BRTS हटाने पर बोले पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह- हमारी सरकार का था ये फैसला
बीआरटीएस (बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम) इंदौर हटना शुरू हो चुका है। हाईकोर्ट जबलपुर का औपचारिक फैसला आने के बाद शुक्रवार देर रात जीपीओ चौराहे से रेलिंग भी हटा दी गई। इस फैसले पर भाजपा गदगद है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस अभूतपूर्व फैसले के लिए जमकर सराहा जा रहा है। लेकिन अब कांग्रेस की ओर से एक दावा किया गया है, जिसमें यह पहल कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समय की बताई जा रही है, जब तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह थे।
'द सूत्र' से बोले जयवर्धन सिंह
कांग्रेस नेता बोले- शिवराज सरकार ने दबाया फैसला
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मोहन सरकार ने शिवराज सरकार के पाप का प्रायश्चित किया है। कांग्रेस सरकार इस पर काम कर चुकी थी, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस फैसले को दबा दिया और बीआरटीएस हटाने का काम नहीं किया। अब डॉ. मोहन यादव की सरकार ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इसे हटाने का काम शुरू किया है।
सीएम मोहन यादव ने इंदौर में की थी घोषणा
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर एयरपोर्ट पर अचानक घोषणा की थी कि बीआरटीएस को हटाया जाएगा और इसके लिए सरकार हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने कहा था कि इस कॉरिडोर को हटाकर भविष्य में ट्रैफिक सुगम बनाने के लिए चौराहों पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा।
आई बसें चलती रहेंगी, पूरा कॉरिडोर हटने में अभी 6 माह लगेंगे
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के लिए पूरा सर्वे किया जाएगा। फिलहाल जहां ट्रैफिक की अधिक समस्या है, वहां से रेलिंग हटाई जा रही है, जिसमें जीपीओ चौराहा, नवलखा और शिवाजी वाटिका क्षेत्र शामिल हैं।
वहीं, एआईसीटीएसएल (AICTSL) के सीईओ दिव्यांक सिंह ने कहा कि पूरी टेंडर प्रक्रिया होगी, जिसमें कॉरिडोर हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। इसे तीन-चार टुकड़ों में विभाजित कर अलग-अलग कंपनियों को देने की योजना है, ताकि एक साथ काम हो और जल्दी पूरा किया जा सके।
उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में ही एक माह लग सकता है। वहीं, दोनों ओर लेफ्ट साइड में आई बसें चलती रहेंगी। इसके लिए अस्थायी बस स्टॉप बनाए जाएंगे, जिन्हें बाद में स्थायी किया जाएगा। हालांकि, कॉरिडोर के अंदर से ट्रैफिक निकालने की अनुमति फिलहाल नहीं दी जाएगी। जब तक डिवाइडर बनाकर ट्रैफिक को व्यवस्थित नहीं किया जाता, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा, क्योंकि काम के दौरान सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहेगा।
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