एमपी के सरकारी कर्मचारियों के लिए बदला नियम, ई-मेल पर आया नोटिस होगा मान्य

Aman Vaishnav | Mar 21, 2026, 11:08 IST
mp government employee service rules email notice
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कामकाज के पुराने तरीकों को अब पूरी तरह बदल दिया है। अब विभाग अधिकारियों और कर्मचारियों को ई-मेल के जरिए जरूरी नोटिस भेज सकेंगे। इस बदलाव से अब कोई भी कर्मचारी नोटिस मिलने से इनकार नहीं कर पाएगा।

NEWS IN SHORT

  • मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 30 में बड़ा संशोधन किया गया है।
  • अब सरकारी नोटिस और विभागीय जानकारी ई-मेल के जरिए भेजी जा सकेगी।
  • डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को अब कानूनी रूप से मान्य माना जाएगा।
  • अधिकारी अब नोटिस की पावती न मिलने का बहाना बनाकर देरी नहीं कर पाएंगे।
  • सीनियरिटी लिस्ट से जुड़ी आपत्तियां भी अब ऑनलाइन या ई-मेल पर ली जाएंगी।

News In Detail

सरकारी दफ्तरों में अब बहानेबाजी का दौर खत्म होने वाला है। मध्य प्रदेश सरकार ने सूचना भेजने की पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है। अब आपके पास विभाग का नोटिस डाक से नहीं, बल्कि सीधा आपके इनबॉक्स में आएगा। यह छोटा सा दिखने वाला बदलाव असल में बहुत बड़े कानूनी असर लेकर आया है।



क्या है बदलाव?

राज्य सरकार ने सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीके में बदलाव किया है। ये बदलाव सरकारी विभागों में अफसरों और कर्मचारियों के लिए है। पहले जहां स्पीड पोस्ट या व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत होती थी, अब विभाग द्वारा भेजी गई जानकारी या नोटिस को ई-मेल के जरिए भेजा जा सकता है। खास बात ये है कि वह भी मान्य होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 30* में बदलाव किया गया है।



अधिकारी या कर्मचारी नहीं बना सकेंगे बहाना

पहले तक अफसरों और कर्मचारियों के मामलों में विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक नहीं मानी जाती थी। यह तब तक माना जाता था, जब तक कि उन्हें नोटिस की पावती (स्वीकृति) न मिल जाए।



अब ई-मेल, डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। इसका मतलब है कि अब कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यह बहाना नहीं बना सकेगा कि उसे नोटिस की कॉपी डाक से नहीं मिली है।



किस पर पड़ेगा असर?

अब से यदि विभाग ने किसी को रजिस्टर्ड ई-मेल आईडी पर सूचना भेजी है तो उसे मान्यता दी जाएगी। इस नए बदलाव का सबसे बड़ा असर कर्मचारी की वरिष्ठता सूची (सीनियरिटी लिस्ट) पर पड़ेगा। अब सीनियरिटी लिस्ट से जुड़ी किसी भी दावे या आपत्ति को ई-मेल या वर्चुअली स्वीकार किया जाएगा।



मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 का नियम 30: अब तक आदेशों और सूचनाओं की तामील संबंधित शासकीय कर्मचारी पर व्यक्तिगत रूप से की जाती थी, या फिर उन्हें रजिस्ट्रीकृत डाक के जरिए सूचित किया जाता था।



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