सेहत से खिलवाड़: MP में बेखौफ घूम रहे मिलावटखोर, कहां अटका 109 करोड़ का बजट
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में असुरक्षित खाद्य सैंपल कम मिले, लेकिन कम टेस्टिंग वजह हो सकती है।
- तीन सालों में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग 11.1 प्रतिशत तक घट गई है।
- कम जांच के कारण मिलावट की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पा रही है।
- खाद्य सुरक्षा विभाग का 109 करोड़ रुपए का फंड अब तक अटका हुआ है।
- जांच व्यवस्था की क्षमता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सैंपलिंग में लगातार गिरावट
मध्यप्रदेश फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (MPFDA – Madhya Pradesh Food and Drugs Administration) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में उल्लंघन के मामले घटे हैं। हलांकि सैंपलिंग भी उसी अनुपात में घटी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में 13 हजार 998 सैंपल जांचे गए थे। इनमें से दो हजार सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
2024-25 में 13 हजार 920 सैंपल टेस्ट हुए। इनमें एक हजार 635 सैंपल मिलावटी या घटिया पाए गए। 2025-26 के अस्थायी आंकड़ों में और तेज गिरावट दिखी है। इस साल सिर्फ 12 हजार 448 सैंपल जांचे गए, जिनमें से 757 सैंपल ही गड़बड़ मिले।
सुधार या कमजोर जांच
विभाग के मुताबिक उल्लंघन में गिरावट का मतलब उद्योगों का बेहतर अनुपालन भी हो सकता है। लेकिन जब टेस्टिंग की संख्या ही घट रही हो, तो पूरी तस्वीर साफ नहीं मिलती। यही वजह है कि यह आंकड़ा भरोसे और चिंता, दोनों को जन्म दे रहा है।
सिविल और क्रिमिनल केस के आंकड़े
सिविल मामलों की संख्या भी अस्थिर रही है। 2023-24 में 1,938 सिविल केस दर्ज हुए थे। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर दो हजार 597 हो गई। लेकिन 2025-26 में यह घटकर एक हजार 790 रह गई। क्रिमिनल मामलों में सजा की संख्या 46 से घटकर 22 हुई थी। इसके बाद यह फिर बढ़कर 32 तक पहुंची।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों जरूरी है यह आंकड़ा
खाद्य मिलावट सिर्फ कागजी अनुपालन का मुद्दा नहीं है। यह सीधे लोगों की सेहत से जुड़ा है। जब सैंपलिंग घटती है, तो बाजार तक पहुंचने से पहले गड़बड़ सामान पकड़ने की क्षमता भी कमजोर होती है। यही वजह है कि आंकड़ों में यह गिरावट आम लोगों के लिए भी मायने रखती है।
लैब और स्टाफ की कमी
MPFDA के इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव साफ दिख रहा है। पिछले साल विभाग ने राज्य की फूड टेस्टिंग लैब को अपग्रेड करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI – Food Safety and Standards Authority of India) से 109 करोड़ रुपए मांगे थे।
फरवरी 2026 तक भी यह मदद नहीं मिली। इसी दौरान रूटीन टेस्टिंग तक रुक गई, क्योंकि विभाग के पास कोई फूड एनालिस्ट तैनात नहीं था। इसके अलावा माइक्रोबायोलॉजी लैब भी काम नहीं कर रही थी।
कफ सिरप कांड ने बढ़ाई चिंता
विभाग की साख को 2025 के कफ सिरप हादसे ने और झटका दिया। छिंदवाड़ा में जहरीले कोल्ड्रिफ सिरप से 20 से ज्यादा बच्चों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद MPFDA की निगरानी और लाइसेंसिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। इसने विभाग की जांच क्षमता को लेकर भरोसे का संकट और गहरा कर दिया।
आगे क्या
एक अधिकारी ने बताया कि 2025-26 के आंकड़े फिलहाल अस्थायी हैं। आगे की टेस्टिंग और अदालती कार्यवाही के बाद इनमें बदलाव संभव है। विभाग का कहना है कि पूरी तस्वीर आने वाले महीनों में साफ होगी।
FAQ
- मध्यप्रदेश में फूड सैंपलिंग कितनी घटी है?
2023-24 से 2025-26 के बीच सैंपलिंग में 11.1% की गिरावट आई है। 2023-24 में 13,998 सैंपल जांचे गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 12,448 रह गई। - MPFDA ने लैब अपग्रेड के लिए कितनी राशि मांगी थी?
MPFDA ने FSSAI से 109 करोड़ रुपए की मांग की थी। यह राशि राज्य की फूड टेस्टिंग लैब को अपग्रेड करने के लिए मांगी गई थी। फरवरी 2026 तक यह फंड नहीं मिला था। - छिंदवाड़ा कफ सिरप हादसे का इस मुद्दे से क्या संबंध है?
छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप से 20 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी। इस हादसे के बाद MPFDA की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे। इसने विभाग की जांच क्षमता को लेकर भरोसे का संकट बढ़ाया।
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