कम वेतन से परेशान आउटसोर्स कर्मचारी, सामूहिक आत्मदाह की दी चेतावनी, खंडेलवाल को लिखा पत्र
मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स, अस्थायी और अंशकालिक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्दी कोई कदम नहीं उठाया गया, तो वे 28 अप्रैल 2026 को भोपाल स्थित बीजेपी मुख्यालय के सामने सामूहिक आत्मदाह करेंगे।
खंडेलवाल को लिखा पत्र
इस मामले में आउटसोर्स, अस्थायी, अंशकालिक, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को एक पत्र भेजकर अपनी समस्याएं बताई हैं।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के मुताबिक प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारी बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कई विभागों में कर्मचारियों को महज दो हजार से आठ हजार रुपए महीने मिल रहे हैं, जो निर्धारित न्यूनतम वेतन (12 हजार 425 से 16 हजार 769 रुपए) से काफी कम है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारी
ग्राम पंचायतों में चौकीदार, नल-जल चालक, सफाईकर्मी और अन्य कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। स्कूल और छात्रावासों में काम करने वाले अंशकालिक कर्मचारियों की स्थिति भी बहुत खराब है।
सरकार विकास के बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की हालत चिंताजनक है।
2003 के बाद से नियमित सरकारी भर्तियों में भारी कमी आई है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद लगभग समाप्त हो जाने से रोजगार संकट और बढ़ गया है।
50 हजार से ज्यादा आवेदन पर समाधान नहीं
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं। अब तक 50 हजार से ज्यादा आवेदन सरकार को भेजे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कर्मचारियों ने प्रदेश में बढ़ती आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया है। साथ ही हजारों श्रमिकों की असमय मौत और आत्महत्याओं का हवाला दिया है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- अंशकालिक कर्मचारियों को पूरा काम लेने पर न्यूनतम वेतन (12 हजार 425 से 16 हजार 769 रुपए) दिया जाए और उन्हें नियमित किया जाए।
- ग्राम पंचायत कर्मचारियों (चौकीदार, नल-जल चालक, सफाईकर्मी आदि) को निर्धारित न्यूनतम वेतन मिले।
- आउटसोर्स/ठेका प्रथा को खत्म कर कर्मचारियों को सीधे विभाग में शामिल किया जाए।
- कर्मचारियों का एकीकरण किया जाए।
- प्रदेश में न्यूनतम वेतन बढ़ाकर कम से कम 26 हजार रुपए प्रति माह किया जाए।
- श्रम कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए।
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