मध्य प्रदेश में भारी बारिश: कई नदियां उफान पर, भोपाल में सात इंच पानी, स्कूल बंद

Pawan Modiya | Aug 10, 2026, 23:53 IST
एमपी में भारी बारिश
मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसून से कई जिलों में हालात बिगड़े हैं। भोपाल में 175.6 मिलीमीटर बारिश हुई। सेमरा के 200 घर पानी से घिरे हैं। रतलाम में अत्यधिक बारिश का अलर्ट है। भोपाल और आगर-मालवा के स्कूलों में छुट्टी घोषित हुई।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में सक्रिय बारिश तंत्र से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं।
  • भोपाल में पिछले चौबीस घंटों में करीब सात इंच बारिश हुई।
  • भोपाल और आगर-मालवा में बच्चों के स्कूल बंद किए गए हैं।
  • रतलाम में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है।
  • कई नदियां उफान पर हैं और गांवों का संपर्क टूटा है।

मध्य प्रदेश में भारी बारिश ने कई जिलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भोपाल में सड़कें, घर, मंदिर और पुलिस परिसर जलमग्न हुए हैं। सीहोर, रायसेन और शाजापुर में भी हालात बिगड़े हैं। कई मार्ग पानी के कारण बंद हो गए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने नई चेतावनी जारी की है। रतलाम में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई गई है।



भोपाल में सात इंच बारिश

भोपाल में पिछले 24 घंटों में 175.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। यह मात्रा करीब 6.9 इंच होती है। मौसम विभाग ने इसे अति भारी बारिश की श्रेणी में रखा। भोपाल शहर में 151 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। कोलार क्षेत्र में 158.4 मिलीमीटर बारिश हुई। अरेरा हिल्स में 151 मिलीमीटर पानी बरसा।



लगातार बारिश से शहर की सड़कें जलमग्न हो गईं। कई कॉलोनियों में घरों तक पानी पहुंच गया। रेलवे ट्रैक पर भी बारिश का पानी भर गया। इससे रेल संचालन प्रभावित होने का खतरा बढ़ा। ईंटखेड़ी क्षेत्र में एक मंदिर पानी में डूब गया। अस्पताल के आसपास की सड़कों पर भी तेज बहाव दिखा। कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी में जलभराव से लोगों को परेशानी हुई। पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी जमा हुआ। एक पेड़ गिरने से प्रमुख मार्ग पर जाम लगा। वाहन चालकों को दूसरे रास्तों से निकाला गया।



स्कूलों में 11 अगस्त की छुट्टी घोषित



एमपी में बारिश

भारी बारिश के कारण भोपाल में बच्चों के स्कूल बंद किए गए हैं। यह छुट्टी 11 अगस्त के लिए घोषित हुई है। आगर-मालवा में भी बच्चों के स्कूलों की छुट्टी घोषित हुई। स्थानीय हालात देखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया।



रतलाम पर सबसे बड़ा अलर्ट

मौसम विभाग ने रतलाम के लिए सबसे गंभीर चेतावनी जारी की। यहां अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। वर्षा की मात्रा 204.5 मिलीमीटर से अधिक हो सकती है। चेतावनी 11 अगस्त की सुबह तक प्रभावी है। बारिश के साथ गरज और बिजली गिर सकती है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर रहेगी।



निचले इलाकों में तेजी से पानी भर सकता है। छोटे नाले और मौसमी जलधाराएं उफन सकती हैं। कम ऊंचाई वाले पुलों पर आवागमन बंद हो सकता है। रतलाम में झरनों और जलधाराओं का बहाव भी बढ़ा है। पर्यटकों को पानी के पास जाने से बचना चाहिए।



चार जिलों में अति भारी वर्षा संभव

सीहोर, राजगढ़, उज्जैन और आगर-मालवा में अति भारी बारिश संभव है। यहां 115.6 से 204.4 मिलीमीटर वर्षा हो सकती है। इन जिलों में गरज के साथ बिजली गिरने की आशंका है। तेज हवाएं कमजोर पेड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।



सीहोर में पिछले चौबीस घंटों में 170 मिलीमीटर बारिश हुई। यह मात्रा करीब 6.7 इंच होती है। राजगढ़ में 112.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सारंगपुर में 190.8 मिलीमीटर पानी बरसा।



कालापीपल में 153 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। पचोर में वर्षा का आंकड़ा 140 मिलीमीटर रहा। आगर क्षेत्र में तेज हवा की गति 41 किलोमीटर दर्ज हुई। जिले के कई निचले इलाकों में पानी भरा है।



