एमपी में बढ़ रहे बीपी के पेशेंट, हर चौथा व्यक्ति हाई बीपी का शिकार, हार्ट पर पड़ रहा असर
मध्य प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। अब इसने एक महामारी का रूप ले लिया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) की जो ताजा रिपोर्ट आई है, उसने सबको चौंका दिया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की करीब 25% आबादी यानी हर चौथा इंसान इस साइलेंट किलर की गिरफ्त में आ चुका है।
इस मामले में एक और सबसे ज्यादा डरने वाली बात है। हाई बीपी से पीड़ित लोगों में से 40% लोगों को तो यह पता ही नहीं है कि उन्हें कोई ऐसी बीमारी भी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल पता नहीं चलते हैं।
इसकी वजह से लोग बेफिक्र रहते हैं। देर से पता चलने के कारण यह एक अकेली बीमारी शरीर में छोटी-बड़ी लगभग 15 और गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।
बच्चों- युवाओं को बूढ़ा बना रही बीमारी
विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ बड़ी उम्र या बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। यह लाइफस्टाइल की खराबी की वजह से हमारे घर के युवाओं और स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। बीपी की वजह से कम उम्र में ही बच्चों और युवाओं के शरीर के अंग समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन के एक बड़े स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत जब प्रदेश के दो करोड़ लोगों की जांच की गई, तो उसमें से अब तक मध्य प्रदेश में 37.52 लाख मरीजों की पहचान हो चुकी है।
उम्र के हिसाब से समझिए खतरा
जबलपुर बना बीपी कैपिटल
NHM के NCD प्रोग्राम की साल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला पूरे प्रदेश में बीपी कैपिटल बनकर उभरा है। यहां सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। वहीं राजधानी भोपाल इस लिस्ट में 12वें नंबर पर आता है, जहां मरीजों की संख्या 88 हजार 235 है।
मध्य प्रदेश के टॉप 10 जिले और मरीजों की संख्या
- जबलपुर: दो लाख 23 हजार 352 मरीज
- छिंदवाड़ा: दो लाख आठ हजार 295 मरीज
- इंदौर: एक लाख 93 हजार 354 मरीज
- ग्वालियर: एक लाख 33 हजार 915 मरीज
- रीवा: एक लाख 19 हजारह 631 मरीज
- बालाघाट: एक लाख 19 हजार 275 मरीज
- धार: एक लाख आठ हजार179 मरीज
- बैतुल: एक लाख चार हजार 27 मरीज
- सतना: एक लाख तीन हजार 960 मरीज
- होशंगाबाद: 94 हजार 314 मरीज
देर रात तक मोबाइल चलाना मुख्य कारण
आजकल की बिगड़ी हुई आदतें और गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सीधे हमारे ब्लड प्रेशर पर असर डाल रहा है। डॉक्टरों ने इसके पीछे कुछ मुख्य कारण बताए हैं।
स्ट्रेस हार्मोन का खेल
जो लोग देर रात तक मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, उनके शरीर में कोर्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यही बढ़ा हुआ कोर्टिसोल आगे चलकर ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है।
ऑक्सीजन की कमी और स्लीप एपनिया
खराब नींद और सोते समय खर्राटे लेने की बीमारी की वजह से सोते समय दिमाग को जितनी ऑक्सीजन मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिल पाती है। इस वजह से भी बीपी बढ़ जाता है।
दिमाग का लगातार अलर्ट मोड पर रहना
जब सोते समय शरीर में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो भले ही हमारा शरीर बाहर से आराम कर रहा हो, लेकिन अंदर से हमारा दिमाग लगातार अलर्ट मोड पर रहता है। दिमाग के शांत न होने की वजह से बीपी लगातार बढ़ने लगता है।
AIIMS भोपाल की स्टडी में खुलासा
जानकारी के अनुसार एम्स भोपाल ने हाई ब्लड प्रेशर को लेकर बहुत ही जरूरी रिसर्च की हैं। इसमें बच्चों से लेकर बड़ों तक के बारे में महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
