उच्च शिक्षा विभाग का रिलोकेशन फर्जीवाड़ा: कॉलेजों में पोर्टल पर भरे पद खाली, खाली पद दिख रहे भरे
ऐसे समझें पूरा मामला..
- पोर्टल पर भरे पद दिखाए रिक्त, जहां खाली उन्हें छिपाया।
- शैक्षणिक सत्र का एक महीना बीता, अब भी फैकल्टी नहीं
- फैकल्टी की नियुक्ति न होने से कॉलेजों में पिछड़ा सिलेबस
- रिलोकेशन की गड़बड़ी से च्वाइस फिलिंग में असमंजस
- उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल से भटक रहे गेस्ट अभ्यर्थी
BHOPAL. उच्च शिक्षा विभाग की गेस्ट फैकल्टी रिलोकेशन प्रक्रिया विवादों में है। पोर्टल पर भरे पद रिक्त और रिक्त पद गायब दिखाए जा रहे हैं। इससे अभ्यर्थी उलझन में हैं और कई कॉलेजों में सत्र शुरू होने के बाद भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है। विभाग पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उलझन बढ़ा रही रिलोकेशन प्रक्रिया
गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति को उच्च शिक्षा विभाग की रिलोकेशन प्रक्रिया उलझा रही है। रिलोकेशन प्रक्रिया में सरकारी कॉलेजों के पदों की स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। जिन कॉलेजों में पद भरे हुए हैं उन्हें पोर्टल पर खाली दर्शाया जा रहा है। जबकि खाली पदों की स्थिति छिपाई जा रही है। इससे इन कॉलेजों में आवेदन करने वाले गेस्ट फैकल्टी उलझन में हैं।
सत्र शुरू पर कॉलेजों में नहीं हो रही पढ़ाई
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और पारदर्शिता के दावों के बीच शैक्षणिक सत्र 2026-27 में उच्च शिक्षा विभाग सवालों के घेरे में है। गेस्ट फैकल्टी पोर्टल पर रिलोकेशन की गफलत के कारण फैकल्टी के पदों को भरा नहीं जा पा रहा है। जबकि शैक्षणिक सत्र का एक महीना बीत चुका है। पद रिक्त होने से कई कॉलेजों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। इसका असर सिलेबस पर पड़ रहा है।
पोर्टल पर स्थिति अस्पष्ट, पारदर्शिता पर सवाल
सबसे गंभीर मामला अतिथि विद्वानों की रिलोकेशन प्रक्रिया में सामने आ रहा है। कई कॉलेजों में पद रिक्त हैं, लेकिन फिर भी उन्हें रिलोकेशन पोर्टल पर दर्शाया नहीं जा रहा है। वहीं नियमित प्राध्यापक या गेस्ट फैकल्टी होने के बावजूद पोर्टल पर कॉलेजों में पद रिक्त बताए जा रहे हैं। इससे रिलोकेशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभ्यर्थी विकल्पों से वंचित, छात्र परेशान
अव्यवस्था के कारण एक ओर योग्य अतिथि विद्वानों को उनके वास्तविक विकल्पों से वंचित किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनेक महाविद्यालयों के विद्यार्थी शिक्षकों के अभाव में नियमित अध्ययन से वंचित हो रहे हैं। यह केवल अतिथि विद्वानों के साथ अन्याय नहीं है, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ हो रहा है।
सत्यापन और पारदर्शी अपडेट की मांग
उच्च शिक्षा विभाग को कॉलेजों के रिक्त एवं भरे हुए पदों का सत्यापन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। रिलोकेशन प्रक्रिया के पारदर्शी होने से कॉलेजों में खाली और भरे पदों की स्थिति स्पष्ट हो रही है। इसे पोर्टल पर उपलब्ध कराने से अभ्यर्थियों की परेशानी दूर हो रही है। वहीं विभाग और कॉलेजों पर लगने वाले अनियमितता के आरोप भी नहीं लग रहे हैं।
कॉलेजों में खाली- भरे पदों की गड़बड़ी
शासकीय कॉलेज मेहदवानी में कैमेस्ट्री, जूलॉजी और राजनीति विज्ञान के प्राध्यापकों के नियमित पद भरे जा चुके हैं। इसके बाद भी पोर्टल पर इन्हें खाली दिखाया जा रहा है। जिससे च्वाइस फिलिंग को लेकर अभ्यर्थी असमंजस में हैं।
जावरा में राजनीति विज्ञान जबकि शासकीय महाविद्यालय सारनी में भूगोल के प्राध्यापक के पद रिक्त हैं। इन पदों को दर्शाया नहीं जा रहा है। इसी तरह गोहपारू कॉलेज में कैमेस्ट्री विषय में प्राध्यापक का पद खाली है। अपडेट किए जाने के बाद भी यह पद पोर्टल पर नहीं दिख रहा है।
हटा कॉलेज और बालाघाट कॉलेज में ग्रंथपाल के पद रिक्त हैं लेकिन पोर्टल पर इन्हें खोला नहीं जा रहा है। हनुमना, मऊगंज कॉलेज में हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, गणित, कैमेस्ट्री और कम्प्युटर साइंस के पद खाली होने के बावजूद पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं। वहीं गुना के कस्तूरबा कन्या महाविद्यालय में भी ग्रंथपाल के खाली पद पर स्थिति साफ नहीं है।
FAQ
- MP में गेस्ट फैकल्टी रिलोकेशन प्रक्रिया में क्या समस्या है?
पोर्टल पर जिन कॉलेजों में पद भरे हैं उन्हें रिक्त दिखाया जा रहा है और जहां पद खाली हैं उन्हें दर्शाया ही नहीं जा रहा, जिससे अभ्यर्थी सही च्वाइस नहीं भर पा रहे। - इस गड़बड़ी का छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
सत्र शुरू हुए 1 महीना हो गया है लेकिन कई कॉलेजों में फैकल्टी नहीं होने से पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई और सिलेबस पिछड़ गया है। - किन कॉलेजों के नाम सामने आए हैं?
मेहदवानी, जावरा, सारनी, गोहपारू, हटा, बालाघाट, हनुमना, मऊगंज और गुना के कस्तूरबा कन्या महाविद्यालय में पदों की स्थिति पोर्टल पर गलत दिखाई गई है।
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