एमपी में आज से 2 बड़े बदलाव, अस्पताल होंगे आउटसोर्स, 24 घंटे खुलेंगी दुकानें

Aman Vaishnav | Aug 14, 2026, 10:11 IST
एमपी में सेहत-श्रम के बदले नियम
मध्य प्रदेश सरकार ने आज 14 अगस्त से दो बड़े फैसले लागू कर दिए हैं। रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्सिंग पर दिया जा रहा है। वहीं दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बार-बार रिन्यूअल कराने का झंझट खत्म कर दिया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश में रीवा, देवास और गुना की 18 सीएचसी निजी एजेंसियों को सौंपी जाएंगी।
  • यह आउटसोर्सिंग व्यवस्था पांच साल के लिए पायलट प्रोजेक्ट की तरह लागू हुई है।
  • निजी एजेंसी अस्पताल संचालन, स्टाफ और सुरक्षा का जिम्मा संभालेगी।
  • दवा और वैक्सीन जैसी जरूरी सामग्री सरकार खुद उपलब्ध कराएगी।
  • वहीं अब प्रदेश में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान 24 घंटे खुल सकेंगे।

स्वास्थ्य केंद्रों में बदलाव

मध्यप्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। यह समस्या लंबे समय से है। मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। इसी वजह से सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।



कैबिनेट (मोहन कैबिनेट) से मंजूरी मिलने के बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को निर्देश जारी किए। अब चुनिंदा अस्पतालों का संचालन निजी हाथों में सौंपा जाएगा।



किन जिलों में होगी शुरुआत

पहले चरण में रीवा, देवास और गुना जिलों को चुना गया है। इन तीन जिलों की कुल 18 सीएचसी इस व्यवस्था में शामिल की गई हैं।



सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट बताया है। यह योजना अगले पांच साल तक इन्हीं अस्पतालों में लागू रहेगी। नतीजों के आधार पर आगे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।



निजी एजेंसी संभालेगी यह काम

चुनी गई निजी सेवा प्रदाता एजेंसी या ट्रस्ट अस्पताल का पूरा संचालन-प्रबंधन देखेगी। हाउसकीपिंग और सिक्योरिटी की जिम्मेदारी भी इन्हीं एजेंसियों की रहेगी।



तय मापदंडों के अनुसार डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। विशेषज्ञ डॉक्टरों का इंतजाम भी एजेंसी को ही करना होगा। मरीजों को समय पर सही इलाज मिले, यह एजेंसी की मुख्य जिम्मेदारी होगी।



सरकार क्या-क्या उपलब्ध कराएगी

बेसिक सर्जरी और ओपीडी सेवाएं भी इसी दायरे में हैं। आईपीडी सेवाओं के लिए जरूरी दवा सरकार खुद देगी। यानी इलाज से जुड़े जरूरी संसाधनों की जिम्मेदारी विभाग की ही रहेगी। निजी एजेंसी सिर्फ प्रबंधन और स्टाफ की व्यवस्था तक सीमित रहेगी।



स्टाफ भर्ती के सख्त नियम

30 फीसदी सीएचसी में निजी एजेंसी को कुल 41 कर्मचारी नियुक्त करने होंगे। इनमें एनेस्थीसिया, मेडिसिन, स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञ शामिल होंगे। सर्जरी विशेषज्ञ मिलाकर कुल 5 विशेषज्ञ डॉक्टर रखने होंगे।



इसके अलावा 3 मेडिकल ऑफिसर की नियुक्ति भी अनिवार्य होगी। मौजूदा संविदा स्टाफ को दूसरे अस्पतालों में ट्रांसफर का विकल्प भी मिलेगा। किसी का रोजगार नहीं छिनेगा, यह सरकार ने साफ किया है।



निगरानी की पूरी व्यवस्था

पूरी योजना की मॉनिटरिंग खुद स्वास्थ्य संचालनालय (स्वास्थ्य संचालनालय मध्य प्रदेश) करेगा। इसके लिए विस्तृत गाइडलाइंस पहले ही जारी कर दी गई हैं।



वहीं अगर तय मापदंड पूरे नहीं होते, तो एजेंसी पर कार्रवाई भी हो सकती है। सरकार का दावा है कि इससे मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा।



अब दुकानें खुलेंगी 24 घंटे

इसके अलाैवा प्रदेश में एक और बड़ा बदलाव कारोबारियों के लिए हुआ है। अब दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सातों दिन खुलने की अनुमति मिलेगी।



ये प्रतिष्ठान 24 घंटे तक भी खुल सकेंगे। यह फैसला छोटे और बड़े दोनों तरह के व्यापारियों के लिए राहत भरा है। रात में काम करने वाले उद्योगों को भी इससे फायदा मिलेगा।



एक बार रजिस्ट्रेशन का फायदा

अब दुकान या प्रतिष्ठान को बार-बार रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी। एक बार ऑनलाइन पंजीयन कराने पर प्रमाण-पत्र और यूनिक पहचान नंबर मिल जाएगा।



रिन्यूअल की झंझट भी पूरी तरह खत्म हो गई है। बाद में दुकान की जानकारी बदलने पर सिर्फ ऑनलाइन अपडेट करना होगा। इससे कारोबारियों का समय और पैसा दोनों बचेगा।



नया कानून हो गया लागू

यह बदलाव मप्र कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता के तहत हुआ है। इसे मध्य प्रदेश श्रम शक्ति संहिता 2026भी कहा जा रहा है। यह अधिनियम विधानसभा के मानसून सत्र में पारित किया गया था।



राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून लागू कर दिया गया है। सरकार इसे कारोबार को आसान बनाने वाला कदम बता रही है।



शर्तों के साथ मिलेगी छूट

हर दुकान को बिना शर्त 24 घंटे खोलने की छूट नहीं मिलेगी। कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। अलग-अलग शिफ्ट के लिए अलग कर्मचारी रखना अनिवार्य होगा।



एक कर्मचारी से सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही काम लिया जा सकेगा। इससे ज्यादा काम कराने पर मालिक को ओवरटाइम देना ही होगा। सरकार का मकसद कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना भी है।



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