मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अब विभागीय जांच भी होगी ‘ई-कोर्ट’ प्रणाली से

Sanjay Dhiman | Mar 12, 2026, 19:50 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की विभागीय जांच अब डिजिटल होगी। ई-कोर्ट की तर्ज पर नया पोर्टल बनेगा, इससे जांच की पारदर्शिता में और तेजी आएगी।

News in Short

  • मध्य प्रदेश सरकार ने विभागीय जांच प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का फैसला लिया।
  • नया पोर्टल नोटिस, पेशी और दस्तावेजों को ऑनलाइन करने के लिए बनाया गया है।
  • विभागीय जांच अब ई-कोर्ट प्रणाली की तरह वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से होगी।
  • यह प्रणाली लंबित मामलों के निपटारे को तेज और पारदर्शी बनाएगी।
  • सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल प्रक्रिया से समय की बचत और राहत मिलेगी।

News in Detail

BHOPAL. सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ होने वाली विभागीय जांच अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। राज्य सरकार ने इसके लिए नया ऑनलाइन विभागीय जांच पोर्टल बनाने का फैसला किया है।



डिजिटल प्रणाली के जरिए जांच से जुड़े नोटिस जारी करने से लेकर पेशी और दस्तावेज जमा करने तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।



नई व्यवस्था के तहत विभागीय जांच के सभी नोटिस अब पोर्टल से ही जारी किए जाएंगे। संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को नोटिस स्पीड पोस्ट के साथ-साथ ई-मेल के माध्यम से भी भेजा जाएगा, ताकि सूचना तुरंत मिल सके और देरी की स्थिति खत्म हो सके।





ई-कोर्ट प्रणाली की तरह कार्य करेगा पोर्टल

इस पोर्टल के जरिए जांच की प्रक्रिया काफी हद तक ई-कोर्ट सिस्टम की तरह काम करेगी। अधिकारी-कर्मचारी और जांच अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी पेशी दे सकेंगे, जिससे बार-बार कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी। साथ ही विभागीय जांच के लंबित मामलों को तेजी से निपटाने में मदद मिलेगी।



लंबित जांच की समस्या

वर्तमान में कई विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच सालों तक लंबित रहती है। कई मामलों में तो संबंधित कर्मचारी या अधिकारी रिटायर भी हो जाते हैं, जबकि नियमों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में जांच 6 महीने के भीतर पूरी हो जानी चाहिए। यदि किसी कारण से समय बढ़ाना पड़े तो जांच की अवधि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन अधिकतम दो साल के भीतर जांच पूरी करना जरूरी माना गया है।



नई ऑनलाइन व्यवस्था का फायदा...

  • नोटिस जारी करने में देरी नहीं होगी।
  • पेशी और दस्तावेज की प्रक्रिया डिजिटल होगी।
  • जांच की निगरानी आसान होगी।
  • लंबित मामलों का तेजी से निपटारा संभव होगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस सिस्टम से प्रशासनिक प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी, साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों दोनों को राहत मिलेगी।



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