एमपी के सरकारी विभागों पर 2123 करोड़ बिजली बकाया, उपभोक्ता परेशान

Ramanand Tiwari | Jun 24, 2026, 22:10 IST
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मध्यप्रदेश के 16 सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का 2123 करोड़ से ज्यादा बकाया है। पंचायत विभाग सबसे बड़ा बकायेदार है। आम उपभोक्ता पर सख्ती, सरकार पर नरमी के सवाल उठ रहे हैं।

बिजली बिल जमा करने में कुछ दिन की देरी होने पर आम उपभोक्ताओं को नोटिस, पेनाल्टी और कनेक्शन कटने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। लेकिन मध्य प्रदेश के कई सरकारी विभाग वर्षों से हजारों करोड़ रुपए के बकाएदार बने हुए हैं और वसूली की रफ्तार अब भी बेहद धीमी है।



ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 16 सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का 2,123 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है। यह रकम इतनी बड़ी है कि यदि इसकी पूरी वसूली हो जाए तो वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है।



करोड़ों दबाए बैठे हैं सरकारी विभाग

सबसे ज्यादा बकाया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर है। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग का स्थान आता है। इसके अलावा नर्मदा घाटी विकास, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागों पर भी बड़ी राशि बकाया बताई जा रही है।



बिजली कंपनियों के रिकॉर्ड के अनुसार लाखों सरकारी बिजली कनेक्शनों पर भुगतान लंबित है। इससे वितरण कंपनियों की नकदी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कंपनियों को बिजली उत्पादन इकाइयों और अन्य एजेंसियों को समय पर भुगतान करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रबंधन करना पड़ रहा है।



यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इस मामले को केवल बकाया राशि का मुद्दा नहीं, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था की वित्तीय सेहत से जुड़ा बड़ा प्रश्न मान रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी विभाग यदि समय पर बिल भुगतान करें तो कंपनियों का घाटा कम करने में मदद मिल सकती है।



सबसे ज्यादा बकाया वाले विभाग

• पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग


• नगरीय विकास एवं आवास विभाग


• नर्मदा घाटी विकास विभाग


• महिला एवं बाल विकास विभाग


• स्कूल शिक्षा विभाग


• लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग



इसके अलावा जनजातीय कार्य, जल संसाधन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभागों पर भी उल्लेखनीय बकाया बताया गया है।



आखिर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

आम उपभोक्ताओं का तर्क है कि बिजली कंपनियां छोटे बकायों पर तत्काल कार्रवाई कर देती हैं, लेकिन सरकारी विभागों के बड़े बकाए वर्षों तक लंबित रहते हैं। इससे नियमों के समान अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।



ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार विभागीय समीक्षा बैठकों में सभी बकायादार विभागों को भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से पंचायत और नगरीय विकास विभागों में पेयजल आपूर्ति से जुड़े कनेक्शनों पर अधिक बकाया है। विभाग चरणबद्ध तरीके से भुगतान भी कर रहे हैं।



एक नजर में मुख्य तथ्य

• 16 सरकारी विभागों पर 2,123 करोड़ रुपए से अधिक बकाया।


• सबसे ज्यादा बकाया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर।


• नगरीय विकास एवं आवास विभाग दूसरे स्थान पर।


• लाखों सरकारी बिजली कनेक्शनों पर भुगतान लंबित।


• बिजली कंपनियों पर बढ़ रहा वित्तीय दबाव।


• समय पर भुगतान होने पर कंपनियों की स्थिति मजबूत हो सकती है।


• ऊर्जा विभाग ने बकायादार विभागों को भुगतान के निर्देश दिए।



सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आम उपभोक्ता के लिए नियम इतने सख्त हैं, तो हजारों करोड़ रुपए के सरकारी बकाये की वसूली में इतनी नरमी क्यों दिखाई देती है। यही प्रश्न अब बिजली व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही के केंद्र में आ गया है।



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