Google MP Deal: सुशासन से लेकर सिंहस्थ 2028 तक, अब हर जगह दिखेगा गूगल एआई का जलवा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश सरकार और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच बड़ी साझेदारी हुई है।
- इंदौर शहर में एक अत्याधुनिक 'एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित किया जाएगा।
- इस नए सेंटर से 10 हजार से ज्यादा एआई डेवलपर्स को जोड़ा जाएगा।
- गूगल की टीम सिंहस्थ 2028 को पूरी तरह हाईटेक बनाने में मदद करेगी।
- खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा में एआई आधारित नए टूल्स इस्तेमाल होंगे।
MP Google AI Center of Excellence: मध्यप्रदेश को एक बड़ा डिजिटल टेक हब बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गूगल क्लाउड इंडिया के बीच बैठक हुई। इस राउंड टेबल मीटिंग में कई जरूरी और बड़े फैसले लिए गए हैं।
सरकार और टेक कंपनी गूगल मिलकर राज्य की सूरत बदलने का काम करेंगे। इस बड़ी प्लानिंग के तहत इंदौर में सेंटर फॉर एक्सीलेंस खोला जाएगा। इसके लिए दोनों पक्ष बहुत जल्द एक ऑफिशियल एमओयू साइन करेंगे।
ये नया टेक सेंटर एआई रिसर्च (Google MP Deal) और स्किल डेवलपमेंट का मुख्य केंद्र बनेगा। इससे मध्यप्रदेश के युवाओं को टेक्निकल फील्ड में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर दिखाई दे रही है।
10 हजार डेवलपर्स बनाएंगे AI बेस्ड टूल्स
इस नए सेंटर की सबसे बड़ी ताकत देश के युवा टेक एक्सपर्ट्स होंगे। इंदौर के इस एआई सेंटर से 10 हजार से अधिक डेवलपर्स जोड़े जाएंगे। ये सभी डेवलपर्स मिलकर रियल टाइम टेक्निकल प्रॉब्लम्स का हल खोजेंगे।
ये एक्सपर्ट्स देश और ग्लोबल जरूरतों के हिसाब से नए सॉफ्टवेयर बनाएंगे। इस पार्टनरशिप से मध्य प्रदेश में हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। युवाओं को बड़ी कंपनियों के साथ काम करने का अनुभव मिलेगा।
सीएम मोहन यादव ने कहा कि ये कदम राज्य को तकनीक में आगे ले जाएगा। गूगल की टीम लोकल लेवल पर आ रही दिक्कतों को दूर करने में जुटेगी। इससे सरकारी कामकाज का तरीका भी काफी आधुनिक और तेज हो जाएगा।
सिंहस्थ से खेती तक, हर जगह दिखेगा AI का जादू
इस बैठक में गूगल ने समृद्ध मध्यप्रदेश का एक शानदार विजन डॉक्यूमेंट पेश किया गया। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा सिंहस्थ 2028 को स्मार्ट बनाने पर की गई। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम होंगे।
गूगल एक विशेष वॉइस और मल्टीलिंगुअल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मोबाइल ऐप तैयार करेगा। ये ऐप यात्रियों को भीड़, ट्रैफिक और इमरजेंसी सेवाओं की लाइव जानकारी देगा। इससे प्रशासन को बड़ी भीड़ को संभालने में बहुत आसानी होगी।
इसके साथ ही खेती के क्षेत्र में जेमिनी एआई किसानों की सीधी मदद करेगा। यह किसानों को मौसम, फसलों के दाम और सरकारी योजनाओं की जानकारी देगा। किसान अपने मोबाइल से ही कृषि विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगे।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में आएंगे बड़े बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए Ojas AI फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। ये सिस्टम दूरदराज के गांवों में डिजिटल क्लीनिकल सहायता पहुंचाने का काम करेगा। इससे गर्भवती महिलाओं की सेहत पर खास नजर रखी जा सकेगी।
शिक्षा के क्षेत्र में वर्चुअल ट्यूटर की मदद ली जाएगी। यह टूल पांच लाख से ज्यादा छात्रों को अपनी भाषा में पढ़ने की सुविधा देगा। इससे करीब एक लाख सरकारी शिक्षकों को पढ़ाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
पुलिसिंग और जन-सुरक्षा के क्षेत्र में भी एआई का बड़ा इस्तेमाल होगा। अपराधियों के व्यवहार को समझने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक्स का यूज किया जाएगा। सरकारी विभागों में शिकायत निपटारे की अरेंजमेंट को ऑटोमैटिक बनाया जाएगा।
वनों की सुरक्षा और जंगली जानवरों को बचाने के लिए कंप्यूटर विजन लगेगा। ये सिस्टम इंसानों और जानवरों के बीच होने वाले टकराव को रोकेगा। खतरा होने पर यह तुरंत वन विभाग की टीम को अलर्ट भेजेगा।
बैठक में शामिल हुए बड़े दिग्गज
इस हाई लेवल मीटिंग का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया गया। बैठक में राज्य प्रशासन के कई सीनियर अधिकारी और गूगल के प्रतिनिधि मौजूद थे। सभी ने मिलकर डिजिटल विकास की नई रूपरेखा तैयार की है।
सरकारी टीम (मध्यप्रदेश सरकार) से मुख्य सचिव अनुराग जैन और एसीएस नीरज मंडलोई शामिल हुए। प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने भी तकनीकी पहलुओं पर अपनी बात रखी। सरकार की तरफ से विकास योजनाओं की एक सूची पेश की गई।
गूगल की तरफ से पब्लिक सेक्टर के निदेशक आशीष वाट्टल मौजूद रहे। सिंगापुर से आए रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ मदन ओबेरॉय ने भी हिस्सा लिया। हेल्थकेयर एआई और क्लाउड एक्सपर्ट्स ने अपने विचार साझा किए।
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