अमरकंटक से अलीराजपुर तक स्वच्छ होगी नर्मदा, नहीं जाएगा नालों का पानी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी संरक्षण के लिए नमन मिशन को मंजूरी दी है।
- यह मिशन केंद्र की नमामि गंगे योजना की तर्ज पर तैयार किया गया है।
- इसके तहत नर्मदा में गिरने वाले सीवेज और नालों को पूरी तरह बंद किया जाएगा।
- नदी के कैचमेंट एरिया को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
- यह योजना अमरकंटक से अलीराजपुर तक पूरी नर्मदा को कवर करेगी।
नर्मदा नदी लंबे समय से प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। कई जगहों पर सीवेज सीधे नदी में मिल रहा था।
घाटों के आसपास कचरा और प्लास्टिक भी बड़ी समस्या बन चुके थे। इन सभी दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह व्यापक योजना तैयार की है।
नर्मदा क्यों है खास
बता दें कि मध्य प्रदेश के लिए नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं है। इसे राज्य की जीवनदायिनी नदी माना जाता है। प्रदेश की करीब 33 फीसदी आबादी पीने के पानी के लिए नर्मदा पर निर्भर है। खेती और अन्य जरूरतों के लिए भी लाखों लोग इसी नदी का सहारा लेते हैं।
नर्मदा देश की इकलौती ऐसी नदी है, जिसकी लोग परिक्रमा भी करते हैं। लोगों की इसी आस्था और जरूरत को देखते हुए सरकार ने कई विभागों को साथ लाकर वैज्ञानिक तरीके से यह योजना बनाई है।
नमन मिशन का नाम और मकसद
नर्मदा नमन मिशन का पूरा नाम है निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन। इसे मध्य प्रदेश सरकार का नर्मदा संरक्षण के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। मकसद साफ है, नदी को प्रदूषण से मुक्त रखना और उसकी अविरलता बनाए रखना।
किन जिलों से गुजरेगी योजना
बता दें कि नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के 16 जिलों से होकर गुजरती है। राज्य में इसकी कुल लंबाई करीब 1,077 किलोमीटर है। नमन मिशन नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर प्रदेश के अंतिम छोर अलीराजपुर तक पूरे रास्ते को कवर करेगा।
इसमें अनूपपुर, डिंडोरी, सिवनी, मंडला, नरसिंहपुर और जबलपुर जिले शामिल हैं। इसके अलावा नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास और खंडवा भी इस दायरे में आते हैं। खरगोन, धार, बड़वानी और अलीराजपुर में भी यह मिशन काम करेगा।
इतने बड़े भौगोलिक दायरे को देखते हुए यह योजना आसान नहीं है। हर जिले की भौगोलिक स्थिति और नदी से जुड़ी समस्याएं अलग-अलग हैं। इसलिए हर इलाके के हिसाब से काम करने की योजना बनाई गई है।
किन जगहों की बदलेगी सूरत
नमन मिशन के तहत नर्मदा के प्रमुख घाटों, धार्मिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा। वहां सीवेज ट्रीटमेंट और सफाई व्यवस्था बेहतर की जाएगी। इससे अमरकंटक, सेठानी घाट, भेड़ाघाट, ओंकारेश्वर और महेश्वर जैसे स्थलों की तस्वीर बदल जाएगी।
कौन-कौन विभाग करेंगे काम
जानकारी के अनुसार नमन मिशन की जिम्मेदारी 6 सरकारी विभाग मिलकर संभालेंगे। इसके लिए एक अंतर-विभागीय समन्वय समिति बनाई गई है। सभी विभाग आपस में तालमेल बिठाकर काम करेंगे, जिससे योजना तेजी से जमीन पर उतर सके।
अलग-अलग विभागों को साथ लाने का मकसद है कि काम में देरी न हो। पहले कई योजनाओं में समन्वय की कमी से रफ्तार धीमी पड़ जाती थी। इस बार सरकार ने शुरुआत से ही इस समस्या को दूर करने की कोशिश की है।
फंडिंग कैसे होगी
मिशन के लिए राज्य के बजट के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना और सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) फंड को मिलाकर एकीकृत बजट तैयार किया गया है। इस पैसे से घाटों को इको-फ्रेंडली बनाया जाएगा। पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए रियल-टाइम वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।
प्लास्टिक पर सख्ती और नर्मदा मित्र
नर्मदा के तटों और घाटों को साफ रखने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। नदी के 500 मीटर के दायरे में सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
यह फैसला घाटों और नदी किनारों की सफाई बनाए रखने में मदद करेगा। दुकानदारों और श्रद्धालुओं दोनों को इस नियम का पालन करना होगा।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर नर्मदा मित्र बनाए जाएंगे। ये लोग आम जनता को नदी साफ रखने के लिए जागरूक करेंगे और मिशन के दूसरे कामों में भी मदद करेंगे। इस तरह प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
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