4 वरिष्ठ अधिकारियों को सुपरसीड कर वन बल प्रमुख बने IFS शुभ रंजन सेन को CAT का नोटिस
News In short
- वरिष्ठ IFS हिदायत ऊल्लाह खान ने HoFF पद पर अपनी वरिष्ठता की अनदेखी का लगाया आरोप।
- 28 फरवरी 2026 के आदेश के खिलाफ अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने कोर्ट में पेश की दलीलें।
- पांचवें नंबर के जूनियर अधिकारी शुभ रंजन सेन को कमान देने पर उठाए सवाल।
- याचिकाकर्ता का पिछला 5 साल का APAR रिकॉर्ड 'आउटस्टैंडिंग' होने का दावा।
- जबलपुर CAT ने मुख्य सचिव और केंद्र सरकार सहित सभी पक्षों से मांगा जवाब।
News in detail
मध्य प्रदेश के सबसे वरिष्ठ IFS अधिकारी हिदायत ऊल्लाह खान ने अपनी अनदेखी के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। जूनियर ऑफिसर शुभ रंजन सेन को 'HoFF' (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) बनाने के फैसले को जबलपुर CAT में चुनौती दी गई है, जिस पर कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है।
सीनियर IFS अधिकारी ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
मध्य प्रदेश वन विभाग के सबसे वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हिदायत ऊल्लाह खान ने अपनी वरिष्ठता को नजरअंदाज किए जाने पर कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। उन्होंने अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल के माध्यम से जबलपुर स्थित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका दायर की है। याचिका में 28 फरवरी 2026 को जारी उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत IFS शुभरंजन सेन को हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स नियुक्त किया गया।
IFS खान के बेदाग सर्विस रिकॉर्ड और वरिष्ठता का हवाला
सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि हिदायत ऊल्लाह खान वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं और उनका सर्विस रिकॉर्ड बेदाग है। उन्होंने दलील दी कि पिछले 5 वर्षों में खान का APAR 'आउटस्टैंडिंग' रहा है। इसके बावजूद वरिष्ठता क्रम में पांचवें स्थान पर मौजूद अधिकारी को पद सौंपना 16 अप्रैल 2009 के चयन दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।
CAT ने नोटिस जारी कर शासन से मांगा जवाब
जबलपुर CAT ने अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल के तर्कों को सुनने के बाद मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने इस प्रकरण में केंद्र सरकार (वन मंत्रालय), मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (वन) और नवनियुक्त अधिकारी शुभ रंजन सेन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर किस आधार पर वरिष्ठता की अनदेखी कर यह नियुक्ति की गई है।
प्रशासनिक चयन प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में
आवेदक हिदायत ऊल्लाह खान का आरोप है कि चयन समिति ने बाहरी और अप्रासंगिक कारणों से उनकी योग्यता को नजरअंदाज किया है। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा कोर्ट में पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं।
चार सीनियर्स को सुपरसीड कर हेड बने थे शुभ रंजन
राज्य सरकार ने 1991 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी शुभ रंजन सेन को मध्यप्रदेश का नया वन बल प्रमुख (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) नियुक्त किया था। शुभ रंजन सेन इससे पहले प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) के पद पर पदस्थ थे। इस नियुक्ति में सरकार ने चार वरिष्ठ भारतीय वन सेवा अधिकारियों की वरिष्ठता को दरकिनार किया था। इनमें 1989 बैच के आईएफएस अधिकारी हिदायत उल्लाह खान तथा 1990 बैच के बिभाष ठाकुर, असित गोपाल और रेणु सिंह शामिल हैं।
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