एमपी में सरकारी कोचिंग का सच : स्कीम और बजट है, लेकिन 3 साल से क्लासेस नहीं

Atul Dwivedi | Aug 18, 2026, 20:21 IST
MP में सरकारी कोचिंग का कड़वा सच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्री ऑनलाइन कोचिंग ऐलान के बाद मध्यप्रदेश की योजनाएं चर्चा में हैं। द सूत्र की पड़ताल में कई सवाल सामने आए। प्रदेश में करोड़ों रुपए का बजट फ्री कोचिंग पर रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, छात्रों के लिए बड़ा ऐलान किया था। इसके बाद 'द सूत्र' ने मध्य प्रदेश में पड़ताल की, कि आखिर यहां चल रहीं फ्री ऑनलाइन कोचिंग का हाल कैसा है ?



कितना बजट सरकार खर्च कर रही है, कितने छात्र सरकारी नौकरियों में सिलेक्ट हो रहे हैं ? कोचिंग चल भी रही है या नहीं और जैसा दिखाया जा रहा है, वैसा है भी या नहीं ?



फ्री कोचिंग देने के लिए कई योजनाएं

पहले आपको ये बता दें कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को फ्री कोचिंग देने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं।



इन योजनाओं में आकांक्षा योजना, शौर्य संकल्प योजना, सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना के साथ साथ शासकीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण संस्थान के कोर्स भी शामिल हैं।



द सूत्र ने सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना, शौर्य संकल्प योजना और शासकीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण स्कीम की पड़ताल की है। सबसे पहले बात करते हैं सरदार पटेल कोचिंग एवं प्रशिक्षण योजना की, क्योंकि इसका हाल सबसे बुरा है।



योजना क्या है, कब शुरु हुई ?

मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक युवाओं के लिए ये योजना 2020 में शुरु की गई थी। इसके तहत नेशनल लेवल पर क्लैट यानी Common Law Admission Test के साथ साथ NEET जैसी दूसरी परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है।



मौजूदा वक्त की बात करें तो इस योजना के लिए साल 2026-27 में 17 करोड़ 25 लाख का बजट रखा गया है। दावा है कि प्रदेश के 10 संभागों में 4 हजार 500 छात्रों को फ्री कोचिंग दी जाएगी। लेकिन ये योजना फिलहाल काम नहीं कर रही है।



योजना अटकने की बड़ी वजह

योजना अटकने की बड़ी वजह टेंडर की शर्तें हैं। निजी कोचिंग संस्थान इन शर्तों में रुचि नहीं दिखा रहे। पिछले तीन सत्रों से कोचिंग शुरू नहीं हो सकी। सरकार ऑफलाइन बैच चलाने की शर्त रखती है।



कोविड के बाद कई संस्थान ऑनलाइन मोड में चले गए। सरकार अब भी ऑफलाइन पढ़ाई को प्राथमिकता दे रही है। द सूत्र ने विभाग के डायरेक्टर भूपेंद्र गोयल से बात की। उनका कहना है कि बीते 3 सत्रों में टेंडर निकालने के बावजूद कोचिंग संस्थानों ने रुचि नहीं ली।



जिससे योजना के तहत कोचिंग नहीं दी गई है। हाल ही में टेंडर प्रक्रिया फिर शुरु की गई है। कोचिंग संस्थानों की तरफ से दिलचस्पी न लेने की वजह से टेंडर शर्तों में बदलाव भी किया गया था। उम्मीद है इस सत्र में कोचिंग शुरु हो जाएगी।



आवेदन के लिए करना होगा इंतजार

इस योजना में आवेदन के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। आवेदन विभाग की वेबसाइट से किया जाना है। फिलहाल www.tribal.mp.gov.in वेबसाइट काम नहीं कर रही है। अब दूसरी मुफ्त सरकारी कोचिंग योजना की बात करते हैं। इसका नाम शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना है।



योजना क्या है, कब शुरु हुई ?