किन जिलों में भारी बारिश

भोपाल, विदिशा और रायसेन में भारी बारिश का अलर्ट है। नर्मदापुरम और झाबुआ भी चेतावनी वाले जिलों में हैं। देवास, शाजापुर और मंदसौर में भारी बारिश हो सकती है। नीमच और गुना में भी अलर्ट जारी है। अशोकनगर, शिवपुरी और श्योपुर में तेज बारिश संभव है। छिंदवाड़ा, सागर और पांढुर्णा भी सूची में हैं।



इन जिलों में 64.5 से 115.5 मिलीमीटर बारिश संभव है। कहीं-कहीं बिजली और तेज हवा का खतरा रहेगा। मौसम विभाग ने कई अन्य जिलों में गरज की आशंका जताई। वहां बिजली और तेज हवा का अलर्ट जारी है।



सेमरा में 200 घर घिरे

भोपाल के सेमरा इलाके में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने। करीब 200 घरों के आसपास पानी भर गया। रिपोर्ट के अनुसार, पानी पांच से छह फीट तक पहुंचा। कई परिवार अपने घरों में फंस गए। स्थानीय रास्ते पानी में डूबने से आवाजाही बंद हुई। बिजली के उपकरणों से हादसे का खतरा भी बढ़ा।



विदिशा में 17 लोगों का बचाव

विदिशा में बाढ़ के बीच 17 लोग फंस गए थे। फंसे लोगों में बच्चे भी शामिल थे। बचाव दल ने सभी लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। बेतवा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ा है। लटेरी में 106.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। विदिशा में 70 मिलीमीटर वर्षा हुई है।



रायसेन जिले में भारी बारिश से एक पुल बह गया। घोड़ा पछाड़ नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। पुल के करीब आठ फीट ऊपर पानी बह रहा है। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया।



रायसेन में 122.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बाड़ी में 134 मिलीमीटर पानी बरसा। बेगमगंज में 132.4 मिलीमीटर बारिश हुई। गैरतगंज में 117.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।



ब्यावरा क्षेत्र के एक रेलवे अंडरपास में पानी भर गया। इससे 25 गांवों का संपर्क टूट गया। राजगढ़ जिले में कई जलधाराएं उफान पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे रपटों पर पानी बह रहा है।



मंडला और शाजापुर का हाल

मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है। हालांकि, छोटा पुल अब भी पानी में डूबा है। छिताखुदरी-बिलटुकरी जलाशय में एक युवक बह गया। घटना के समय युवक नहा रहा था।



शाजापुर में कालीसिंध नदी उफान पर है। आसपास के निचले क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। शाजापुर में 39 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। शुजालपुर में 90 मिलीमीटर पानी बरसा। पड़ाव कॉलोनी में घरों और दुकानों तक पानी पहुंचा। कई ग्रामीण रास्तों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ।



सीहोर में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाया गया। रास्ते में एक नाला उफान पर था। स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों ने जोखिम के बीच मदद की। महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया।



डैमों में बढ़ा पानी

लगातार बारिश से भोपाल और आसपास के बांधों में पानी बढ़ा। आगर-मालवा में बांध के गेट खोले गए। उमरिया के जोहिला बांध के दो गेट भी खोले गए। पानी छोड़ने से निचले क्षेत्रों में बहाव बढ़ सकता है।



बारिश का सिस्टम क्यों सक्रिय

उत्तर मध्य प्रदेश पर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती घेरा भी सक्रिय है। यह घेरा समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर ऊपर तक फैला है। ऊंचाई के साथ इसका झुकाव दक्षिण दिशा में है।



मानसून की रेखा बीकानेर और दतिया से गुजर रही है। यह उत्तर मध्य प्रदेश के कम दबाव क्षेत्र तक जाती है। इसके बाद मानसून रेखा बंगाल की खाड़ी तक पहुंच रही है। इन तंत्रों से राज्य में नमी बढ़ी है।



उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर भी चक्रवाती घेरा बना है। इसके असर से नया कम दबाव क्षेत्र बन सकता है। यह नया तंत्र 12 अगस्त के आसपास बनने की संभावना है। इससे बारिश की गतिविधियां आगे भी जारी रह सकती हैं।



अचानक बाढ़ का खतरा

छह जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया है। यह खतरा निम्न से मध्यम स्तर का है। आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच इसमें शामिल हैं। राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में भी खतरा है।



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