारित है। इसमें पिछले तीन साल के आंकड़े शामिल हैं। यह पहली बार है जब मोबाइल वैन के जरिए एक लाख सैंपल का डेटा इकट्ठा करके एक पूरी रिपोर्ट तैयार की गई है।



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ग्वालियर में सबसे ज्यादा मिलावट

राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा मिलावट के मामले सामने आए हैं।



यहां लगभग 420 सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके बाद गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) जैसे जिलों में भी कई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।



इसके अलावा शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर और नरसिंहपुर समेत 30 से ज्यादा जिलों में मिलावट का मामला सामने आया है। जांच में दूध, पनीर, मावा, मिठाइयों और मसालों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई गई है।



किस जिले में कितने सैंपल फेल



जिलाफेल सैंपलजिलाफेल सैंपल
ग्वालियर420दमोह20
गुना110हरदा20
उज्जैन95अलीराजपुर20
भिंड90विदिशा18
बुरहानपुर75झाबुआ18
शाजापुर70सागर15
खरगोन65मंडला15
जबलपुर60दतिया15
सीहोर55शिवपुरी12
धार40छिंदवाड़ा12
राजगढ़35बालाघाट10
नीमच30डिडोरी8
नरसिंहपुर28पन्ना8
रीवा25कटनी6
शहडोल6

मिलावटी खाने से बढ़ती बीमारियां

गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि, मिलावटी खाने में मौजूद एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स शरीर में जाकर हार्मोन सिस्टम को बिगाड़ देते हैं। इससे पेट की सेहत खराब होती है।



साथ ही शरीर में अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इसके कारण शरीर में पोषण की कमी हो जाती है और मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां बढ़ने लगती हैं।



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किस जिले में कितने मिलावटी प्रोडक्ट पाए गए

  • ग्वालियर: दूध, दही, पनीर, घी, मिक्स्ड मिल्क, गजक, मावा बर्फी, मालााई बर्फी, चावल और आटा।
  • दमोह: जलेबी, बेसन लड्डू, आलू मटर, चाऊमीन, घी, पनीर और दही जैसे खाद्य पदार्थ।
  • शाजापुर: दूध, घी, पनीर, मावा, बेसन, लाल मिर्च पाउडर और कुकिंग ऑयल।
  • इंदौर: लस्सी, मिल्क केक, मावा कतली, पनीर, इडली और सांभर।
  • उज्जैन: जीरा, घी और पनीर के नमूनों में मिलावट सामने आई।
  • भिंड: मालााई बर्फी, मावा पेड़ा, सौंफ और काली मिर्च के सैंपल फेल।
  • मुरैना: मावा, घी, पनीर, बेसन लड्डू और बूंदी लड्डू।
  • धार: मावा, पनीर, धनिया पाउडर और पताशे।
  • रीवा: तुअर दाल और मिठाई में मिलावट सामने आई।
  • सिवनी: गुजिया, सेव और पनीर में मिलावट सामने आई।
  • सागर: मोतीचूर लड्डू में मिलावट सामने आई।
  • नरसिंहपुर: दूध में मिलावट सामने आई।
  • खंडवा: गुड़ चिक्की का सैंपल फेल हुआ।
  • बैतूल: दही और काली मिर्च में मिलावट पाई गई।
  • सीहोर: खाने का तेल खराब गुणवत्ता का था।
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मसाले और तेल में भी मिलावट का जहर

सिर्फ डेयरी प्रोडक्ट्स ही नहीं, मसाले और खाने का तेल भी मिलावट से बच नहीं पाए हैं। लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के भी कई सारे सैंपल (जांच में मिलावट) फेल पाए गए हैं।



एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन चीजों का लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन जैसी मिठाइयों में भी मिलावट के मामले सामने आए हैं।



त्योहारों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है। दमोह, भिंड और मुरैना जैसे जिलों में मिठाइयों के सैंपल भी बड़ी संख्या में फेल पाए गए हैं।



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मिलावटी नेटवर्क को खत्म करने की योजना

FDA आयुक्त दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि, जो सैंपल फेल हुए हैं उनके आधार पर दुकानदारों और निर्माताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना और कानूनी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। निगरानी को भी सख्त किया गया है।



मिलावट के इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक नई योजना के तहत काम किया जा रहा है। मोबाइल वैन पूरे प्रदेश में घूमकर सैंपल इकट्ठा कर रही हैं और उनकी टेस्टिंग की जा रही है।



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