स्कूल में बंदूक लेकर पहुंचे मास्टर जी, राइफल से स्टाफ पर जमा रहे थे धौंस!
समझें क्या है पूरा मामला...
- राघौगढ़ ब्लॉक के धरनावदा स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक का वीडियो वायरल हो रहा है।
- वीडियो में वे स्कूल परिसर में बंदूक लहराते दिखाई दे रहे हैं।
- आरोप है कि वे आए दिन हथियार लेकर स्कूल पहुंचते हैं।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे छात्रों और स्टाफ में डर का माहौल बनता है।
- शिकायत के बाद भी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
मध्यप्रदेश के गुना जिले के राघौगढ़ ब्लॉक में एक सरकारी स्कूल से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी स्कूल धरनावदा में तैनात एक शिक्षक का बंदूक लहराते हुए वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
वीडियो में क्या दिखा
वायरल वीडियो में शिक्षक विनोद साहू स्कूल के बाहर रायफल लिए खड़े नजर आते हैं। शुरुआत में वे अकेले खड़े होकर यहां-वहां निशाना साधते दिखते हैं। कुछ देर बाद कुछ और लोग वहां पहुंचते हैं।
इसी बीच स्कूल की प्रिंसिपल भी उस रास्ते से गुजरती हैं। इस दौरान विनोद साहू बंदूक लहराते हुए नजर आते हैं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग असहज हो जाते हैं।
अक्सर बंदूक लेकर जाते हैं स्कूल
स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई इकलौती घटना नहीं है। उनका कहना है कि शिक्षक अक्सर बंदूक लेकर स्कूल पहुंचते हैं। आरोप है कि इसका मकसद वरिष्ठ स्टाफ और छात्रों पर दबदबा बनाना है। स्कूल जैसी जगह पर हथियार का यह प्रदर्शन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्कूल प्रबंधन का बयान
मामला सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। प्रबंधन का कहना है कि शिक्षक के स्कूल में बंदूक लाने की बात संज्ञान में आने पर उन्हें नोटिस जारी किया गया था। यह कदम नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की दिशा में पहला चरण माना जाता है।
वहीं जानकारी के अनुसार विनोद साहू ने यह नोटिस लेने से ही इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने नोटिस को स्वीकार करने के बजाय उसकी फोटो खींच ली। इस रवैये ने मामले को और उलझा दिया है।
कार्रवाई पर उठते सवाल
जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया था। इसके बावजूद उनकी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
सवाल उठ रहा है कि स्कूल जैसी संवेदनशील जगह पर हथियार ले जाने जैसी शिकायत पर भी प्रशासन खामोश क्यों है।
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी होती है कि स्कूल परिसर को सुरक्षित और तनावमुक्त बनाए रखे। ऐसे मामलों में देरी से कार्रवाई होने पर छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
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