MP के 788 स्कूलों में टॉयलेट गायब: बेटियां खुले में शौच को मजबूर, अफसर खा रहे घूस
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश के 788 सरकारी स्कूलों में बेटियों के टॉयलेट के लिए बजट आया था।
- अफसरों और प्रभारियों ने टॉयलेट बनाने की बजाय यह पैसा रंगाई-पुताई पर खर्च कर दिया।
- टॉयलेट न होने से छात्राएं खुले मैदान या टूटी दीवारों की ओट में शौच जाती हैं।
- धार जिले में अधूरे टॉयलेट की कंप्लीशन रिपोर्ट देने के लिए लाखों की घूस मांगी गई।
- लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डीपीसी को एक लाख की रिश्वत लेते पकड़ा।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों से एक बेहद परेशान करने वाली खबर आई है। यहां सरकार के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत सामने आई है। प्रदेश के कई स्कूलों में छात्राओं के लिए टॉयलेट ही नहीं हैं। इस वजह से स्वच्छ भारत अभियान को बड़ा झटका लगा है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा भी फेल होता दिख रहा है। अफसरशाही की लापरवाही का खामियाजा मासूम बेटियों को भुगतना पड़ रहा है।
बजट का हुआ गलत इस्तेमाल
प्रदेश के 788 सरकारी स्कूलों के लिए एक बड़ा बजट जारी हुआ था। छात्राओं के टॉयलेट निर्माण के लिए 2 करोड़ 30 लाख रुपए मिले थे। लेकिन कई स्कूल प्रभारियों ने इस पैसे का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने टॉयलेट बनाने के बजाय पैसा फर्नीचर और पुताई पर खर्च कर दिया। टॉयलेट न होने से सरकारी स्कूलों में स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। बेटियां बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं।
पहरेदारी में शौच जाने की मजबूरी
राजगढ़ के ब्यावरा में एक प्राथमिक स्कूल की हालत बेहद खराब है। यहां पिछले पांच सालों से कोई शौचालय ही नहीं बना है। स्कूल की 26 छात्राएं खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। शौचालय के नाम पर सिर्फ दो टूटी दीवारें खड़ी हैं। लड़कियां अपनी सहेलियों को बाहर खड़ा करके शौच के लिए जाती हैं। स्कूल को दो बार बजट मिला पर काम नहीं हुआ।
शिक्षिकाएं दे रही हैं पहरा
अशोकनगर के पछारी इलाके से भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है। यहां इंदिरा कॉलोनी का प्राथमिक स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस वजह से 135 बच्चों को कॉलेज के एक कमरे में शिफ्ट किया गया। इस नए ठिकाने पर टॉयलेट की कोई व्यवस्था नहीं है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए महिला टीचरों को बाहर खड़े होकर पहरा देना पड़ता है।
छुट्टी लेकर घर जाती हैं बेटियां
शौचालय न होने का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। गुना के एक माध्यमिक विद्यालय में 23 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां टॉयलेट न होने से लड़कियां बेहद परेशान रहती हैं। आपात स्थिति में छात्राओं और महिला शिक्षकों को स्कूल छोड़ना पड़ता है। वे मजबूरी में अपने घर वापस जाती हैं। कई छात्राएं तो आधी छुट्टी के बाद स्कूल ही नहीं आती हैं।
धार में डीपीसी हुआ गिरफ्तार
एक तरफ बेटियां परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ अफसर भ्रष्टाचार में डूबे हैं। धार जिले में लोकायुक्त ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जिला परियोजना समन्वयक यानी डीपीसी प्रदीप कुमार खरे को गिरफ्तार किया गया है। वे सरकारी स्कूलों में टॉयलेट निर्माण की फर्जी रिपोर्ट देने के बदले घूस ले रहे थे। लोकायुक्त की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच (लोकायुक्त ट्रैप) लिया है।
लाखों की घूस का खुलासा
इंदौर लोकायुक्त ने यह कार्रवाई सहायक इंजीनियर की शिकायत पर की है। डीपीसी खरे ने 3 करोड़ 42 लाख के टॉयलेट प्रोजेक्ट पर साइन करने के लिए 17 लाख रुपए मांगे थे। वे एक लाख रुपए की पहली किस्त ले रहे थे। तभी लोकायुक्त ने जाल बिछाकर उन्हें पकड़ लिया। इस कार्रवाई से मध्य प्रदेश शिक्षा विभागमें हड़कंप मच गया है।
FAQ
- मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण का क्या विवाद है?
मध्य प्रदेश के 788 सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय बनाने हेतु 2 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट मंजूर हुआ था। विवाद यह है कि कई स्कूल प्रभारियों ने इस राशि का उपयोग शौचालय बनाने में नहीं किया। उन्होंने यह पैसा स्कूल के फर्नीचर और दीवारों की रंगाई-पुताई जैसी चीजों पर खर्च कर दिया। - स्कूलों में टॉयलेट न होने से छात्राओं की शिक्षा पर क्या असर पड़ रहा है?
स्कूलों में टॉयलेट न होने का छात्राओं की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। आपात स्थिति या इमरजेंसी होने पर छात्राओं को स्कूल से छुट्टी लेकर अपने घर जाना पड़ता है। इस असुविधा और असुरक्षा के कारण कई छात्राएं आधी छुट्टी यानी इंटरवल के बाद वापस स्कूल नहीं लौटतीं। इससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है
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