ग्वालियर एलएनआईपीई पूर्व कुलपति को हाईकोर्ट से राहत, 35 लाख मुआवजा आदेश रद्द
पांच पाइंट में समझें पूरा मामला
- हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच का 35 लाख रुपए मुआवजे का आदेश रद्द।
- एलएनआईपीई के पूर्व कुलपति को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है
- मामला दोबारा सुनवाई के लिए खेल-युवा मंत्रालय (अपीलीय प्राधिकरण) को भेजा।
- वर्ष 2019 में महिला योग इंस्ट्रक्टर ने पूर्व कुलपति पर प्रताड़ना के लगाए थे आरोप।
- हाईकोर्ट बोला, अपील लंबित हो तो टिप्पणी से बचें
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने एलएनआईपीई के पूर्व कुलपति को राहत दी है। पूर्व कुलपति डॉ. दिलीप कुमार दुरेहा पर 35 लाख रुपए का मुआवजा लगाया गया था। यह आदेश सिंगल बेंच ने जुलाई 2025 में दिया था। अब डबल बेंच ने इस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। मामले को नए सिरे से देखने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
फैसला किसने सुनाया
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस आशीष श्रोती की युगलपीठ ने यह फैसला दिया। अदालत ने डॉ. दुरेहा की रिट अपील स्वीकार कर ली। डबल बेंच ने सिंगल बेंच का मुआवजा आदेश रद्द कर दिया है। अब इस मामले की दोबारा जांच होगी।
मामला अब कहां जाएगा
हाईकोर्ट ने यह मामला केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय को भेजा है। खेल एवं युवा मंत्रालय के सचिव इस केस में अपीलीय प्राधिकरण हैं। वहीं अब इस मामले पर पुनर्विचार होगा। डबल बेंच ने यह स्पष्ट निर्देश दिया है। पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू होगी।
अपील का अधिकार पवित्र
युगलपीठ ने अपने आदेश में एक अहम बात कही है। अदालत ने कहा कि अपील का अधिकार वैधानिक है। यह अधिकार बहुत महत्वपूर्ण भी है। जब विभागीय स्तर पर अपील लंबित हो, तब क्या होता है? तब न्यायालय की टिप्पणियां असर डाल सकती हैं। यह टिप्पणियां पूरी अपीलीय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसी आधार पर अदालत ने सिंगल बेंच का आदेश हटाया।
क्या था पूरा मामला
यह विवाद वर्ष 2019 का है। उस समय डॉ. दुरेहा एलएनआईपीई (LNIPE – Lakshmibai National Institute of Physical Education) के कुलपति थे। संस्थान में एक महिला योग इंस्ट्रक्टर के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने तत्कालीन कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप था कि कार्यस्थल पर उन्हें प्रताड़ित किया गया। मामला अंदरूनी स्तर पर दर्ज हुआ। इसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।
आंतरिक समिति की जांच
मामले की जांच आंतरिक शिकायत समिति ने की। इस समिति को आईसीसी (ICC – Internal Complaints Committee) कहते हैं। समिति ने 21 सितंबर 2020 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में आरोपों को कदाचार माना गया। हालांकि किसी दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई। यह रिपोर्ट महिला कर्मचारी के लिए संतोषजनक नहीं थी।
सिंगल बेंच का बड़ा आदेश
रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर महिला कर्मचारी हाईकोर्ट पहुंचीं। उन्होंने रिट याचिका दायर कर मुआवजे की मांग की। सिंगल बेंच ने 15 जुलाई 2025 को बड़ा आदेश दिया। पूर्व कुलपति पर 35 लाख रुपए का मुआवजा लगाया गया। राज्य सरकार पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगा। यह जुर्माना समय पर एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज न करने के लिए था। संस्थान पर भी 1 लाख रुपए का हर्जाना लगाया गया। कुल मिलाकर तीन पक्षों पर जुर्माना तय हुआ था।
डबल बेंच में चुनौती
इस आदेश से पूर्व कुलपति संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने डबल बेंच में रिट अपील दायर की। डबल बेंच ने उनकी अपील स्वीकार कर ली। पीठ ने सिंगल बेंच के आदेश की गहराई से समीक्षा की। समीक्षा के बाद डबल बेंच ने आदेश रद्द कर दिया। अब मामला अपीलीय प्राधिकरण के पास जाएगा।
एलएनआईपीई के बारे में
एलएनआईपीई का पूरा नाम लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान है। यह संस्थान ग्वालियर, मध्यप्रदेश में स्थित है। इसे देश का प्रमुख शारीरिक शिक्षा संस्थान माना जाता है। यह केंद्र सरकार के अधीन काम करता है। यहां खेल और शारीरिक शिक्षा के कई कोर्स चलते हैं। यह संस्थान डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा रखता है।
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