मध्यप्रदेश की सरकारी योजनाएं चालू रहेंगी या हो जाएंगी बंद, 5 अफसरों की टीम करेगी तय
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने एक नई कमेटी बनाई है।
- यह कमेटी राज्य की सरकारी योजनाओं की समीक्षा करेगी।
- कमेटी एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
- रिपोर्ट में बताया जाएगा कि कौन सी योजना आगे चले और कौन सी बंद हो।
- इसका मकसद योजनाओं को असरदार और नतीजे देने वाला बनाना है।
मध्य प्रदेश सरकार जनता से जुड़ी योजनाओं को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने 18 से ज्यादा हितग्राही मूलक योजनाओं की गहराई से जांच का फैसला किया है। इस काम के लिए एक हाईलेवल कमेटी बनाई गई है।
समीक्षा का फैसला क्यों
मोहन सरकार अब जनता से जुड़ी योजनाओं में बदलाव की तैयारी में है। इनमें मौजूदा सरकार की योजनाएं भी शामिल हैं। पुरानी सरकारों की शुरू की गई योजनाएं भी दायरे में आएंगी।
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का परीक्षण जरूरी हो गया था। लंबे समय से चल रही योजनाओं का असर जमीन पर कैसा है, यह जानना मकसद है।
इसी आधार पर तय होगा कि कौन सी योजना चलती रहेगी। किसमें सुधार होगा और कौन सी बंद हो सकती है।
पांच अफसरों की कमेटी
प्रदेश में इस समय कई सरकारी जनकल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। कुछ योजनाएं सीधे लाभार्थियों से जुड़ी हैं। समय के साथ इनकी उपयोगिता बदलती रहती है।
इसी वजह से सरकार ने गुरुवार, 07 अगस्त को पांच अफसरों की हाईलेवल कमेटी बनाने का फैसला लिया। यह कमेटी हर योजना पर बारीकी से नजर डालेगी। जो योजनाएं अच्छा नतीजा नहीं दे रही हैं, उन पर खास ध्यान दिया जाएगा।
एक माह की डेडलाइन
सरकार ने साफ कर दिया है कि समिति को अपनी रिपोर्ट एक माह के भीतर देनी होगी। सभी योजनाओं की समीक्षा तय समय सीमा में पूरी करनी होगी।
रिपोर्ट में बताना होगा कि कौन सी योजना अपने मकसद में कामयाब रही है। किसमें बदलाव की जरूरत है। किन योजनाओं को बंद किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे योजनाएं नतीजे देने वाली बनेंगी।
किन विभागों की भागीदारी
इस कमेटी में कई अहम विभागों के अफसर शामिल किए गए हैं। वित्त विभाग के एसीएस को कमेटी का सदस्य बनाया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस भी इसमें शामिल हैं।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के एसीएस को भी जोड़ा गया है। यह विभाग सीधे आम लोगों के राशन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए इसकी भागीदारी अहम मानी जा रही है।
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव को भी सदस्य बनाया गया है। जीएडी यानी कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव भी कमेटी में हैं। योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है।
किन योजनाओं की समीक्षा
- महिला एवं बाल विकास: लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी, सक्षम आंगनवाड़ी
- कृषि एवं किसान कल्याण: सीएम किसान कल्याण, फसल उपार्जन सहायता, पीएम फसल बीमा, सिंचाई बिजली सब्सिडी
- सामाजिक सुरक्षा: सीएम संबल, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन
- आवास व ऊर्जा: पीएम आवास योजना, जल जीवन मिशन, अटल गृह ज्योति, स्वामित्व योजना
- स्वास्थ्य व शिक्षा: आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा अभियान, छात्रवृत्ति योजनाएं
पहले भी हो चुकी कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने योजनाओं के परीक्षण की पहल की हो। इससे पहले मंत्री निर्मला भूरिया की अध्यक्षता में भी एक समिति बनाई गई थी।
हालांकि उस समिति का दायरा सीमित था। वह सिर्फ महिला आधारित योजनाओं के परीक्षण के लिए बनाई गई थी। अब बनी नई समिति का दायरा कहीं बड़ा है।
नई समिति सभी वर्गों से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करेगी। यानी सिर्फ महिलाओं की योजनाएं नहीं, बल्कि किसान, युवा, बुजुर्ग और अन्य वर्गों की योजनाएं भी दायरे में आएंगी।
आगे क्या होगा
कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी। जिन योजनाओं में सुधार की जरूरत होगी, उनमें बदलाव किए जा सकते हैं। जो योजनाएं मकसद पूरा नहीं कर पा रही हैं, उन्हें बंद भी किया जा सकता है।
इस कवायद का सीधा असर लाखों लाभार्थियों पर पड़ सकता है। इसलिए आने वाले एक महीने में इस कमेटी की गतिविधियों पर सबकी नजर रहेगी।
FAQ
- मध्य प्रदेश में योजना समीक्षा कमेटी क्यों बनाई गई?
सरकारी योजनाओं का असर जांचने के लिए यह कमेटी बनाई गई है। यह तय करेगी कि कौन सी योजना जारी रहे। कमेटी एक महीने में रिपोर्ट देगी। - मध्य प्रदेश में योजना समीक्षा कमेटी की रिपोर्ट कब तक आएगी?
कमेटी को एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में योजनाओं को जारी रखने, बंद करने या सुधारने के सुझाव होंगे। इसके बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी। - कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?
कमेटी में वित्त, पंचायत, खाद्य, पीडब्ल्यूडी और कार्मिक विभाग के अफसर हैं। योजना एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव सदस्य सचिव हैं।
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