एमपी वित्त विभाग का चौंकाने वाला खुलासा: महिला सशक्तीकरण का पैसा सड़क और जल योजनाओं में!

Aman Vaishnav | Apr 07, 2026, 08:44 IST
mp gender budget audit report spending controversy
मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बना जेंडर बजट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार देखा जाए तो बजट का पैसा सड़कों, भवनों और लाइटिंग पर खर्च हुआ है।

मध्यप्रदेश में 2007-08 से महिलाओं के लिए अलग से जेंडर बजट का प्रावधान किया गया था। इसका मकसद था महिलाओं के कल्याण और सशक्तीकरण के लिए जरूरी कामों जैसे कर्ज, रोजगार प्रशिक्षण और स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च करना।



पहले के सालों में इसका खर्च सही दिशा में हुआ लेकिन अब कुछ सालों से जेंडर बजट की रकम सड़कों, स्कूल भवनों और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं पर भी खर्च हो रही है। ये खुलासा वित्त विभाग के ऑडिट से हुआ है।



जेंडर बजट का उद्देश्य क्या है?

जेंडर बजट का मुख्य उद्देश्य यह है कि महिलाओं को सिर्फ छोटे कर्ज तक ही सीमित न रखा जाए। उन्हें बाजार में अपना नाम बनाने और बड़े ब्रांड से जुड़ने के लिए भी वित्तीय मदद दी जाए।



इसके अलावा, महिलाओं को पारंपरिक कामों से बाहर निकालकर आईटी, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में ट्रेनिंग देने का भी उद्देश्य है, ताकि वे अच्छे वेतन वाली नौकरियों में काम कर सकें।



वर्किंग वुमन के लिए सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधाएं जिला स्तर पर बढ़ाना भी इस बजट का हिस्सा है। इसके साथ ही, महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देना ताकि एनीमिया जैसी समस्याओं को कम किया जा सके।



ग्रामीण इलाकों में मातृ स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाना और ग्रामीण महिलाओं को स्मार्टफोन और इंटरनेट के जरिए सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना भी जेंडर बजट का एक अहम उद्देश्य है।



महिलाओं का समय बच रहा

  • 2025-26 में वन स्टॉप सेंटर और हेल्पलाइन के बजाय, इन पैसों का इस्तेमाल भवन निर्माण, सौंदर्यीकरण और अन्य योजनाओं पर किया गया।
  • चार हजार 500 करोड़ रुपए जल जीवन मिशन पर खर्च हुए। इसे बताया गया कि इससे ग्रामीण महिलाओं का रोजाना 2-3 घंटे का समय बच रहा है।
  • 125 करोड़ रुपए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की सड़कों पर स्मार्ट लाइटिंग और सीसीटीवी पर खर्च हुए।
  • एक हजार 17 करोड़ स्कूलों के निर्माण पर खर्च हुए, जिसमें छात्राओं के लिए अलग हाइजीन कॉर्नर बनाने की बात की गई।
  • 215 करोड़ छात्राओं के लिए साइकिल खरीदने पर खर्च किए गए, ताकि ड्रॉप-आउट कम हो सके।
  • 85 करोड़ शासकीय आवास के निर्माण पर खर्च हुए, जिन्हें महिला कर्मियों के लिए सुरक्षित आवास बताया गया।

लाड़ली बहना पर कितने खर्च

2026-27 के लिए जेंडर बजट के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें से 23 हजार 382 करोड़ रुपए लाड़ली बहना योजना पर खर्च होंगे।



गृह, ऊर्जा और परिवहन विभाग के लिए जो आवंटन किया गया है वह इतना कम है कि उसका इस्तेमाल सिर्फ विभागीय खर्चों में हो गया। जेंडर बजट का 68% हिस्सा महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग पर ही खर्च हो रहा है।



वित्त के ऑडिट में 2025-26 के खर्चों की खामियां

  • पांच हजार करोड़ रुपए महिला कल्याण पर खर्च किए गए। इसका उपयोग साबित करने वाले प्रमाण पत्र जमा नहीं किए गए।
  • राज्य के राजस्व का 45% हिस्सा सिर्फ वेतन और पेंशन के खर्च में चला जा रहा है। जेंडर बजट की राशि महिला कर्मचारियों के वेतन में जोड़ दी गई है।
  • महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजनाओं पर खर्च नहीं हो पाया है।
  • वन स्टॉप सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण के लिए जो फंड जारी किया गया था, उसका इस्तेमाल सिर्फ वेतन और किराया देने में किया जा रहा है।

FAQ

  1. मध्यप्रदेश में जेंडर बजट कब शुरू हुआ था?
    मध्यप्रदेश में इसकी शुरुआत साल 2007-08 में की गई थी। इसका मकसद महिलाओं के लिए अलग से वित्तीय योजना बनाना था। तब से हर साल इस बजट में राशि आवंटित होती है। इसका मुख्य फोकस महिला सशक्तिकरण और उनके आर्थिक विकास पर है।

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