वन रक्षक की हत्या पर उबाल : 13-14 अप्रैल को प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन, शहीद का दर्जा और एक करोड़ मुआवजे की मांग

Ramanand Tiwari | Apr 11, 2026, 23:21 IST
Photograph: (the sootr)
मुरैना में वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की हत्या के बाद वन कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। शहीद का दर्जा और एक करोड़ मुआवजे के लिए 13-14 अप्रैल को प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा।

मध्यप्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ और रेंजर संगठन के आह्वान पर वन कर्मचारियों और अधिकारियों ने कैंडल मार्च निकालकर मुरैना के वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की हत्या के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।



प्रांताध्यक्ष रामेश मौर्य ने अब 13 और 14 अप्रैल को प्रदेशभर में अगले चरण के आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन ने साफ कहा है कि शहीद का दर्जा, 1 करोड़ मुआवजा और सख्त कार्रवाई तक आंदोलन जारी रहेगा।



कैंडल मार्च में दिखा आक्रोश

मध्यप्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ एवं रेंजर संगठन के बैनर तले वन कर्मचारियों और अधिकारियों ने कैंडल मार्च निकालकर हरिकेश गुर्जर को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी।



अब अगला चरण: 13-14 अप्रैल

संघ ने विरोध को आगे बढ़ाते हुए दो बड़े कार्यक्रम तय किए हैं—



13 अप्रैल: जिला मुख्यालयों पर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन।


14 अप्रैल: भोपाल वन भवन में शीर्ष अधिकारियों को ज्ञापन।



रामेश मौर्य ने सभी कर्मचारियों से एकजुट रहकर आंदोलन को मजबूत करने की अपील की है।



मांगों पर सख्त रुख

कर्मचारी संगठन ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं—



  • हरिकेश गुर्जर को शहीद का दर्जा।
  • परिजनों को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता।
  • आरोपियों पर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई।
  • सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी।
  • रेत माफियाओं पर बुलडोजर एक्शन।

ड्यूटी के दौरान कुचलकर हत्या

8 अप्रैल को अम्बाह रेंज में वन अपराध रोकने के दौरान हरिकेश गुर्जर को रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचल दिया गया। घटना के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है।



पहले भी दोहराता रहा है ऐसा पैटर्न

प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन को लेकर पहले भी वन और पुलिस अमले पर हमले हो चुके हैं। एक आईपीएस अधिकारी की मौत का मामला भी सामने आ चुका है, लेकिन इसके बावजूद ठोस समाधान नजर नहीं आता।



सख्ती के दावे, जमीन पर असर नहीं

हर घटना के बाद सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन अवैध खनन का नेटवर्क लगातार सक्रिय रहता है। यही वजह है कि इस बार कर्मचारी संगठन खुलकर विरोध में उतर आया है।



आंदोलन क्यों अहम

यह विरोध सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है। इसे सुरक्षा, सम्मान और कार्रवाई की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस दबाव के बीच क्या ठोस कदम उठाती है।



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