एमपी के सरकारी कॉलेजों में खुलेंगी हैप्पीनेस सेल, छात्र सीखेंगे खुश रहने की कला
News In Short
- एमपी के सरकारी कॉलेजों में अब खुश रहने की कला सिखाई जाएगी।
- इसके लिए 300 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स ट्रेंड किए गए हैं।
- पढ़ाई का दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और सुसाइडल टेंडेंसी को कम करना मुख्य लक्ष्य है।
- कॉलेजों में हर हफ्ते स्पेशल सेशन होंगे और हर गुरुवार ऑनलाइन सपोर्ट दिया जाएगा।
- 2016 में हैप्पीनेस डिपार्टमेंट बनाने वाला एमपी देश का पहला राज्य था, जो अब इस पहल को छात्रों तक ले जा रहा है।
News In Detail
मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में अब छात्र सिर्फ मैथ, हिस्ट्री या साइंस के टफ फॉर्मूले ही नहीं सुलझाएंगे। अब वे जीवन के सबसे जरूरी विषय खुश रहने की कला का पाठ भी पढ़ेंगे। मध्य प्रदेश सरकार के आनंद विभाग ने एक खास प्रस्ताव दिया है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों में हैप्पीनेस सेल (Happiness Cell) खोले जाएंगे। यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।
तनाव और सुसाइड जैसे विचारों पर होगा प्रहार
कैंपस की लाइफ जितनी सुनहरी दिखती है, हकीकत में छात्र उतने ही दबाव में होते हैं। ये हैप्पीनेस सेल्स कॉलेजों के उस असली कोर्स से निपटेंगे जो किताबों में नहीं होता। इनका मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव, टूटती दोस्ती, असफलताओं का डर और आत्मघाती विचारों के काले साये को खत्म करना है। आंकड़ों के मुताबिक, ये मानसिक समस्याएं हर साल कई होनहार युवाओं की जिंदगी छीन लेती हैं, जिसे रोकने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम है।
300 से ज्यादा प्रोफेसर बन चुके हैं खुशी के गुरु
इस मिशन को जमीन पर उतारने के लिए पिछले तीन महीनों में विशेष तैयारी की गई है। इसके तहत राज्य के कई कोनों से आए 300 से अधिक प्रोफेसरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये प्रोफेसर मध्यप्रदेश के सरकारी कॉलेज में वीकली सेशन आयोजित करेंगे। इन सेशनों में छात्रों को सिखाया जाएगा कि असली खुशी क्या है और इसे जीवन में कैसे हासिल किया जाए।
राज्य आनंद संस्थान के डॉयरेक्टर प्रवीण गंगराडे के मुताबिक, हैप्पीनेस सेल का लक्ष्य छात्रों को यह सिखाना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आंतरिक शांति और खुशी क्या है? हमारा उद्देश्य एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो मुश्किलों में सिर्फ बचे ही नहीं, बल्कि मुस्कुराते हुए उनका सामना करे।
क्या होगा खुशी के सिलेबस में?
इन हैप्पीनेस सेल्स में छात्रों को जीवन के नियम, तालमेल के साथ रहना और दबाव से निपटने जैसे विषयों पर कोचिंग दी जाएगी। इसके अलावा, छात्रों के रिश्तों, उनकी असफलताओं और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जब तक कॉलेजों में ये सेल पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाते, तब तक प्रशिक्षित फैकल्टी हर गुरुवार को एक घंटे का ऑनलाइन हैंडहोल्डिंग सपोर्ट भी प्रदान करेगी।
खुशहाली नापने के लिए होगा सर्वे
सिर्फ क्लास ही नहीं, सरकार अब राज्य के लोगों की खुशहाली का पैमाना भी नापने जा रही है। इसके लिए एक हैप्पीनेस सर्वे की योजना पाइपलाइन में है। इसके लिए प्रश्नावली (Questionnaire) तैयार की जा रही है और सर्वे करने वाले लोगों की ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। सरकार से हरी झंडी मिलते ही इसे जमीन पर उतारा जाएगा।
एमपी देश का पहला राज्य जिसने बनाया आनंद विभाग
गौरतलब है कि जुलाई 2016 में मध्य प्रदेश तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आया था, जब यह देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने अलग से आनंद विभाग की स्थापना की। यह विभाग अल्पविराम जैसे वर्कशॉप आयोजित करता है, जो आत्म-चिंतन और आंतरिक शांति को बढ़ावा देते हैं।
इसके अलावा विभाग के अन्य प्रमुख कार्यक्रमों में आनंद शिविर, आनंद क्लब, आनंद उत्सव और आनंद सभा शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को मानसिक रूप (healthy lifestyle) से मजबूत और खुशहाल बनाना है।
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