इतनी बड़ी खुशी, लेकिन नहीं मनेगा जश्न, केवल राज्य गान

The Sootr | Nov 01, 2023, 24:00 IST
इतनी बड़ी खुशी, लेकिन नहीं मनेगा जश्न, केवल राज्य गान
देश का दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश 1 नवंबर 2023 को 68वां स्थापना दिवस मना रहा है। ऐसे में आचार संहिता लागू होने के कारण प्रदेश में किसी भी तरह का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।

BHOPAL. देश का दिल कहा जाने वाला मध्यप्रदेश आज यानी 1 नवंबर 2023 को 68वां स्थापना दिवस मना रहा है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के कारण प्रदेश में आचार संहिता लागू कर दिया गया है। ऐसे में इस अवसर पर किसी तरह का समारोह आयोजित नहीं होगा, केवल राज्य गान का आयोजन होगा।



1 नवंबर 1956 को प्रदेश का गठन

देश के कुछ हिस्सों को छोड़कर सभी जगह 26 जनवरी 1950 में भारत का संविधान लागू किया गया था। साल 1951-1952 में देशभर में आम चुनाव की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। वर्ष 1956 में राज्यों के पुर्नगठन का सिलसिला चल रहा था, उसी दौरान 1 नवंबर 1956 में मध्यप्रदेश का गठन किया गया था। तभी से ये दिन प्रदेश के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। गौरतलब है कि नक्शे के बीच में होने के कारण इसे मध्य भारत के नाम से जाना जाता था, इसका गठन इसके भाषा के आधार पर किया गया था। बता दें कि इसके घटक राज्य मध्यप्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल थे, जिनकी अपनी-अपनी विधानसभाएं थीं।



हर साल लाल परेड ग्राउंड में होता है भव्य कार्यक्रम

राज्य सरकार पिछले कई सालों से 1 नवंबर को शहर के लाल परेड ग्राउंड में भव्य पैमाने पर स्थापना दिवस मनाती आ रही है। विभाग ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को पत्र लिखकर समारोह आयोजित करने की अनुमति मांगी है। अनुरोध मुख्य सचिव और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता वाले एक समन्वय पैनल के माध्यम से भेजा गया था, लेकिन विभाग को एमसीसी के कारण अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से निर्धारित सभी कार्यक्रमों को रद्द करने या रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है।



जबलपुर में नहीं मनी थी दिवाली

जब मात्र 50 हजार की आबादी वाले शहर भोपाल को राजधानी बना दिया गया तो जबलपुर से एक प्रतिनिधिमंडल जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद, लाल बहादुर शास्‍त्री और गोविंद वल्‍लभ पंत से मिलने दिल्‍ली पहुंचा, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जाता है कि एक-दो घरों को छोड़ दिया जाए तो जबलपुर ने उस साल दिवाली नहीं मनाई थी। पूरा शहर अंधेरे में डूबा था, किसी ने अपने घरों में एक दीया तक नहीं जलाया था। बता दें कि उन्हीं दिनों विनोबा भावे ने जबलपुर को सांत्वना स्वरूप संस्कारधानी की उपमा दी थी।



ऊंट की तरह दिखने वाला राज्‍य

आजादी के बाद का समय था और पंडित जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। जब उन्होंने जब मध्यप्रदेश का नक्शा देखा तो बोले, ये क्‍या ऊंट की तरह दिखने वाला राज्‍य बना दिया।



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