ओरछा रामराजा मंदिर खजाना केस 9 साल बाद भी अधूरा, पूर्व क्लर्क की FIR रद्द
समझें क्या है पूरा मामला
- ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर में कैश और गहनों की हेराफेरी का मामला है।
- यह गड़बड़ी 2017 में सामने आई थी।
- मंदिर के तत्कालीन क्लर्क मुन्नालाल तिवारी के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी।
- 9 साल में भी जांच पूरी नहीं हो पाई।
- जबलपुर हाईकोर्ट ने अब यह FIR रद्द कर दी है।
ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर बुंदेलखंड का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इसे कई लोग छोटी अयोध्या भी कहते हैं। इस मंदिर के खजाने में बड़ी रकम और गहने दान में आते हैं। साल 2017 में इन्हीं दान राशि और गहनों में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।
जांच में पता चला था कि मंदिर के नकद बही-खातों, गहनों और स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी हुई है। मंदिर की चल-अचल संपत्तियों में भी अनियमितता मिली थी। इसके बाद एक संयुक्त जांच समिति बनाई गई थी।
रामराजा मंदिर ओरछा कीसमिति की रिपोर्ट के आधार पर 10 सितंबर 2017 को FIR दर्ज की गई थी। यह FIR कई धाराओं के तहत हुई। इसमें मंदिर क्लर्क मुन्नालाल तिवारी का नाम सामने आया था।
9 साल की जांच अधूरी
2017 से 2026 तक, यानी पूरे 9 साल बाद भी यह जांच पूरी नहीं हो सकी। इस बीच कई अधिकारी बदले गए। कई जांच अधिकारी रिटायर भी हो गए। साथ ही दस्तावेज जुटाने में भी देरी होती रही।
जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इसी देरी को गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति हिमांशू जोशी ने 15 जून को यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक कठिनाई या अधिकारियों के तबादले जांच में इतनी देरी का बहाना नहीं हो सकते।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आपराधिक कानून किसी नागरिक के सिर पर हमेशा लटकती तलवार नहीं बन सकता। संविधान के तहत हर नागरिक को त्वरित और निष्पक्ष न्याय का अधिकार है। 9 साल तक मामला लंबित रखना इस अधिकार का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट का फैसला
इस फैसले के बाद ओरछा थाने में दर्ज FIR को रद्द कर दिया गया। यह राहत सिर्फ मुन्नालाल तिवारी से जुड़ी कार्यवाही पर लागू है। पूरा मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
याचिकाकर्ता मुन्नालाल तिवारी का कहना था कि वह सिर्फ लिपिकीय यानी क्लर्क का काम करते थे। ओरछा रामराजा सरकारके बड़े वित्तीय फैसले तहसीलदार और वरिष्ठ राजस्व अधिकारी लेते थे। कोर्ट में यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ गबन या धोखाधड़ी का कोई सीधा सबूत नहीं मिला।
निवाड़ी जिले के गठन से पहले का मामला
यह पूरा मामला निवाड़ी जिला बनने से पहले का है। तब यह क्षेत्र अविभाजित टीकमगढ़ जिले में आता था। तत्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास के निर्देश पर तब के SDM आदित्य सिंह ने जांच की थी। उन्होंने 16 बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट तैयार की थी।
इस जांच में तत्कालीन तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। प्रमुख राजस्व आयुक्त और उप राजस्व आयुक्त ने उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
साथ ही विभागीय जांच के आदेश भी हुए थे। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और जांच रिपोर्ट भी आगे नहीं भेजी गई। इसके उलट गुलाब सिंह का तबादला हो गया। वहीं मुन्नालाल तिवारी की सेवा समाप्त कर दी गई थी।
एसपी करेंगे अपील
निवाड़ी पुलिस अधीक्षक डॉ. राय सिंह नरवरिया ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एकलपीठ का आदेश है। पुलिस इसके खिलाफ डिविजन बैंच में अपील करेगी।
राय सिंह नरवरिया के मुताबिक मामला बेहद गंभीर है। विवेचना में कई प्रशासनिक बाधाएं आई थीं। निवाड़ी जिला बनने से पहले की यह FIR है, इसलिए रिकॉर्ड जुटाने में भी समय लगा। संबंधित विभागों से बार-बार पत्राचार के बाद भी जरूरी दस्तावेज नहीं मिल पाए। यही वजह जांच लंबी खिंचने की रही।
क्लर्क का पक्ष
दूसरी ओर ओरछा का रामराजा मंदिरके पूर्व क्लर्क मुन्नालाल तिवारी का कहना है कि मंदिर के आसपास अतिक्रमण करने वालों ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। उनका दावा है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। उन्होंने इसे अपने संयम का नतीजा बताया है।
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