साल खत्म होने पर, लेकिन नहीं निकला फ्री कोचिंग का टेंडर ! और कितने दिन चाहिए ?
समझें क्या है पूरा मामला
- एमपी में फ्री कोचिंग योजना का टेंडर अब तक नहीं निकला।
- सरदार पटेल कोचिंग योजना की कक्षाएं शुरू नहीं हुईं।
- पिछड़ा और अल्पसंख्यक छात्रों को योजना का इंतजार है।
- विभाग ने चार से पंद्रह दिन का समय बताया है।
- देरी से छात्रों की तैयारी प्रभावित होने का सवाल उठा है।
लालफीताशाही किस कदर सिस्टम पर हावी है, इसका एक उदाहरण आपको बताते हैं। मध्यप्रदेश में विशेष वर्गों के छात्रों के लिए फ्री कोचिंग स्कीम चलती है। लेकिन इस स्कीम का हाल इतना बेहाल है कि क्या ही कहें। आलम ये है कि 2026 खत्म होने में सिर्फ 4 महीने बचे हैं, लेकिन सरकार कोचिंग के लिए टेंडर ही नहीं निकाल पाई है।
मामला क्या है ?
द सूत्र ने 18 अगस्त को मध्यप्रदेश में फ्री कोचिंग स्कीम का हाल बताया था। हमने मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को फ्री कोचिंग देने के लिए, जो स्कीम चल रही हैं, उनकी पड़ताल की थी।
तब हमें पता चला कि पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना चलती है। लेकिन इस योजना के तहत फ्री कोचिंग क्लासेस शुरु नहीं हो सकी है।
क्लासेस शुरु न होने की वजह है अब तक विभाग की तरफ से टेंडर न निकाल पाना। 10 सितंबर 2026 को एक बार फिर हमने पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक विभाग से संपर्क किया। हम जानना चाहते थे कि क्या अब फ्री कोचिंग के लिए टेंडर हो चुके हैं ?
इसके जवाब में पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक विभाग के ओआईसी, अवधेश सिंह सिसौदिया ने बताया कि अभी तक टेंडर जारी नहीं हो सके हैं। इसके बाद द सूत्र ने पूछा कि और कितना वक्त इसमें लग सकता है। इसके बाद हमें बताया गया कि चार पांच दिन में भी काम हो सकता है। या फिर 15 दिन भी लग सकते हैं।
टेंडर ही नहीं निकाल सका
यानी एक तरफ साल खत्म होने में महज 4 महीने का वक्त बचा है। दूसरी तरफ विभाग आज तक टेंडर ही नहीं निकाल सका। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या टेंडर तब निकाला जाएगा, जब सारी भर्ती परीक्षा जो साल 2026 में होनी हैं, वो खत्म हो चुकी होंगी।
सवाल ये भी है कि क्या इस तरह छात्रों का साल खराब नहीं हो रहा ? क्योंकि जो गरीब छात्र महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। उन पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए ये कोचिंग ही एकमात्र रास्ता है। ऐसे में जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा ?
पीएम भी कर चुके हैं ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, छात्रों के लिए बड़ा ऐलान किया था। पीएम ने युवाओं को फ्री ऑनलाइन कोचिंग देने का वादा किया था। पीएम के इस ऐलान के बाद द सूत्र ने मध्यप्रदेश में फ्री कोचिंग योजना की पड़ताल की थी।
हमारी पड़ताल में पता चला था कि आकांक्षा योजना, शौर्य संकल्प योजना, सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना के साथ साथ, शासकीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण संस्थान के कोर्स भी प्रदेश में चल रहे हैं।
सबसे बुरा हाल सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना का है। क्योंकि 18 अगस्त तक विभाग कोचिंग के लिए टेंडर नहीं निकाल सका था। ऐसे में सितंबर शुरु हो चुका है, और एक बार फिर वही कहानी सामने आ रही है कि टेंडर नहीं हुए हैं।
सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना क्या है ?
मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए ये योजना 2020 में शुरु की गई थी। इसके तहत नेशनल लेवल पर क्लैट यानी Common Law Admission Test के साथ साथ NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है।
2026-27 में 17 करोड़ 25 लाख का बजट इसके लिए रखा गया है। दावा है कि प्रदेश के 10 संभागों में 4 हजार 500 छात्रों को फ्री कोचिंग दी जाएगी। लेकिन ये योजना फिलहाल काम नहीं कर रही है। वजह है सरकार की शर्तों पर प्राइवेट कोचिंग संस्थानों की रुचि न होना।
बीते 3 सत्रों में कोचिंग ही नहीं चल पाई। इसकी सबसे बड़ी वजह है सरकारी टेंडर की शर्तें। क्योंकि सरकार इस योजना के तहत टेंडर जारी करती है, प्राइवेट कोचिंग संस्थान टेंडर मिलने के बाद ऑफलाइन तरीके से बैच लगाते हैं।
लेकिन कोविड के बाद से हालात बदल गए। कोचिंग संस्थान ऑनलाइन मोड पर चले गए, और सरकार आज भी छात्रों को ऑफलाइन ही पढ़ाना चाहती है।
बीत रहा है वक्त
बात अगर सरकारी भर्तियों की करें, तो हाल ही में कर्मचारी चयन मंडल ने 7500 पदों पर फिर से पुलिस भर्ती निकाल दी है। नवंबर में परीक्षाएं भी शुरु हो जाएंगी। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल आरक्षक चालक भर्ती करेगा।
फिर पंचायत सचिव और रोजगार सहायक की भर्ती होनी है। यानी एक के बाद एक बड़ी भर्तियां आनी हैं, पर फ्री कोचिंग शुरु न होने से क्या इन छात्रों का नुकसान नहीं हो रहा ?
कोचिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय तिवारी कहते हैं, जिन अधिकारियों को स्कीम को चलाना है उनकी नीयत ठीक नहीं है। इसलिए योजनाएं सही तरीके से अंजाम पर नहीं पहुंचती।
एक तरफ फ्री कोचिंग स्कीम के हाल बेहाल हैं, तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश सरकार ये दावा करती है कि वो निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी।
विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपए देने की बातें हो रही हैं। पर सवाल यही है कि योजनाएं शुरु तो हो जाती हैं, पर अंजाम पर क्यों नहीं पहुंचती ?
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