योजना को कैबिनेट से 23 मार्च 2026 को मंजूरी मिली थी। इस योजना के तहत पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को पुलिस, आर्मी और पीएससी जैसी दूसरी कोचिंग की तैयारी फ्री में करवाई जाती है।



45 दिनों के लिए छात्रों को सेंटर पर ही निशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन और पढ़ाई की सामग्री दी जाती है। 20 चयनित जिलों में लड़कों को 1 हजार और लड़कियों को 1100 रुपए प्रति महीने का स्टाइपेंड भी दिया जाता है।



लेकिन सवाल उठता है कि जब विभाग की पहले से एक कोचिंग स्कीम पटरी पर नहीं चल रही है, तो क्या 45 दिनों की ट्रेनिंग लेकर छात्र सिलेक्ट हो रहे हैं ?



बात सिर्फ सरदार पटेल कोचिंग योजना और शौर्य संकल्प योजना की करें तो दोनों का बजट लगभग 25 से 30 करोड़ के बीच बैठता है। लेकिन कितने छात्रों को कोचिंग दी, कितने सिलेक्ट हुए, इसका सटीक आंकड़ा मिलता ही नहीं है।



अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण योजना का हाल

अभी तो आपने सिर्फ दो योजना का हाल देखा। अब जरा आपको अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण योजना का हाल बताते हैं। इसके तहत शासकीय परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण संस्थान के जरिए छात्रों को फ्री कोचिंग दी जाती है।



प्रदेश के 7 बड़े शहरों जिनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और सागर जैसे शहर शामिल हैं। यहां ये संस्थान चल रहा है। संस्थान छात्रों को फ्री में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा की परीक्षाओं की तैयारी करवाता है।



150 छात्रों का बैच भी अब फुल नहीं

भोपाल में मौजूद संस्थान में साल में एक बार 150 छात्रों का सिलेक्शन किया जाता है। लेकिन यहां जब द सूत्र ने पड़ताल की तो हमें बताया गया कि 150 छात्रों का बैच भी अब फुल नहीं होता। जनसंपर्क के जरिए 3 बार विज्ञापन निकाला गया, फिर भी सिर्फ 100 छात्रों ने बैच में एडमिशन लिया।



इसकी सबसे बड़ी वजह लड़कों के लिए हॉस्टल और मेस की व्यवस्था का न होना है। 1700 रुपए छात्रवृत्ति जरूर दी जाती है, लेकिन दूर दराज के जिलों से आकर यहां पढ़ने वाले छात्र अपना खर्च इतने कम बजट में कैसे निकालें यही समस्या है। संस्थान का दावा है कि जिस तरह का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए, वो भी नहीं होता जिसकी वजह से सीटें खाली रह जाती हैं।



हर साल कितने छात्र चयनित

एक बड़ी समस्या विश्वसनीय डेटा का अभाव भी है। हर साल कितने छात्र चयनित होते हैं। इसका स्पष्ट आंकड़ा विभागों के पास नहीं है। कई जगह कोचिंग के टेंडर तक नहीं हो रहे। कई योजनाओं के नतीजे भी सामने नहीं हैं।



ऐसे में इन योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल हैं। केंद्र की प्रस्तावित फ्री कोचिंग योजना भी अहम होगी। उसकी सफलता व्यवस्था और निगरानी पर निर्भर करेगी। द सूत्र ने संजय तिवारी से भी बात की।



वे भोपाल कोचिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि पिछले 3 सालों से टेंडर ही नहीं हो रहे हैं। टेंडर निकाले जाते हैं लेकिन लगता है कि योजना को लागू करने की मंशा ही नहीं होती। पहले योजना के लिए बजट 6-7 करोड़ था, अब 17 करोड़ बजट है लेकिन बजट को लेप्स किया जा रहा है।



10 संभाग में चल रही स्कीम

10 संभाग में स्कीम चल रही है। 5 साल पहले सुनने में आया था जनजाति की कोचिंग होगी, ओबीसी की कोचिंग होगी, तो वो फंड कहां जा रहा है ? आप पैसा दूसरे मद में खर्च कर रहे हैं, ये सही नहीं है। यानी देखा जाए तो सरकारी आंकड़े और सरकारी स्कीम जितनी जल्दी शुरु की जाती हैं, उनका हाल उतनी तेजी से खराब होता है।



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