प्रोबेशन खत्म होते ही 6 महीने में नौकरी पक्की, लापरवाही पर खुद नियमित होंगे कर्मचारी
समझें क्या है पूरा मामला...
- सरकार ने कर्मचारियों के लिए मप्र सिविल सेवा नियम का एक नया प्रारूप तैयार किया है।
- अब कर्मचारियों को नियमित करने का फैसला 6 महीने के भीतर लेना होगा।
- 6 महीने में फैसला न लेने पर कर्मचारी को नियमित मान लिया जाएगा।
- गंभीर अपराध करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।
- कर्मचारी, उनके परिवार के लोग 15 जून तक अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करा सकते हैं।
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम उठाया है। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी लोग सालों-साल इस चिंता में रहते हैं कि वे कब पक्के होंगे।
प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद भी कर्मचारियों की फाइलें दबी रहती हैं। अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम में बड़े बदलावों का एक नया प्रारूप तैयार किया है। इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।
6 महीने में होगा फैसला
अभी के नियमों की बात करें तो अलग-अलग विभागों में प्रोबेशन अवधि यानी परखने का समय 2 से 3 साल तय होता है। सरकार ने देखा कि कई मामलों में विभागों के मुखिया 8 से 10 साल तक इस पर कोई फैसला ही नहीं लेते है।
मामला सालों तक अटका रहता है। इससे सीधे तौर पर कर्मचारियों का नुकसान होता है। विभागों में पद खाली रह जाते हैं और नई भर्तियां भी नहीं हो पातीं।
इस बड़े अंतर को खत्म करने के लिए नए नियमों में निर्णय लेने के लिए 6 महीने की समय-सीमा तय कर दी गई है। प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद विभाग प्रमुख को 6 महीने के अंदर यह तय करना होगा कि कर्मचारी का काम कैसा है।
इस 6 महीने में क्या होगा?
- कर्मचारी का काम बढ़िया और संतोषजनक पाया जाता है, तो उसे तुरंत नियमित करना होगा।
- काम संतोषजनक नहीं है, तो प्रोबेशन की अवधि को आगे बढ़ाने या न बढ़ाने पर फैसला लेना होगा।
- अधिकारी 6 महीने के अंदर कोई भी फैसला नहीं लेते हैं, तो वह कर्मचारी अपने आप नियमित मान लिया जाएगा।
नए नियमों में प्रस्तावित बदलाव
सरकार ने इस नए प्रारूप को सामान्य प्रशासन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है।
नियम 5 में नागरिकता का बदलाव
पुराने नियमों के तहत इसमें अलग राज्य और अलग देशों का जिक्र था। अब उन सभी पुराने विषयों को हटाकर केवल भारत का निवासीशब्द जोड़ा गया है।
नियम 9 में वरिष्ठता की नई परिभाषा
इसमें वरिष्ठता को लेकर स्थिति को पहले से ज्यादा साफ कर दिया गया है। कई पुराने और उलझाने वाले विषयों को हटा दिया गया है ताकि स्थिति बिल्कुल स्पष्ट रहे।
नौकरी से बाहर करने का नियम
संशोधित नियमों के लागू होने के बाद से गंभीर श्रेणी के अपराध करने वाले शासकीय सेवकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी।
पुराने नियमों के तहत अभी तक केवल महिला अपराध करने वाले कर्मचारियों को ही नौकरी से बाहर करने का प्रावधान था। अब इसमें सभी गंभीर अपराध शामिल होंगे।
दो बच्चों का नियम रहेगा जारी
नियमों का जो प्रारूप तैयार किया गया है, उसमें दो बच्चे ही अच्छे वाले नियम को यथावत रखने पर जोर दिया गया है। यानी इस बंदिश को पूरी तरह से हटाया नहीं जा रहा है।
हालांकि इसमें एक छोटी सी रियायत जरूर दी गई है। पूर्व के वर्षों में जिन शासकीय सेवकों के अलग-अलग परिस्थितियों के कारण दो या दो से अधिक बच्चे हो चुके हैं, उन्हें कार्रवाई से छूट मिल सकती है।
ध्यान रहे यह छूट भी एक तय समय सीमा के अंदर हो चुकी संतानों के मामलों में ही लागू होगी।
15 जून तक अपने सुझाव और आपत्तियां
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया है कि, इस नए ड्राफ्ट को आम जनता और कर्मचारियों के लिए खोल दिया गया है।
किसी सरकारी कर्मचारी, उनके परिवार के सदस्यों, अन्य संस्थाओं या नागरिकों को इस प्रारूप पर कोई आपत्ति है। या वे कोई नया सुझाव देना चाहते हैं, तो वे विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसे दर्ज करा सकते हैं।
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