मध्य प्रदेश में शिक्षकों के पास ऐप और पोर्टल का ढेर, उधर सरकारी स्कूलों में घटते जा रहे छात्र
क्योंकि मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों के पास छात्रों को पढ़ाने के अलावा अन्य सभी तरह के काम हैं।
आलम यह है कि प्रदेश के शिक्षक अभी 31 से ज्यादा मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल पर काम कर रहे हैं। इन 31 ऐप और पोर्टल में अब प्रशस्त को भी जोड़ लीजिए। अब इन शिक्षकों को 32 से ज्यादा तरह के मोबाइल ऐप और पोर्टल पर काम करना है। छात्रों की पढ़ाई अभी भी 33वें नंबर पर रखी गई है। फिर ऐसे में अगर मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से 8 लाख 66 हजार छात्रों का नामांकन कम हो जाए, तो फिर हैरानी किस बात की? क्योंकि छात्र तो पढ़ाई करने स्कूल जाता है, अब वहां बैठा शिक्षक ऐप पर सरकारी काम निपटाएगा तो भला छात्र स्कूल क्यों जाएंगे?
मामला क्या है?
मामला शुरू हुआ है दिल्ली से। भारत सरकार ने दिव्यांग बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए प्रशस्त मोबाइल ऐप 2.0 को लॉन्च किया है। यह ऐप शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का महत्वपूर्ण टूल है। इसका मकसद स्कूलों में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों की पहचान को सुगम बनाना है। पहली से बारहवीं तक के सभी स्कूलों के शिक्षकों को आदेश दिया गया है कि वे अपने मोबाइल पर प्रशस्त पोर्टल खोलें, वीडियो मैनुअल देखें और स्क्रीनिंग का काम पूरा करें। इसी प्रशस्त ऐप को चलाने का आदेश अब मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को दिया है।
प्रशस्त ऐप क्या है?
भारत सरकार का दावा है कि प्रशस्त ऐप के जरिए 21 तरह की दिव्यांगता की स्क्रीनिंग हो सकती है। यह टूल दिव्यांग बच्चों का अधिकार अधिनियम 2016 के तहत अधिसूचित दिव्यांगता की पहचान में मददगार है। शिक्षक अपनी पसंदीदा भाषा में भी इस ऐप में दी गई जानकारी को देख सकते हैं।
अब शिक्षक यह सवाल उठा रहे हैं कि कम से कम इतना तो स्पष्ट कर दिया जाए कि पहले कौन सा काम करना है। दावा है कि यू-डाइस (U-DISE) पोर्टल पर बच्चों का नामांकन और शिक्षकों की जानकारी अपडेट होगी, तब जाकर प्रशस्त ऐप पर सभी छात्रों की जानकारी नजर आएगी। ऐसे में शिक्षकों का सवाल है कि वे पहले कौन सा काम करें?
अभी कितनी जगह हो रहा काम?
अब आपको बताते हैं कि मध्य प्रदेश के सरकारी शिक्षकों को किन-किन मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल पर काम करना पड़ रहा है। इस लिस्ट में हमारे शिक्षक ऐप, एम-शिक्षा मित्र, iGOT कर्मयोगी, SHRV, दीक्षा, NILP, MP POP, MP RTE, मान्या मोबाइल ऐप, आउटसोर्स ऐप, चाइल्ड ट्रैकिंग ऐप, IVRS ऐप, ई-प्रवेश एमपी, समर्थ ऐप, सार्थक ऐप और पीएम पोषण ऐप शामिल हैं।
इसके अलावा शिक्षकों को U-DISE, BLO, एजुकेशन पोर्टल, विमर्श पोर्टल, एमपी टास्क, माध्यमिक शिक्षा मंडल पोर्टल, बीआर सर्वे, स्विफ्टचैट, विनोबा, पुस्तक वितरण, MP TAAS, वायुदूत, प्रशस्त, IFMS पोर्टल और RSK पोर्टल पर भी काम करना पड़ता है।
यानी बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ शिक्षकों को इन तमाम ऐप और पोर्टल पर जानकारी भरने, रिकॉर्ड अपडेट करने और दूसरे सरकारी काम भी निपटाने पड़ रहे हैं।
नामांकन गिरा, शिक्षक व्यस्त
अब एक तरफ सरकार शिक्षकों को नए-नए ऐप पर काम दे रही है। दूसरी तरफ सरकार का ही स्कूल शिक्षा विभाग कह रहा है कि नामांकन घट रहे हैं। विभाग को यह आशंका है कि कई स्कूलों में छात्रों की प्रोफाइल अपडेट नहीं है, इसलिए नामांकन घट रहे हैं। 12 से ज्यादा जिलों के जिला परियोजना समन्वयकों को कारण बताओ नोटिस तक जारी हो गया है।
बता दें कि 2025-26 में प्रदेश के स्कूलों में पहली से बारहवीं तक करीब 1 करोड़ 42 लाख छात्रों का नामांकन हुआ, जबकि 2026-27 में यह संख्या 1 करोड़ 33 लाख रह गई है। यानी छात्रों की प्रोफाइल भी शिक्षकों को ही अपडेट करनी है। वह नहीं हुई तो भी कार्रवाई होगी, प्रशस्त ऐप पर काम नहीं हुआ तो भी खतरे की घंटी है। चुनाव के काम तो कभी इस देश में खत्म ही नहीं होते।
अब एक तरफ विपक्ष मांग कर रहा है कि नामांकन घटने की जांच हो, जिलेवार और स्कूलवार आंकड़ों का सत्यापन (वेरिफिकेशन) किया जाए। दूसरी तरफ शिक्षक मांग कर रहे हैं कि वे क्या करें, यह साफ हो। वे छात्रों को पढ़ाएं या फिर इंतजार करें कि अब आगे सरकार कौन सा ऐप लाने वाली है?