मध्य प्रदेश सरकार ने अब 2400 करोड़ का कर्ज लिया, पांच माह में 47,800 करोड़
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकार ने पांच महीनों में 47,800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया।
- कुल कर्ज का साधारण अनुमान 5,36,514 करोड़ रुपए पहुंच गया।
- सरकार लगभग हर 14 दिन बाजार से उधारी जुटा रही है।
- सबसे बड़ी उधारी 21 जुलाई को 24,400 करोड़ रुपए रही।
- अगस्त में सरकार ने कुल 6,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया।
मध्य प्रदेश सरकार की बढ़ती उधारी फिर चर्चा में है। सरकार लगभग हर 14 दिन बाजार पहुंच रही है। हर बार अलग ब्याज दर पर कर्ज लिया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में नई उधारी 47,800 करोड़ रुपए पहुंच गई। यह रकम अप्रैल से 18 अगस्त तक जुटाई गई। इस दौरान दस तारीखों पर प्रतिभूतियां नीलाम हुईं।
ताजा कर्ज लाड़ली बहना योजना की किस्त से पहले लिया गया। इसके बाद महिलाओं के खातों में 2,148 करोड़ रुपए भेजे गए। दोनों घटनाओं का समय करीब होने से सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कर्ज का पैसा योजना में गया, यह अलग प्रमाणित नहीं है। सरकारी उधारी एक साझा कोष में जाती है। इसी कोष से कई विभागों का खर्च चलता है।
हर 14 दिन नई उधारी
मोहन सरकार ने 18 अगस्त को 2,400 करोड़ रुपए जुटाए। इसके लिए दो सरकारी प्रतिभूतियां बाजार में नीलाम की गईं। इनके खरीदारों में बैंक और वित्तीय संस्थान शामिल रहते हैं।
पहला कर्ज 1,400 करोड़ रुपए का है। इसकी सालाना ब्याज दर 7.58 प्रतिशत तय हुई। इस कर्ज की कुल अवधि 12 वर्ष है।
दूसरा कर्ज 1,000 करोड़ रुपए का है। इसकी ब्याज दर 7.39 प्रतिशत रहेगी। सरकार आठ वर्षों में इस कर्ज का भुगतान करेगी।
दोनों कर्ज पर हर छह महीने ब्याज दिया जाएगा। ब्याज भुगतान जनवरी और जुलाई में होगा। मूल राशि तय अवधि पूरी होने पर लौटाई जाएगी।
इन प्रतिभूतियों की नीलामी RBI (Reserve Bank of India) के माध्यम से होती है। राज्य अपनी जरूरत के अनुसार उधारी कार्यक्रम तैयार करता है। बाजार की मांग से अंतिम ब्याज दर तय होती है।
अगस्त में लिए 6,000 करोड़
सरकार ने अगस्त में दूसरी बार बाजार से कर्ज लिया। इससे पहले चार अगस्त को 3,600 करोड़ रुपए जुटाए गए। यह राशि भी दो हिस्सों में ली गई थी।
पहला हिस्सा 1,600 करोड़ रुपए का था। दूसरा हिस्सा 2,000 करोड़ रुपए का था। दोनों को जोड़कर 3,600 करोड़ रुपए मिले।
चार अगस्त और 18 अगस्त की उधारी जोड़ना जरूरी है। इससे अगस्त की कुल रकम 6,000 करोड़ रुपए बनती है। यानी सरकार ने 14 दिनों में दो बार कर्ज लिया।
ताजा 2,400 करोड़ रुपए इसी क्रम का हिस्सा है। पांच महीनों में उधारी का सिलसिला लगातार बना रहा। लगभग हर दो सप्ताह में नई प्रतिभूति जारी हुई।
लाड़ली बहना से पहले कर्ज
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 19 अगस्त को मैहर में कार्यक्रम किया। यहां लाड़ली बहना योजना की 39वीं किस्त जारी हुई। करीब 1.25 करोड़ महिलाओं को इसका लाभ मिला।
सरकार ने 2,148 करोड़ रुपए से अधिक ट्रांसफर किए। हर पात्र महिला को कुल 1,750 रुपए मिले। इसमें 1,500 रुपए की मासिक सहायता शामिल थी। रक्षाबंधन पर 250 रुपए की अतिरिक्त राशि भी दी गई। इस विशेष सहायता पर 312.83 करोड़ रुपए खर्च हुए। मासिक किस्त पर 1,835.46 करोड़ रुपए से अधिक लगे।
सरकार ने यह भुगतान सीधे बैंक खातों में किया। ताजा कर्ज इससे एक दिन पहले लिया गया। इसलिए उधारी और योजना खर्च पर बहस तेज हुई। सिर्फ तारीखों से सीधा संबंध साबित नहीं होता। बजट खर्च कई राजस्व स्रोतों से पूरा होता है। इनमें कर और केंद्रीय सहायता भी शामिल हैं।
सरकार का क्या पक्ष है
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा पहले कह चुके हैं कि बुनियादी ढांचे को धन चाहिए। उनके अनुसार विकास कार्यों के लिए उधारी जरूरी होती है। सरकार कर्ज को तय सीमा में बताती रही है।
राज्य को केंद्रीय योजनाओं में भी अपना हिस्सा देना होता है। सड़क और सिंचाई परियोजनाओं में बड़ी शुरुआती लागत लगती है। बिजली और शहरी विकास में भी धन चाहिए।
सवाल केवल कर्ज लेने का नहीं है। रकम कहां खर्च हुई, यह भी महत्वपूर्ण है। पूंजीगत काम भविष्य में आय और सुविधाएं बढ़ा सकते हैं।
जरूरी FAQ
मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में कितना कर्ज लिया?
सरकार ने 15 अप्रैल से 18 अगस्त तक 47,800 करोड़ रुपए जुटाए। यह उधारी दस अलग तारीखों पर ली गई। सबसे बड़ी राशि 21 जुलाई को जुटाई गई। उस दिन 24,400 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया।
क्या मध्य प्रदेश का कुल कर्ज 5,36,514 करोड़ रुपए हो गया?
यह उपलब्ध आंकड़ों का साधारण जोड़ है। इसमें मार्च का कर्ज और नई उधारी शामिल है। पुराने कर्ज का मूलधन भुगतान इसमें नहीं घटाया गया। वास्तविक बकाया राशि वित्त विभाग के अंतिम खातों से स्पष्ट होगी।
क्या नया कर्ज लाड़ली बहना योजना के लिए लिया गया?
उधारी योजना की अगस्त किस्त से एक दिन पहले हुई। इससे दोनों घटनाओं पर चर्चा शुरू हुई। उपलब्ध विवरण रकम का योजना-वार उपयोग साबित नहीं करता। सरकारी कोष से कई योजनाओं और विभागों का खर्च चलता है।
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