गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने बनी समिति तीन दिन में ही बदली, उठे सवाल

Sanjay Sharma | Jan 06, 2026, 23:28 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि विद्वानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए बनी कमेटी को 3 दिन में बदल दिया। अचानक बदलाव से विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे है।

BHOPAL. मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ा रहे अतिथि विद्वान एक बार फिर उच्च शिक्षा विभाग की व्यूह रचना में उलझ गए हैं। हरियाणा में गेस्ट फैकल्टी को मिल रही सुविधाओं के अध्ययन के लिए 2 जनवरी को बनी समिति अचानक बदल दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने समिति के संयोजक को बदलने के साथ ही सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर 7 कर दी है।



समिति को 6-7 जनवरी को हरियाणा सरकार की गेस्ट फैकल्टी नीति की अध्ययन रिपोर्ट विभाग को सौंपना था। उससे ठीक एक दिन पहले ही उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय ने नई समिति का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के सामने आने के बाद प्रदेश के अतिथि विद्वानों को सामाजिक सुरक्षा देने की विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।



रिपोर्ट सौंपने से पहले बदली समिति

उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त प्रबल सिपाहा के आदेश पर 2 जनवरी को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति में एमवीएम कॉलेज भोपाल के प्राध्यापक डॉ.अनिल राजपूत को संयोजक बनाया गया। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के प्राध्यापक डॉ.अजय कुमार भारद्वाज और डॉ.एचके गर्ग को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। इस समिति को गेस्ट फैकल्टी के लिए हरियाणा में लागू सरकारी नीतियों, उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने के प्रावधानों का अध्ययन करना था। इसकी रिपोर्ट 6-7 जनवरी को उच्च शिक्षा आयुक्त को सौंपी जानी थी।



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संयोजक बदला, सदस्य संख्या बढ़ाई

तीन सदस्यीय समिति से गठन के चार दिन बाद ही रिपोर्ट मांगी गई थी। यानी यह रिपोर्ट 6 जनवरी को आयुक्त कार्यालय पहुंचनी थी। गेस्ट फैकल्टी के लिए हरियाणा सरकार के प्रावधानों के अध्ययन और नियमों की जानकारी जुटाने के लिए केवल तीन दिन ही दिए गए थे। इतनी कम अवधि में किसी विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पाना भी सवालों के घेरे में है। यही नहीं रिपोर्ट जमा कराने से एक दिन पहले ही समिति में बदलाव कर दिए गए।



समिति के संयोजक डॉ.अनिल राजपूत को बदलकर एमएलबी कॉलेज की प्राध्यापक डॉ.भारती जैन को यह जिम्मेदारी दी गई। वहीं समिति में डॉ.अजय कुमार भारद्वाज, डॉ.एचके गर्ग के अलावा चार नए सदस्य डॉ. सीमा हार्डिकर और डॉ.डेनियल ग्लांस डैनी सरोजिनी नायडू कॉलेज, सहायक प्राध्यापक डॉ.महेन्द्र मेहरा एमवीएम कॉलेज और डॉ.भूपेन्द्र झा एमएलबी कॉलेज को भी शामिल कर लिया गया।



एक दिन में मांगी अध्ययन रिपोर्ट

उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा पुरानी समिति को तीन दिन में अंतराल पर बदल दिया। इसकी जगह नई समिति गठित कर सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई लेकिन रिपोर्ट सौंपने का समय ही नहीं दिया गया। नई समिति का गठन 5 जनवरी को किया गया और उससे एक ही दिन में अध्ययन रिपोर्ट भी तलब कर ली गई। जहां पुरानी समिति को अध्ययन के लिए चार दिन गए थे। नई समिति को अतिरिक्त समय नहीं दिया गया और रिपोर्ट 6-7 जनवरी को ही तलब की गई है।



विभाग की नीयत पर उठे सवाल

अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा विभाग की पहल पर अंदेशा जता रहे हैं। उनका कहना है एक दिन में दूसरे राज्य में सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान और नियमों का अध्ययन करना संभव नहीं है। जिस हड़बड़ी में समिति को बदला गया और नई समिति से एक दिन में ही रिपोर्ट मांगी गई है वह नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है। उन्हें सामाजिक सुरक्षा की पहल पर समिति का गठन और रिपोर्ट तैयार कराने पर संदेह है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी चाहते ही नहीं हैं कि कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर हो और गेस्ट फैकल्टी को उनका अधिकार मिले।



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गेस्ट फैकल्टी के लिए हरियाणा में ऐसे हैं प्रावधान

  • 58 वर्ष की आयु तक सेवा की गारंटी
  • हर सत्र हटाने / दोबारा चयन की प्रक्रिया नहीं
  • न्यूनतम सेवा की स्पष्ट शर्तें
  • कम से कम 5 वर्ष की सेवा
  • एक शैक्षणिक सत्र में 240 कार्य दिवस
  • समान कार्य के लिए समान वेतन
  • 57,700 रुपए निर्धारित मासिक वेतन
  • केंद्र के समान मंहगाई राहत यानी डीआर
  • सुरक्षा के लिए वैधानिक प्रावधान
  • वेतन में वृद्धि के भी अवसर


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