आदिवासी छात्र के लिए यूपीएससी कोचिंग के बदले नियम, टेस्ट से पहले दिल्ली नहीं भेजेगी सरकार
मध्यप्रदेश सरकार (मोहन सरकार) UPSC कोचिंग योजना में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पहले जो आदिवासी ग्रेजुएट सीधे दिल्ली भेजे जाते थे, अब उन्हें पहले विभागीय स्तर पर एंट्रेंस टेस्ट (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) देना होगा।
इस टेस्ट में जो कटऑफ तय किया जाएगा, उसके आधार पर ही सरकार उन युवाओं को दिल्ली भेजेगी, जो सिलेक्ट होंगे। इसके बाद सिर्फ वही सिलेक्टेड युवा होंगे जिनका कोचिंग का खर्च सरकार उठाएगी।
वित्तीय सहायता नियमों में बदलाव
इसके साथ ही आय सीमा और कोचिंग के लिए एक बार ही वित्तीय सहायता देने के नियमों में भी बदलाव किया जा सकता है। जो कि फिलहाल प्रस्तावित है।
अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने इस बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। साथ ही पिछले सप्ताह इसे सरकार को को भेज दिया है।
एंट्रेंस टेस्ट कौन कराएगा?
एंट्रेंस टेस्ट एमपी ऑनलाइन, राज्य ओपन स्कूल या किसी और सरकारी एजेंसी के जरिए कराया जा सकता है। इस तरह की व्यवस्था पहले से ही तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में लागू है।
2012-13 में शुरु हुई थी कोचिंग
अधिकारियों की एक कमेटी बनी
इसके बाद चार अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई थी और रिपोर्ट भी आई थी। हैरानी की बात है कि उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। इसके बाद 2024-25 में उस समय के आयुक्त श्रीमन शुक्ला ने फिर से समीक्षा की थी। साथ ही कमेटी की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में काम शुरू किया था। फिलहाल अब वर्तमान आयुक्त तरुण राठी ने इस योजना को संशोधित करके सरकार को भेज दिया है।
स्कीम में इतना पैसा मिलता है
2012-13 में शुरू हुई इस स्कीम में हर साल औसतन 50 बच्चे दिल्ली कोचिंग के लिए भेजे जाते थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 12 बच्चे ही यूपीएससी प्री और मेन्स तक पहुंच पाए।
इस योजना में कोचिंग फीस के अलावा हर छात्र-छात्रा पर महीने में 12 हजार रुपए खाने के खर्च होते हैं। साथ ही, किताबों के लिए हर साल 15 हजार रुपए अलग से दिए जाते हैं।
इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई के लिए भी एक स्कीम है, जो 2004-05 से चल रही है। इसमें आदिवासी बच्चों को अगर पीएचडी या रिसर्च के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में दाखिला मिलता है, तो उन्हें एक साल में 40 हजार डॉलर (करीब 38 लाख रुपए) मिलते हैं।
साथ ही, रहने और खाने के लिए सालाना 10 हजार डॉलर दिए जाते हैं। एक बार आने-जाने का हवाई जहाज का टिकट भी मिलता है। पिछले तीन साल में सिर्फ 12 बच्चे ही विदेश जा पाए। इसलिए इस स्कीम की भी समीक्षा की जाएगी और इसे ज्यादा प्रचारित भी किया जाएगा।
इन बदलाव की तैयारी
- आय सीमा को छह लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किया जाएगा ताकि ज्यादा बच्चों को कोचिंग मिल सके।
- अभी तक कोचिंग जाने वाले हर बच्चे को दो लाख रुपए तक या कोचिंग की फीस मिलती है। अब इसे एक साल की बजाय दो साल तक दिया जाएगा। दूसरे साल का खर्च सिर्फ उन्हीं बच्चों को मिलेगा जो पहले प्रयास में यूपीएससी प्री या प्री-मेन्स पास कर लेते हैं।
- अब केवल दिल्ली की शीर्ष 5-6 कोचिंग संस्थानों में ही छात्रों को भेजा जाएगा।
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