रेगुलर टीचर आने पर भी नहीं जाएगी गेस्ट फैकल्टी की नौकरी, HC का बड़ा फैसला
ऐसे समझें पूरा मामला
- रीवा की गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा की याचिका पर हाईकोर्ट का आदेश।
- रेगुलर शिक्षक आने पर गेस्ट फैकल्टी को सीधे नहीं हटाया जा सकेगा।
- सरकार को राज्य में किसी अन्य रिक्त पद पर पोस्टिंग का विकल्प देना होगा।
- यदि गेस्ट फैकल्टी नई पोस्टिंग लेने से इनकार करती है, तभी सेवा समाप्ति की कार्रवाई होगी।
- जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने ग्वालियर बेंच के पहले दिए गए आदेश का पालन करने के निर्देश दिए।
जबलपुर हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी के हित में अहम राहत देते हुए कहा है कि यदि किसी कॉलेज में रेगुलर शिक्षक की नियुक्ति हो जाती है, तो वहां कार्यरत गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं सीधे समाप्त नहीं की जा सकतीं। ऐसे मामलों में उन्हें राज्य के किसी अन्य रिक्त पद पर पदस्थ करने का मौका देना होगा।
रेगुलर नियुक्ति बनी विवाद की वजह
रीवा के ITI में गेस्ट फैकल्टी सुमन वर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में याचिका दायर की थी। सुमन की ओर से इस मामले में अधिवक्ता विनय प्रताप सिंह और अधिवक्ता प्रियंका कुमारी ने पैरवी की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जिस कॉलेज में सुमन वर्मा गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य कर रही थीं, वहां पहले ही नियमित शिक्षक भावना डहरिया की नियुक्ति हो चुकी है। इसी के बाद मामला गेस्ट फैकल्टी की सेवा समाप्ति के सवाल पर पहुंच गया।
हाईकोर्ट ने दिया राहत भरा आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा कि ऐसी स्थिति में गेस्ट फैकल्टी की नौकरी समाप्त करने के बजाय उन्हें मध्य प्रदेश में उपलब्ध किसी अन्य रिक्त पद पर पदस्थ करने का मौका दिया जाए। कोर्ट ने इस मामले में ग्वालियर बेंच द्वारा 20 मई 2025 को दिए गए अंतरिम आदेश का भी हवाला दिया और उसी सिद्धांत को लागू किया।
नई पोस्टिंग से इनकार किया तो खत्म हो सकती है सेवा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि गेस्ट फैकल्टी को दूसरी जगह पदस्थापना की पेशकश की जाती है और वह उसे स्वीकार नहीं करती या जॉइन करने से इनकार करती है, तो सरकार उसके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई कर सकती है। इतना ही नहीं, इनकार की स्थिति में संबंधित गेस्ट फैकल्टी से लिखित सहमति या असहमति भी ली जाएगी।
हजारों गेस्ट फैकल्टी के लिए बन सकता है आधार
यह आदेश प्रदेशभर में कार्यरत हजारों गेस्ट फैकल्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यदि किसी संस्थान में रेगुलर शिक्षक की नियुक्ति होती है तो केवल उसी आधार पर गेस्ट फैकल्टी को तत्काल हटाने की बजाय पहले उन्हें किसी अन्य रिक्त पद पर समायोजित करने की प्रक्रिया अपनानी होगी। इससे गेस्ट फैकल्टी को नौकरी की निरंतरता बनाए रखने का अवसर मिलेगा।
किस मामले में आया आदेश
यह आदेश रिट याचिका क्रमांक 24605/2026 (सुमन वर्मा बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य) में 7 जुलाई 2026 को पारित किया गया। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता की सेवाएं समाप्त करने के बजाय उन्हें राज्य के किसी भी हिस्से में उपलब्ध रिक्त पद की पेशकश की जाए।
यदि सरकार इसके बाद भी नियुक्ति देने से इंकार करती है तो याचिकाकर्ता के पास टर्मिनेशन को चैलेंज करने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।
यह खबरें भी पढ़ें..
90% ई-अटेंडेंस में अटके हजारों अतिथि शिक्षकों को राहत, DEO कमेटी लेगी फैसला
एमपी के सरकारी स्कूलों में “गेस्ट टीचर मिशन” शुरू! 70 हजार अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज
एमपी के गेस्ट फैकल्टी परेशान, मिनिमम पे स्केल की मांग तेज, शिक्षा विभाग की कमेटी के फैसले का इंतजार