13 तक धड़ल्ले से हो सकेंगे प्रमोशन, DPC पर तीखी बहस, वीडियो दिखाने की चुनौती

Neel Tiwari | Jul 07, 2026, 13:49 IST
प्रमोशन में आरक्षण मामला
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित प्रमोशन में आरक्षण मामले में मंगलवार, 06 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई। सामान्य वर्ग ने सरकार पर प्रमोशन की तैयारी और महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन से पीछे हटने का आरोप लगाया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में तीखी बहस हुई।
  • सरकार ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देकर समय मांगा है।
  • सामान्य वर्ग ने महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन का वीडियो दिखाने की बात कही है।
  • अजाक्स ने कहा कि प्रमोशन पर कोई लिखित रोक नहीं है।
  • 13 जुलाई को अगली सुनवाई तय, अब सभी की नजर कोर्ट के आदेश पर टिकी है।

महाधिवक्ता की गैरमौजूदगी से टली सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजनल बेंच में मंगलवार को प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई हुई।



सुनवाई की शुरुआत में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह स्वयं पक्ष रखना चाहते हैं। फिलहाल प्रशांत सिंह इंदौर से जबलपुर आने के दौरान यात्रा में हैं। साथ ही समय पर न्यायालय नहीं पहुंच पाए।



इस कारण सरकार ने अगली तारीख देने का अनुरोध किया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस दिन मामले के गुण-दोष पर कोई तर्क नहीं रख रही है। विस्तृत पक्ष महाधिवक्ता ही अगली सुनवाई में प्रस्तुत करेंगे।



प्रमोशन आदेशों को लेकर सरकार पर आरोप

सरकार द्वारा समय मांगे जाने के बाद सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने अदालत में कहा कि राज्य सरकार तेजी से विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की तैयारी कर रही है।



मनोज शर्मा ने दावा किया कि पिछली रात ही विधानसभा से 15 विभाग के प्रमोशन आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने अदालत को याद दिलाया कि पूर्व में महाधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष मौखिक आश्वासन दिया था कि अंतिम निर्णय आने तक डीपीसी नहीं होगी।



अधिवक्ता मनोज शर्मा का कहना था कि इसी आश्वासन के कारण अदालत ने कोई लिखित रोक लगाने की आवश्यकता नहीं समझी थी। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार को अगली तारीख दी जाती है तो तब तक उसे किसी भी प्रकार के प्रमोशन आदेश जारी करने से रोका जाए।



वीडियो दिखा सकता हूं...

सुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा उस समय हुई जब वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने अदालत में कहा कि महाधिवक्ता ने स्पष्ट रूप से डीपीसी नहीं करने का आश्वासन दिया था।



अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के रिकॉर्ड में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है। साथ ही प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने वाला कोई लिखित आदेश भी मौजूद नहीं है।



इसके तुरंत बाद मनोज शर्मा ने कहा कि हम कोर्ट में वह वीडियो दिखा सकते हैं, उन्होंने कहा कि अब तो हद हो गई जब महाधिवक्ता कोर्ट में कोई बात करें और उसके बाद उसे सिद्ध भी करना पड़े।



हालांकि इस पर सरकार की ओर से अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस पर कोई मत नहीं दिया है। इस मामले में महाधिवक्ता ही तथ्य रखेंगे और बहस करेंगे।



अजाक्स का पक्ष- लिखित रोक नहीं

अजाक्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने अदालत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में ऐसा कोई लिखित न्यायिक आदेश नहीं है, जिससे सरकार को प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ाने से रोका गया हो।



अधिवक्ता का कहना था कि अदालत के रिकॉर्ड में केवल वही बातें महत्वपूर्ण हैं जो विधिवत दर्ज हैं। इसलिए सामान्य वर्ग द्वारा मौखिक आश्वासन का हवाला देकर प्रमोशन रोकने की मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों के समर्थन में विस्तृत दलीलें पेश कीं।



अगली सुनवाई 13 जुलाई को

सरकार ने महाधिवक्ता की उपलब्धता का हवाला देते हुए अगले सप्ताह की तारीख देने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई निर्धारित कर दी है।



हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से दोबारा आग्रह किया गया कि अगली सुनवाई तक सरकार को कोई भी प्रमोशन आदेश जारी करने से रोका जाए।



इस पर डिवीजनल बेंच ने तत्काल कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि हम ऑर्डर जारी करेंगे।



इस सुनवाई के बाद अब दो बातें पूरी तरह स्पष्ट हैं। पहली, प्रमोशन में आरक्षण मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।



दूसरी इस बीच सरकार को प्रमोशन आदेश जारी करने से रोका जाएगा या नहीं, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। यह स्थिति केवल अदालत का लिखित आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



फिलहाल प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारी, कर्मचारी संगठन और सभी संबंधित पक्ष अब हाईकोर्ट के उसी आदेश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि आगे की पूरी प्रक्रिया उसी पर निर्भर करेगी।



सरकार पर बाध्यता नहीं

इस मामले का अधिकृत आदेश वेबसाइट पर देर शाम तक अपलोड नहीं हुआ है लेकिन हाई कोर्ट की वेबसाइट में मामले के स्टेटस से यह साफ है कि कोर्ट ने कोई भी स्टे आर्डर नहीं दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी और तब तक सरकार के ऊपर प्रमोशन को लेकर कोई भी बाध्यता नहीं है।



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