एमपी हाईकोर्ट में जजों की कमी, एक के जिम्मे 14 हजार से ज्यादा केस! लाखों पेंडिंग

Aman Vaishnav | Jun 18, 2026, 13:15 IST
एमपी हाईकोर्ट में जजों की कमी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की कमी से लंबित मामलों का बोझ बढ़ने वाला है। आने वाले महीनों में पांच जज रिटायर हो रहे हैं। इससे एक जज पर औसतन 14 हजार से ज्यादा केस का भार आएगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एमपी हाईकोर्ट के सीनियर जज जस्टिस विजय कुमार शुक्ला 27 जून को रिटायर हो रहे हैं।
  • अगले 14 महीनों में पांच जज रिटायर होंगे।
  • हाईकोर्ट में फिलहाल करीब 4.90 लाख मामले लंबित हैं।
  • इनमें से एक लाख 40 हजार मामले 10 साल से ज्यादा पुराने हैं।
  • जजों की संख्या घटने से हर जज पर 14 हजार से ज्यादा केस का भार आएगा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में न्याय की रफ्तार पहले से धीमी है। अब आने वाले महीनों में यह रफ्तार और धीमी हो सकती है। वजह है सीनियर जजों का लगातार रिटायर होना।



कब-कब होंगे जज रिटायर

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला 27 जून 2026 को रिटायर होंगे। इसके बाद जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 17 सितंबर को सेवानिवृत्त होंगे। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल 8 नवंबर को रिटायर होंगे।



वहीं साल 2027 में जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता 14 अगस्त को और जस्टिस आरके वाणी 17 अगस्त को रिटायर होंगे।



इस तरह 14 महीनों के भीतर पांच अनुभवी जज हाईकोर्ट से विदा ले लेंगे। नई नियुक्तियां समय पर नहीं हुईं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



स्वीकृत पद और हकीकत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल 53 पद स्वीकृत हैं। इस साल की रिटायरमेंट के बाद जजों की संख्या सिर्फ 35 रह जाएगी। यानी लगभग 18 पद खाली रहेंगे।



वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट की स्थापना के बाद कभी भी सभी 53 पद नहीं भरे गए। यही वजह है कि मामलों की संख्या लगातार बढ़ती गई। हर बार जब कोई जज रिटायर होता है, उसकी जगह समय पर नई नियुक्ति नहीं हो पाती।



जब पद खाली रहते हैं तो बाकी जजों पर काम का दबाव बढ़ जाता है। इसका सीधा असर सुनवाई की रफ्तार पर पड़ता है। आम लोगों को न्याय मिलने में और देरी होने लगती है।



सुनवाई पर कैसे पड़ता है असर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जबलपुर के पूर्व अध्यक्ष संजय वर्मा के अनुसार हाईकोर्ट में हर साल औसतन एक लाख 36 हजार 190 नए मामले दर्ज होते हैं। इनमें से सिर्फ एक लाख 15 हजार 644 मामलों का निपटारा हो पाता है। यानी हर साल हजारों मामले लंबित सूची में जुड़ जाते हैं।



वर्मा बताते हैं कि वर्तमान में एक जज औसतन 275 मामले निपटा रहे हैं। वहीं यदि पांच साल में पूरी पेंडेंसी खत्म करनी है तो हर महीने करीब 19 हजार 83 केस सुलझाने होंगे। इसके लिए कम से कम 70 जजों की जरूरत पड़ेगी। यह मौजूदा स्वीकृत संख्या से भी कहीं ज्यादा है।



FAQ

  1. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कितने जज रिटायर हो रहे हैं?
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की कमी से लंबित मामलों का बोझ बढ़ने वाला है। अगले 14 महीनों में 5 जज रिटायर हो रहे हैं, जिससे एक जज पर औसतन 14 हजार से ज्यादा केस का भार आएगा।
  2. हाईकोर्ट में कुल कितने मामले लंबित हैं?
    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की तीन खंडपीठों में करीब 4.90 लाख मामले लंबित हैं। इनमें से 1.40 लाख मामले 10 साल से ज्यादा पुराने हैं। यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है।

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