एमपी का राज्य समाज कल्याण बोर्ड भंग, नेता प्रतिपक्ष बोले- पीड़ित महिलाओं का छीना सहारा
News In Short
- मध्यप्रदेश सरकार ने 70 साल पुराना समाज कल्याण बोर्ड निरस्त कर दिया है।
- उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार इवेंट्स पर करोड़ों खर्च करती है।
- बोर्ड के भंग होने से प्रदेश में चल रहे 28 पारिवारिक परामर्श केंद्र बंद हो सकते हैं।
- परामर्श केंद्र बंद हो गए तो पीड़ित महिलाओं को सहारा छिन जाएगा।
News In Detail
मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले में 70 साल पुराना एमपी राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया गया है। यह बोर्ड 1956 से महिलाओं, बच्चों और वंचितों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा था। अब इस फैसले ने सियासत को गरमा दिया है।
कैबिनेट में दिया बड़ा आदेश
सरकार ने मंगलवार 3 फरवरी को हुई कैबिनेट बैठक में बोर्ड को खत्म करने का आदेश दिया था। साथ ही कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग में शामिल करने का आदेश दिया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और गरीब वर्ग पर बड़ा हमला बताया है।
इवेंट्स पर करोड़ों खर्च करती है सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस बोर्ड का तीन साल का बजट सिर्फ 4.22 करोड़ रुपए था। क्या सरकार इतनी रकम भी नहीं जुटा सकती? सिंघार ने आरोप लगाया कि जो सरकार इवेंट्स पर करोड़ों खर्च करती है। उसने 35 हजार लोगों से उनके मुंह का निवाला छीन लिया है।
उमंग सिंघार ने ये भी कहा कि राजस्थान, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे भाजपा शासित राज्यों में यह बोर्ड अभी भी काम कर रहा है। मध्यप्रदेश में ही इसे क्यों बंद किया गया?
पीड़ित महिलाओं का छीना सहारा
सिंघार ने ये भी लिखा कि बोर्ड के भंग होने से प्रदेश में चल रहे 28 पारिवारिक परामर्श केंद्र बंद हो सकते हैं। ये केंद्र घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए पुलिस स्टेशन जाने से पहले एक उम्मीद होते थे। अब यदि ये बंद हो गए तो पीड़ित महिलाओं को सहारा छिन जाएगा। थानों और कोर्ट में केस का बोझ भी बढ़ जाएगा।
राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कार्य?
- समाजिक कल्याण संगठनों की जरूरतों का समय-समय पर सर्वेक्षण और अनुसंधान करना।
- सहायता प्राप्त एजेंसियों के कार्यक्रमों और परियोजनाओं का मूल्यांकन करना।
- केंद्र और राज्य सरकार के जरिए दी गई सहायता का समन्वय करना।
- जहां कोई संगठन नहीं है, वहां स्वैच्छिक संगठनों की स्थापना को बढ़ावा देना।
- केंद्रीय कल्याण बोर्ड से अनुमोदित योजनाओं के तहत सहायता देना।
- परिवार, महिलाओं, बच्चों और विकलांगों की भलाई के लिए कार्य करना।
- राज्य के कमजोर वर्गों की स्थिति सुधारने में मदद करना।
- सामाजिक कार्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना और पायलट परियोजनाओं पर काम करना।
- आपदा के समय राहत उपायों में मदद प्रदान करना।
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