115 साल पहले कैसा था मध्य प्रदेश का इलाका? हर 10 हजार लोगों में से सिर्फ 60 पढ़ पाते थे अंग्रेजी

Atul Dwivedi | Oct 31, 2026, 21:38 IST
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस विशेष: जानिए 115 साल पहले प्रदेश के इलाके में शिक्षा, रोजगार और साक्षरता की कैसी थी स्थिति।
Madhya Pradesh Foundation Day Special: A glimpse into education, literacy and employment in the region 115 years ago, based on the 1911 Census.
आज मध्य प्रदेश की पहचान तेजी से बढ़ते शहरों, आधुनिक सड़कों, शिक्षण संस्थानों और रोजगार के नए अवसरों से होती है, लेकिन करीब 115 साल पहले इस क्षेत्र की तस्वीर कैसी थी? कितने लोग अंग्रेजी पढ़ पाते थे? अखबारों की संख्या कितनी थी? रोजगार के सबसे बड़े साधन कौन-से थे और स्कूलों में कितने बच्चे पढ़ते थे?

इन सवालों के जवाब 1911 की जनगणना रिपोर्ट में मिलते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े उस दौर की शिक्षा, सूचना और रोजगार व्यवस्था की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं।



1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश का गठन हुआ था। इस साल प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। गठन के बाद से सात दशकों में मध्य प्रदेश ने लंबा सफर तय किया है। शहरों का विस्तार हुआ, सड़क और परिवहन नेटवर्क बढ़ा, शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ी और रोजगार के नए क्षेत्र सामने आए, लेकिन आज के मध्य प्रदेश को समझने के लिए उसके अतीत के पन्ने पलटना भी जरूरी है।



1911 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि उस दौर में हर 10 हजार लोगों में करीब 60 लोग अंग्रेजी पढ़ पाते थे। पूरे क्षेत्र में अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं की संख्या महज 27 थी। रेलवे में 36,367 लोग काम करते थे, जबकि सिंचाई विभाग में 18,473 कर्मचारी थे। प्राथमिक शिक्षा के लिए 3,865 स्कूल थे, जिनमें 2.77 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे।



यहां एक बात समझना जरूरी है। 1911 में मध्य प्रदेश आज के स्वरूप में अस्तित्व में नहीं था। उस समय यह क्षेत्र अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों और रियासतों में बंटा हुआ था। इसलिए उस दौर के आंकड़े आज के मध्य प्रदेश के आंकड़े नहीं, बल्कि तत्कालीन सेंट्रल प्रोविंस एंड बेरार और संबंधित क्षेत्रों की तस्वीर दिखाते हैं।



1911 की जनगणना: एक बड़े इलाके की गिनती

1911 की जनगणना रिपोर्ट आईसीएस अधिकारी जे.सी. मार्टिन ने तैयार की थी। वे उस समय सेंट्रल प्रोविंस एंड बेरार में जनगणना कार्य के अधीक्षक थे।



रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के दायरे में सेंट्रल प्रोविंस के आठ ब्रिटिश जिले, बेरार के चार जिले और 15 सामंती राज्य शामिल थे। यह जनगणना की पांचवीं कवायद थी, जिसकी शुरुआत 10 मार्च 1911 को हुई थी।



इतने बड़े क्षेत्र की आबादी गिनने के लिए व्यापक स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। रिपोर्ट में 91,770 गणनाकारों, 8,422 सुपरवाइजरों और 675 चार्ज सुपरिंटेंडेंट का उल्लेख मिलता है। जनगणना क्षेत्र का विस्तार करीब 1 लाख 31 हजार वर्ग मील था और इसकी आबादी लगभग 1 करोड़ 60 लाख बताई गई थी।



इन आंकड़ों से उस समय जनगणना की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। आज की तरह डिजिटल साधन उपलब्ध नहीं थे। इतने बड़े इलाके में घर-घर जाकर आबादी का विवरण जुटाना एक बड़ा प्रशासनिक काम था।



जनगणना में निकलीं दिलचस्प बातें

1. हर 10 हजार में सिर्फ 5 महिलाएं पढ़ पाती थीं अंग्रेजी

आज अंग्रेजी पढ़ना और सीखना आम बात है, लेकिन 1911 में तस्वीर बिल्कुल अलग थी। उस समय हर 10 हजार लोगों में सिर्फ 60 लोग अंग्रेजी पढ़ पाते थे। इनमें 55 पुरुष थे। महिलाओं की संख्या महज 5 थी।



यानी अंग्रेजी पढ़ने वाली महिलाओं की संख्या बेहद कम थी। ये आंकड़े उस दौर में शिक्षा की सीमित पहुंच को दिखाते हैं। साथ ही पुरुषों और महिलाओं के बीच शिक्षा के बड़े अंतर की कहानी भी बताते हैं।



2. पूरे इलाके में सिर्फ 27 अखबार, प्रसार संख्या 10,627

आज मोबाइल पर एक क्लिक करते ही देश-दुनिया की खबरें मिल जाती हैं, लेकिन 1911 में खबरों के साधन बेहद सीमित थे। उस समय पूरे क्षेत्र में केवल 27 अखबार और पत्र-पत्रिकाएं थीं।



इनमें हिंदी, अंग्रेजी, मराठी और गुजराती भाषाओं के प्रकाशन शामिल थे। कुछ दैनिक थे, कुछ साप्ताहिक और कुछ मासिक। इन सभी की कुल प्रसार संख्या सिर्फ 10,627 थी।



आज के डिजिटल मीडिया के दौर में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन उस समय अखबार सूचना और विचार पहुंचाने के अहम साधन थे।



3. रेलवे देता था सबसे ज्यादा रोजगार, 36 हजार से ज्यादा कर्मचारी

आज रोजगार के कई क्षेत्र हैं। सरकारी विभागों से लेकर निजी कंपनियों और आईटी सेक्टर तक नौकरियों के अवसर मौजूद हैं, लेकिन 1901 से 1910 के बीच रेलवे रोजगार का सबसे बड़ा क्षेत्र था।



उस समय इस इलाके में 562 मील रेलवे मार्ग था। रेलवे में 36,367 लोग काम करते थे। रोजगार देने के मामले में सिंचाई विभाग दूसरे स्थान पर था। इसमें 18,473 कर्मचारी थे।



ये आंकड़े बताते हैं कि उस दौर में रेलवे और सिंचाई व्यवस्था का कितना बड़ा महत्व था। एक ओर रेलवे लोगों और सामान की आवाजाही का प्रमुख साधन था, तो दूसरी ओर सिंचाई विभाग खेती के लिए अहम भूमिका निभाता था।



4. 3,865 प्राथमिक स्कूलों में पढ़ते थे 2.77 लाख बच्चे

आज मध्य प्रदेश में स्कूलों की स्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन 115 साल पहले यहां शिक्षा की व्यवस्था कैसी थी? 1911 की रिपोर्ट इसका भी जवाब देती है।



उस समय पूरे क्षेत्र में 3,865 प्राथमिक स्कूल थे। इनमें 2,77,620 बच्चे पढ़ते थे। वहीं, सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 444 थी। इनमें 53,308 विद्यार्थी दर्ज थे।



आज के मुकाबले ये आंकड़े शिक्षा व्यवस्था की एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। ये बताते हैं कि उस समय स्कूली शिक्षा का ढांचा कितना बड़ा था और कितने बच्चे पढ़ाई से जुड़े हुए थे।

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