मोटे बच्चों पर हुई रिसर्च
एम्स भोपाल ने पांच साल से लेकर 18 साल तक के 60 मोटे बच्चों पर एक रिसर्च की। इस रिसर्च में जो बातें सामने आईं वे हर माता-पिता की चिंता बढ़ाने वाली हैं।
- रिसर्च में शामिल लगभग 43.3% बच्चों में हाई बीपी की समस्या पाई गई है।
- इनमें से 26.7% बच्चों के किडनी और हार्ट पर बुरा असर पड़ना भी शुरू हो चुका है।
- मास्क्ड हाइपरटेंशन : लगभग 21.6% बच्चों में मास्क्ड हाइपरटेंशन देखने को मिला है। यह एक ऐसी खतरनाक स्थिति होती है जहां जब बच्चा अस्पताल जाता है तो उसका बीपी नॉर्मल आता है। वहीं जब वह घर पर होता है तो बीपी हाई रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इस तरह के बीपी को पकड़ना सबसे ज्यादा मुश्किल काम होता है।
एक हजार मरीजों पर स्लीप स्टडी
एम्स में 1080 मरीजों के ऊपर एक स्लीप स्टडी की गई। इसमें देखा गया कि जो लोग बिल्कुल अच्छी और हेल्दी डाइट ले रहे थे वे भी हाई बीपी का शिकार हो रहे थे।
जब इसकी वजह खोजी गई तो पता चला कि इसका कारण स्लीप एपनिया था। सोते समय खर्राटे आने की वजह से इन लोगों के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो गई और इस कारण 66% लोग बीपी के मरीज बन गए।
मरीजों की बड़ी लापरवाही
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बीपी के मरीज अपनी दवाओं को लेकर बहुत बड़ी लापरवाही बरतते हैं।
- हर 10 में से 3 मरीज समय पर अपनी दवा खाना ही भूल जाते हैं।
- करीब 13% मरीज ऐसे हैं जो खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं और बिना किसी डॉक्टरी सलाह के अपनी दवा बदल लेते हैं।
FAQ
- मास्क्ड हाइपरटेंशन क्या होता है और यह खतरनाक क्यों है?
मास्क्ड हाइपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज का ब्लड प्रेशर अस्पताल में डॉक्टर के सामने चेक कराने पर तो बिल्कुल नॉर्मल आता है, लेकिन जब वह घर पर रहता है तो उसका बीपी हाई रहता है। यह इसलिए खतरनाक है क्योंकि अस्पताल की रूटीन जांच में यह पकड़ में नहीं आता और अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुँचाता रहता है। AIIMS की स्टडी में 21.6% बच्चों में यह स्थिति मिली है। - देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाने से ब्लड प्रेशर कैसे बढ़ता है?
देर रात तक मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन देखने से हमारे शरीर का नेचुरल सिस्टम बिगड़ जाता है। इससे शरीर में 'कोर्टिसोल' नाम का स्ट्रेस हार्मोन (तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) बहुत ज्यादा बनने लगता है। शरीर में कोर्टिसोल का लेवल बढ़ने की वजह से ब्लड प्रेशर की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। - स्लीप एपनिया या खर्राटों का हाई बीपी से क्या संबंध है?
सोते समय भारी खर्राटे लेना या सांस में रुकावट आना स्लीप एपनिया कहलाता है। इसकी वजह से सोते समय हमारे दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है। ऑक्सीजन की इस कमी के कारण शरीर भले सो रहा हो, लेकिन दिमाग पूरी रात 'अलर्ट मोड' पर रहता है। दिमाग को आराम न मिलने की वजह से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ने लगता है। एम्स की स्टडी में 66% लोग इसी वजह से बीपी के मरीज बने हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
28 मौतों के बाद भी अस्पतालों में मिल रही अमानक दवाएं, जांच में 10 फेल
एमपी में आज भी बोझ हैं बेटियां! बच्चों को त्यागने और भ्रूण हत्या के मामले में मध्यप्रदेश नंबर एक पर
अश्लीलता, भ्रूण हत्या और महिलाओं से अत्याचार में नंबर एक पर एमपी, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा
भोपाल के मिल्क मैजिक घोटाले पर ED का खुलासा, पाम ऑयल से बना रहे थे मिल्क प्रोडक्ट