मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, वनकर्मियों को गोली चलाने पर सीधे FIR से राहत

Sanjay Dhiman | Aug 07, 2026, 17:15 IST
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मध्य प्रदेश में वन विभाग के कर्मचारियों को ड्यूटी में हथियार चलाने पर सीधे FIR से राहत मिली है। पहले मजिस्ट्रेट जांच होगी। BNSS की धारा 218(2) के तहत यह प्रावधान लागू हुआ है।

मध्य प्रदेश सरकार ने वन विभाग के कर्मचारियों के लिए नया आदेश जारी किया है। अब ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने पर पुलिस सीधे FIR (फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज नहीं कर सकेगी। पहले मजिस्ट्रेट जांच होगी। यह प्रावधान BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता), 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू हुआ है। इसका मकसद शिकारियों और तस्करों से जूझते वनकर्मियों को सुरक्षा देना है।



भोपाल से आई इस खबर ने वन विभाग के कर्मचारियों में राहत की लहर ला दी है। रोज मैदान में तैनात रहने वाले इन कर्मचारियों को अक्सर खतरनाक हालात का सामना करना पड़ता है। कई बार आत्मरक्षा में हथियार चलाना जरूरी हो जाता है। अब तक ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस केस और गिरफ्तारी का डर बना रहता था।



क्या है नई प्रक्रिया

नए आदेश के अनुसार प्रक्रिया अब पूरी तरह बदल गई है। यदि ड्यूटी के दौरान कोई कर्मचारी हथियार का इस्तेमाल करता है, तो सीधी कार्रवाई नहीं होगी।



मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य

सबसे पहले संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दंडाधिकारी यानी मजिस्ट्रेट मामले की जांच करेंगे। जांच पूरी होने तक पुलिस न तो FIR दर्ज कर सकेगी, न गिरफ्तारी कर सकेगी। यह सुरक्षा हर स्तर के वन कर्मचारी को मिलेगी।



सरकार की मंजूरी जरूरी

अगर जांच में हथियार का इस्तेमाल गलत पाया भी जाता है, तब भी तुरंत कार्रवाई नहीं होगी। राज्य सरकार को पहले जांच रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से स्वीकार करना होगा। इसके बाद ही पुलिस कार्रवाई शुरू हो सकेगी।



BNSS का नया प्रावधान

यह सुरक्षा प्रावधान BNSS 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। इस धारा का मकसद वन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा देना है। सरकार चाहती है कि मैदान में तैनात कर्मचारी बिना डर अपनी ड्यूटी निभाएं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में यह प्रावधान अहम माना जा रहा है।



किसे मिलेगा फायदा

यह आदेश केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। वन विभाग के सभी अधिकृत अधिकारियों को इसका लाभ मिलेगा।



इसमें वनरक्षक और वनपाल शामिल हैं। साथ ही उप वन क्षेत्रपाल और वन क्षेत्रपाल यानी रेंजर भी इस दायरे में आते हैं। सहायक वन संरक्षक (ACF – Assistant Conservator of Forests) और उप वनमंडल अधिकारी (SDO – Sub Divisional Officer) को भी सुरक्षा मिलेगी।



इसके अलावा वनमंडल अधिकारी (DFO – Divisional Forest Officer) और उप वन संरक्षक भी इस दायरे में शामिल हैं। क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (CCF – Chief Conservator of Forests) और फील्ड डायरेक्टर स्तर के अधिकारी भी इससे जुड़े हैं।



फैसला क्यों जरूरी है

वन्यजीव तस्करों, अवैध शिकारियों और लकड़ी माफियाओं से निपटना आसान काम नहीं है। वनकर्मियों को अक्सर आत्मरक्षा में हथियार उठाना पड़ता है। लेकिन इसके बाद पुलिस केस और गिरफ्तारी का डर उन्हें दबाव में डाल देता था।



कई कर्मचारी इसी डर से कार्रवाई करने से बचते थे। इससे शिकारियों और तस्करों को फायदा मिलता था। अब नए प्रावधान से यह डर काफी हद तक कम हो जाएगा।



वन विभाग का फ्रंटलाइन स्टाफ अब बिना अनुचित भय के ड्यूटी निभा सकेगा। इससे वन और वन्यजीव सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि इससे जंगलों में गश्त और सख्त होगी।



FAQ

  1. वन विभाग के नए आदेश में क्या बदला है?
    अब ड्यूटी के दौरान हथियार चलाने पर पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं कर सकेगी। पहले मजिस्ट्रेट जांच होगी। जांच पूरी होने तक गिरफ्तारी भी नहीं होगी।
  2. यह प्रावधान किस कानून के तहत लागू हुआ है?
    यह प्रावधान BNSS 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। इसका मकसद वनकर्मियों को सुरक्षा देना है।
  3. इस आदेश का फायदा किन कर्मचारियों को मिलेगा?
    वनरक्षक से लेकर फील्ड डायरेक्टर तक सभी अधिकृत अधिकारियों को फायदा मिलेगा। रेंजर, ACF, DFO और CCF स्तर के अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।

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गोली चलाने का अधिकार



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