हाईकोर्ट की अवमानना पर टोल कंपनी को झटका, CEO और मैनेजर की बढ़ीं मुश्किलें

Neel Tiwari | Jan 24, 2026, 20:20 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लखनादौन टोल रोड कंपनी के CEO और मैनेजर पर कड़ा रुख अपनाया है। वेतन न देने पर अवमानना याचिका दोबारा शुरू कर दी गई है।

NEWS IN SHORT

  • लखनादौन टोल रोड लिमिटेड के CEO और डिवीजन मैनेजर पर अवमानना का मामला
  • कर्मचारी के वेतन भुगतान आदेश की अवहेलना पर हाईकोर्ट सख्त
  • 26 माह का वेतन देने के आदेश के बावजूद आंशिक भुगतान
  • जस्टिस विवेक जैन ने अवमानना याचिका बहाल की
  • अधिकारियों को अब कोई और मौका नहीं, सीधे मेरिट पर सुनवाई

NEWS IN DETAIL

Jabalpur. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने लखनादौन टोल रोड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों पर अदालत के आदेशों की अवहेलना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आंशिक भुगतान करने पर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका बहाल कर दी। अब कंपनी अधिकारियों को किसी राहत के बिना मेरिट पर सुनवाई का सामना करना होगा।



2017 से शुरू हुआ विवाद, 2023 में अनुबंध समाप्त

मामले की जड़ें वर्ष 2017 से जुड़ी हुई है, जब लखनादौन टोल रोड लिमिटेड ने एक कर्मचारी को अनुबंध आधार पर हेल्पर के पद पर नियुक्त किया था। हर साल अनुबंध नवीनीकरण के बाद 24 जुलाई 2023 को कंपनी ने अचानक और एकतरफा तरीके से सेवा समाप्त कर दी। इसके खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में याचिका सत्येंद्र गोल्हानी की ओर से लगाई गई थी। उनकी ओर से अधिवक्ता हितेंद्र कुमार गोल्हानी ने पक्ष रखा।



यह खबरें भी पढ़ें..



हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी: गरीबी और पेनल्टी के कारण जीवन के अधिकार से नहीं कर सकते वंचित



छिंदवाड़ा कफ सिरप मामला: डॉक्टर प्रवीण सोनी की जमानत याचिका पर सुनवाई 30 जनवरी को



हाईकोर्ट का अंतरिम संरक्षण, दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

कर्मचारी की रिट याचिका पर हाईकोर्ट ने 22 अगस्त 2023 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए कंपनी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से रोका। यह राहत आगे की सुनवाइयों में भी लगातार जारी रही, जिससे कर्मचारी की सेवा स्थिति सुरक्षित रही।



काम लिया, लेकिन वेतन रोका

अंतरिम आदेश का औपचारिक पालन करते हुए कंपनी ने कर्मचारी से काम तो लिया, लेकिन वेतन भुगतान से इनकार कर दिया। 26 सितंबर 2023 के पत्र में कंपनी ने ‘नो वर्क, नो पे’ का हवाला देते हुए 23 अगस्त 2023 से वेतन रोकने का निर्णय लिया, जिसे कर्मचारी ने खुली अवहेलना बताया।



हाईकोर्ट ने माना अवमानना, दिया पूरा वेतन देने का आदेश

इस रवैये के खिलाफ कर्मचारी ने अवमानना याचिका दायर की। अधिवक्ता हितेंद्र कुमार गोल्हानी के तथ्यों से संतुष्ट होते हुए कोर्ट ने माना कि 28 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने कंपनी अधिकारियों को अवमानना का दोषी माना। कोर्ट ने एक अवसर देते हुए निर्देश दिया था कि 23 अगस्त 2023 से 28 अक्टूबर 2025 तक का पूरा वेतन 30 दिनों में अदा किया जाए। कंपनी के वकील ने अदालत में भुगतान की गारंटी भी दी थी।



आंशिक भुगतान कर पीछे हटी कंपनी

आदेश के बावजूद अधिकारियों ने 21 नवंबर 2025 को कर्मचारी के खाते में मात्र 24,821 रुपये जमा किए। कंपनी ने दावा किया कि कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित था, जबकि यह दलील उनके ही दिए गए आश्वासन और हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत थी।



जस्टिस विवेक जैन की सख्ती, याचिका बहाल

21 जनवरी 2026 को जस्टिस विवेक जैन ने सुनवाई के दौरान कंपनी के इस कदम को आदेश से ‘पीछे हटना’ बताया। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका को मूल फाइल पर बहाल करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब अधिकारियों को अवमानना सुधारने का कोई और मौका नहीं मिलेगा।



यह खबरें भी पढ़ें..



एमपी में सरकारी स्कूल और शिक्षकों की स्थिति पर अब हाईकोर्ट ने मांगा जवाब



होटल में जबरन घुसी पुलिस, मालिक को बिना FIR भेजा जेल, हाईकोर्ट ने ठोका 1 लाख का जुर्माना



जेल या जुर्माने की आशंका

कानूनी जानकारों के मुताबिक, अब CEO बी.पी. सिंह और डिवीजन मैनेजर शंकर शेवू लमानी को अवमानना के मामले में जेल की सजा या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह फैसला निजी कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है।



Tags:
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • जबलपुर
  • अवमानना याचिका
  • वेतन
  • अवमानना
  • लखनादौन टोल रोड लिमिटेड