एमपी के कॉलेजों में प्रोफेसरों की हाजिरी पर बवाल, 6 घंटे 40 मिनट रुकने का नया फरमान जारी

Aman Vaishnav | Mar 10, 2026, 11:01 IST
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मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसरों की उपस्थिति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने अब प्रोफेसरों का कार्यभार बढ़ाने का फैसला लिया है। इस फैसले से पूरे प्रदेश के हजारों प्रोफेसरों में नाराजगी फैल गई है।

NEWS IN SHORT

  • MP उच्च शिक्षा विभाग ने प्रोफेसरों के लिए रोजाना 6 घंटे 40 मिनट की उपस्थिति अनिवार्य की है।
  • यूजीसी के नियमों के अनुसार कॉलेजों में प्रोफेसरों का साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे तय है।
  • प्राध्यापक संघ का कहना है कि रोजाना 5 घंटे की उपस्थिति का पुराना नियम सही था।
  • मार्च 2026 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयुक्त ने समय बढ़ाने के नए निर्देश दिए हैं।

News In Detail

हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग एमपीने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह निर्देश दिए हैं कि, अब कॉलेजों में प्रोफेसरों की रोजाना उपस्थिति 6 घंटे 40 मिनट होनी चाहिए।



इस फैसले से प्रदेश भर के प्रोफेसर नाराज हैं। उनका कहना है कि यह आदेश यूजीसी की गाइडलाइनों और राज्य सरकार के पिछले आदेशों से अलग है।



प्रोफेसरों का साप्ताहिक कार्यभार

यूजीसी के हिसाब से एक शैक्षणिक सत्र में कुल 180 कामकाजी दिन होते हैं और प्रोफेसरों का साप्ताहिक कामकाजी समय 40 घंटे होना चाहिए। इसी नियम के तहत कॉलेजों में रोज कम से कम 5 घंटे की उपस्थिति जरूरी मानी जाती थी। लेकिन, 4 जनवरी 2019 को उस समय के प्रमुख सचिव ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें प्रोफेसरों की न्यूनतम उपस्थिति 5 घंटे तय की गई थी। अब यह समय बढ़ाकर 6 घंटे 40 मिनट कर दिया गया है।



मामला कब का है?

यह मामला 18 जनवरी 2019 का है जब इसी संबंध में एक आदेश जारी हुआ था। बाद में राज्य मंत्री परिषद ने यूजीसी विनियम-2018 के अनुसार सातवां वेतनमान लागू किया था। इसमें साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे और हर दिन कम से कम 5 घंटे उपस्थिति का प्रावधान रखा गया था।



मई 2024 में उच्च शिक्षा विभाग ने एक नया सार्थक अनुप्रयोग लागू किया था। इसके बाद कई कॉलेजों ने उपस्थिति की अवधि बढ़ाकर 6 घंटे कर दी गई थी। फिर 7 मार्च 2026 को आयुक्त प्रबल सिपाहा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थिति समय को बढ़ाकर 6 घंटे 40 मिनट करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जबलपुर और रीवा के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों ने कॉलेजों को पत्र भेजकर पालन सुनिश्चित करने को कहा है।



शिक्षकों में बढ़ रही नाराजगी

प्रोफेसरों का कहना है कि बिना कोई साफ नीति बनाए उपस्थिति का समय बढ़ाना सही नहीं है। कई कॉलेजों से यह भी शिकायतें आ रही हैं कि अगर वो समय पर नहीं पहुंचते तो उनके वेतन में कटौती की जा रही है, जिससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।



प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. आनंद शर्मा का कहना है कि, यूजीसी के नियम पूरे देश में एक जैसे हैं। शिक्षकों का साप्ताहिक कामकाजी घंटा 40 घंटे और कॉलेज में उपस्थिति 5 घंटे तय की गई है, जो पिछले 40 सालों से मध्यप्रदेश में लागू है। इसके बावजूद पिछले दो सालों से स्थिति साफ नहीं है और शासन के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे प्रोफेसरों में गुस्सा और असंतोष बढ़ गया है।



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