एमपी का हर एक व्यक्ति कर्जदार, सभी पर 50 हजार से ज्यादा का उधार, जानें कैसे
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज अब बढ़कर 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो गया है।
- इस भारी-भरकम कर्ज की वजह से एमपी के हर छोटे-बड़े नागरिक पर 55 हजार 323 का कर्ज बैठ रहा है।
- सरकार ने पिछले साल के कर्ज के बदले सिर्फ ब्याज के रूप में ही 29 हजार करोड़ रुपए चुकाए हैं।
- सरकार अप्रैल और मई के महीने में ही बाजार से नौ हजार 200 करोड़ रुपए का नया कर्ज और ले चुकी है।
- फ्रीबीज योजनाओं पर ज्यादा खर्च होने के कारण राज्य पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है।
आखिर क्यों बढ़ रहा बोझ?
मध्य प्रदेश की धरती पर जन्म लेने वाले हर बच्चे और नागरिक पर अब 55 हजार 323 का कर्ज है। बता दें कि यह कर्ज किसी आम व्यक्ति या उनके माता-पिता ने निजी तौर पर नहीं लिया है। यह वह कर्ज है जो राज्य सरकार अपनी व्यवस्थाओं और योजनाओं को चलाने के लिए बाजार से ले रही है।
अब सरकार इस कर्ज को चुकाने के लिए जनता से टैक्स वसूलती है। इसके बाद ब्याज के साथ उन संस्थाओं को पैसा वापस करती है जिनसे लोन लिया गया है। वित्त विभाग की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों में यह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है।
आबादी और कर्ज का कनेक्शन
राज्य सरकार अभी मध्य प्रदेश की औसत आबादी लगभग 9 करोड़ मानकर चल रही है। हालांकि आबादी के बिल्कुल सही और वास्तविक आंकड़े फरवरी 2027 में सामने आएंगे।
इसी 9 करोड़ की आबादी के आधार पर जब कुल कर्ज को बांटा गया, तो प्रति व्यक्ति कर्ज का यह बड़ा आंकड़ा निकलकर सामने आया है।
सिर्फ दो महीने में लिया 9,200 करोड़ का लोन
वहीं यदि आंकड़ों को ध्यान से देखें तो 31 मार्च 2025 तक मध्य प्रदेश सरकार (मोहन सरकार) पर कुल कर्ज 4 लाख 88 हजार 714.17 करोड़ रुपए था। इसके ठीक बाद अप्रैल और मई के महीनों में सरकार ने चार किस्तों में नौ हजार 200 करोड़ रुपए का और कर्ज ले लिया।
इस नए लोन को मिलाने के बाद अब सरकार पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 4 लाख 97 हजार 914 करोड़ रुपए हो गया है। इसी वजह से हर नागरिक पर कर्ज का भार 55 हजार 323 पर पहुंच गया है।
सरकार ने साल 2025-26 में लिए गए पुराने कर्जों के बदले केवल ब्याज के रूप में ही 29 हजार करोड़ की राशि चुकाई है।
सरकार ने किस-किस से कितना कर्ज लिया?
वित्त विभाग के अनुसार राज्य सरकार ने यह पूरा पैसा किसी एक जगह से नहीं लिया है। अलग-अलग सेक्टर और वित्तीय संस्थानों से ये पैसा उधार लिया गया है।
| कर्ज का जरिया | कुल बकाया राशि |
| खुला बाजार | 3 लाख 33 हजार 278.21 करोड़ रुपए |
| केंद्र सरकार से लोन और एडवांस | 81 हजार 152.31 करोड़ रुपए |
| नेशनल स्मॉल सेविंग फंड | 38 हजार 178.05 करोड़ रुपए |
| वित्तीय संस्थान | 17 हजार 737.58 करोड़ रुपए |
| अन्य लायबिलिटी कैटेगरी | 13 हजार 951.57 करोड़ रुपए |
| कंपनसेशन और पावर बॉन्ड्स | ₹4,416.45 करोड़ |
| कुल कर्ज | 4 लाख 88 हजार 714.17 करोड़ रुपए |
एक साल इतना बढ़ा बोझ
हम बीते साल की तुलना करें, तो 31 मार्च 2025 की स्थिति में राज्य सरकार पर कुल कर्ज 4 लाख 21 हजार 740.27 करोड़ रुपए था। उस समय राज्य की आबादी 8.80 करोड़ मानी गई थी। इसके हिसाब से हर व्यक्ति पर 47 हजार 925 रुपए का कर्ज था।
इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि महज एक साल के भीतर ही हर नागरिक पर कर्ज का बोझ घटने के बजाय चह हजार रुपए और बढ़ गया है।
फ्रीबीज योजनाएं बढ़ा रही हैं आर्थिक संकट?
सरकार की तरफ से हमेशा यह दावा किया जाता है कि जो भी कर्ज लिया जा रहा है, उसे राज्य के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए खर्च किया जा रहा है।
जमीनी हकीकत कुछ अलग ही इशारा करती है। जानकारी के अनुसार हर महीने ली जा रही कर्ज की इस बड़ी रकम का एक मुख्य हिस्सा फ्रीबीज योजनाओं को चलाने में जा रहा है।
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