73 हजार अतिथि शिक्षकों को नहीं मिल रहा बराबरी का हक, हाईकोर्ट हुआ गंभीर

Neel Tiwari | Sept 21, 2026, 18:06 IST
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73 हजार अतिथि शिक्षक एमपी के सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों के समान काम कर रहे हैं, फिर भी वेतन और अन्य लाभ में भेदभाव। हाईकोर्ट में समान वेतन, छुट्टी और दूसरे लाभों का मुद्दा उठा। सरकार को जवाब के लिए तीन हफ्ते मिले हैं।

पांच प्वाइंट में समझें पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश के 73 हजार अतिथि शिक्षकों का हक हाईकोर्ट पहुंचा है।
  • याचिका में समान काम समान वेतन मांगा गया है।
  • छुट्टी, मेडिकल और मातृत्व लाभ देने की मांग भी रखी गई है।
  • 90 फीसदी अटेंडेंस नियम को लेकर भी कोर्ट में सवाल उठे।
  • सरकार को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय मिला है।

मध्यप्रदेश के स्कूलों में कार्यरत करीब 73 हजार अतिथि शिक्षकों का मामला जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा है। इसके लिए दायर याचिका में उनकी सेवा से जुड़े अधिकार उठाए गए हैं। याचिका विकास कुमार नंदानिया और मुकेश जोशी ने लगाई है। उनकी ओर से पुष्पेंद्र शाह और विनायक प्रसाद शाह पेश हुए। सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच में हुई।



समान काम, लेकिन सुविधाओं में अंतर का सवाल

याचिकाकर्ताओं ने अतिथि शिक्षकों और नियमित शिक्षकों का मुद्दा उठाया। कोर्ट को बताया गया कि अतिथि शिक्षक स्कूलों में पूरा काम करते हैं। इसके बावजूद वेतन और दूसरी सुविधाओं में अंतर है। इसी अंतर को याचिका में मुख्य आधार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने समान काम के बदले समान वेतन मांगा है। उन्होंने दूसरे सेवा लाभ देने की मांग भी रखी है।



कोर्ट ने पूछा क्या अलग-अलग है शिक्षकों की योग्यता

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने अहम सवाल पूछा। उन्होंने राज्य सरकार के वकील से योग्यता को लेकर जानकारी मांगी। कोर्ट ने पूछा कि क्या नियमित शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों की योग्यता श्रेणियों में योग्यता अलग है। सरकार की ओर से बताया गया कि दोनों श्रेणियों में योग्यता के मापदंड बराबर हैं। यानी अतिथि शिक्षकों की योग्यता भी नियमित शिक्षकों के लिए तय मानकों के अनुसार है। इसके बाद कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीरता के साथ देखने के संकेत दिए।



90 फीसदी अटेंडेंस का नियम पर सवाल

सुनवाई में अतिथि शिक्षकों की 90 फीसदी अटेंडेंस का मुद्दा उठा। याचिकाकर्ताओं ने इससे जुड़ी व्यावहारिक परेशानी बताई। उनका कहना है कि अतिथि शिक्षकों को छुट्टी की सुविधा नहीं मिलती। किसी भी तरह की मेडिकल या कैजुअल लीव नहीं मिलती। ऐसे में 90 फीसदी अटेंडेंस पूरी करना मुश्किल बताया गया। इस मुद्दे को भी कोर्ट के सामने रखा गया।



छुट्टी नहीं मिलने का असर क्या है?

याचिकाकर्ताओं ने छुट्टी से जुड़े अधिकारों की मांग की है। इसमें कैजुअल लीव और मेडिकल लीव शामिल हैं। महिला शिक्षकों के लिए मातृत्व अवकाश की मांग भी है। चिकित्सा सुविधा देने की मांग भी याचिका में रखी गई है। उनका कहना है कि काम के साथ जरूरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। इन्हीं मुद्दों पर कोर्ट में आगे सुनवाई होगी।



कोर्ट ने मामले को एक साथ देखने को कहा

बेंच ने मामले को बड़े वर्ग से जुड़ा माना है। कोर्ट ने पूरे तथ्यों को एक साथ रखने को कहा। इसके बाद सभी मुद्दों पर साथ में सुनवाई होगी। इससे मामले में केवल वेतन का सवाल नहीं रह गया है। छुट्टी और दूसरी सुविधाएं भी सुनवाई का हिस्सा हैं। अगली सुनवाई में इन मुद्दों पर स्थिति और साफ होगी।



सरकार को जवाब के लिए तीन हफ्ते मिले

पिछले नोटिस का जवाब सरकार की ओर से नहीं आया था। सरकार के वकील ने इसके लिए कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को तीन हफ्ते का अंतिम समय दिया। अब मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। उस दौरान सरकार अपना जवाब कोर्ट में रखेगी।



अतिथि शिक्षकों की नजर अब अगली सुनवाई पर

अभी हाईकोर्ट ने अतिथि शिक्षकों की मांगों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। फिलहाल सरकार से जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आएगा। इसके बाद याचिका में उठे मुद्दों पर सुनवाई आगे बढ़ेगी। समान वेतन और सेवा सुविधाएं इसमें अहम रहेंगी। करीब 73 हजार शिक्षकों पर इसका असर बताया गया है।



मामले में आगे क्या तय होना बाकी है?

समान वेतन का मुद्दा अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। छुट्टी और दूसरी सुविधाओं पर भी अंतिम फैसला बाकी है। मातृत्व और मेडिकल सुविधा का सवाल भी लंबित है। 90 फीसदी अटेंडेंस से जुड़ा पक्ष भी सामने आया है। इसलिए अगली सुनवाई मामले के लिए अहम रहेगी। कोर्ट के अगले आदेश से आगे की दिशा साफ होगी।



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