एमपी में सरकारी राशन के आंकड़े हकीकत से परे, प्रदेश का हर दूसरा व्यक्ति राशन के भरोसे बैठा!
क्या आप यकीन करेंगे कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में हर दूसरा व्यक्ति सरकार के मुफ्त राशन पर निर्भर है? हाल ही में लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने सबको हिलाकर रख दिया है। ये आंकड़े सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की एक अलग ही कहानी बयां करते हैं।
प्रदेश के 60% लोग राशन पर निर्भर
मध्य प्रदेश में आधे से ज्यादा लोग मुफ्त राशन पर निर्भर हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक हैरान कर देने वाली जानकारी दी है। जानकारी के मुताबिक राज्य में पांच करोड़ 38 लाख सात हजार 137 लोग मुफ्त राशन का फायदा उठा रहे हैं।
यह आंकड़ा इसलिए हैरान करने वाला है क्योंकि राज्य की कुल आबादी लगभग 9 करोड़ है। यानी करीब 60% लोग अपनी खाने-पीने की जरूरतों के लिए पूरी तरह से सरकारी मदद पर निर्भर हैं। इसका मतलब है कि राज्य का हर दूसरा और तीसरा व्यक्ति आज इस योजना का लाभ उठा रहा है।
सरकार का दावा सच्चाई से अलग
पिछले 9 सालों (2013-14 से 2022-23) में मध्य प्रदेश में दो करोड़ 30 लाख लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल चुके हैं। ये जानकारी नीति आयोग की जनवरी 2024 में जारी रिपोर्ट के अनुसार है।
वहीं 25 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के पांच करोड़ 38 लाख लोग अभी भी मुफ्त राशन (PMGKAY) पर पूरी तरह से निर्भर हैं। इस तरह सरकार का दावा तो है कि गरीबी से लोग बाहर आ रहे हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग सरकारी मदद पर ही निर्भर हैं।
राशन में देशभर में एमपी की हिस्सेदारी
देश भर में कुल 79 करोड़ 40 लाख दो हजार 614 लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) का लाभ उठा रहे हैं। इस बड़ी संख्या में मध्य प्रदेश के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 6.78% है।
वहीं हम देश के बड़े राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल पहले हैं। इनके बाद मध्य प्रदेश वो पांचवां राज्य है जहां सबसे ज्यादा लोग मुफ्त राशन ले रहे हैं।
व्यवस्था को लेकर सरकार सख्त
सरकार ने अब इस व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मंत्रालय की जानकारी के अनुसार टीपीडीएस संशोधन आदेश 2025 के तहत अब हर पांच साल में ई-केवाईसी कराना जरूरी होगा।
इस बदलाव का मकसद यह है कि अपात्र लोगों को राशन सूची से बाहर किया जा सके। साथ ही सिर्फ असली जरूरतमंद परिवारों को ही खाद्यान्न मिल सके। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी। इसकी जिम्मेदारी राज्यों की होगी।
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