हाईकोर्ट की सुनवाई में अजीब नजारा! बिस्तर पर लेटे और अंडरपैंट में दिखे TNCP के संयुक्त संचालक
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बिस्तर पर लेटे दिखे अधिकारी
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 अक्टूबर को अवमानना के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। इस दौरान नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP), भोपाल के संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिए (Amit Kumar Gajbhiye) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट के आदेश के मुताबिक सुबह की सुनवाई के दौरान वे बिस्तर पर लेटे हुए नजर आए। उन्होंने अंडरपैंट पहन रखी थी और शर्ट के बटन बंद कर रहे थे।
जस्टिस दीपक खोट ने उनके इस व्यवहार को अदालत की गरिमा के खिलाफ माना। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी का यह रवैया अवमाननापूर्ण है। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकारी से जवाब मांगा कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
कोर्ट ने पहले भी मांगी थी अनुपालन रिपोर्ट
बता दें कि यह मामला मेसर्स जीएसबी कंस्ट्रक्शन बनाम अमित कुमार गजभिए से जुड़ा है। कंपनी ने अपने डायरेक्टर गुरविंदर सिंह भसीन के जरिए अवमानना याचिका दायर की थी।
याचिका में बताया गया कि हाई कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को एक रिट याचिका का निपटारा किया था। कोर्ट ने कंपनी के अभ्यावेदन पर 90 दिनों के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया था। कंपनी का आरोप है कि संबंधित अधिकारी को आदेश की कॉपी दे दी गई थी। कई बार याद दिलाने के बावजूद तय समय में उचित फैसला नहीं लिया गया। इसके बाद कंपनी ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को अधिकारी से अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया था।
कंपनी ने गलत नक्शा दर्ज होने का उठाया मुद्दा
याचिका के मुताबिक जीएसबी कंस्ट्रक्शन जबलपुर के मधोताल में करीब 36 हजार 192 वर्गफीट जमीन की मालिक है। कंपनी का कहना था कि जमीन के नक्शे और भूमि उपयोग से जुड़ी जानकारी में सुधार जरूरी था।
विवाद इस बात पर था कि मास्टर प्लान में जमीन आवासीय इस्तेमाल के लिए तय थी। वहीं सरकारी रिकॉर्ड में इसे औद्योगिक जमीन के रूप में दर्ज कर दिया गया था। कंपनी ने इसी गलती को सुधारने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान 3 अक्टूबर 2025 के एक पत्र का भी जिक्र हुआ। इस पत्र में जमीन की प्रविष्टि सुधारने की सिफारिश पहले ही भेजे जाने की बात थी। हाई कोर्ट ने 27 अक्टूबर के आदेश में कहा कि ऐसी स्थिति में कंपनी के अभ्यावेदन पर जारी किया गया आदेश सिर्फ दिखावा था।
ALPASS पोर्टल पर आवेदन की सुविधा देने का निर्देश
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वकील ने कहा कि यदि कंपनी ALPASS पोर्टल के माध्यम से आवेदन करती है, तो संबंधित प्राधिकारी जल्द निर्णय ले सकता है। इसके बाद हाई कोर्ट ने कंपनी को पोर्टल पर भूमि उपयोग में संशोधन के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित अधिकारी को सात दिनों के भीतर आवेदन अपलोड करने और स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा। आवेदन अपलोड होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा। इस तरह कोर्ट ने जमीन के विवाद को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है।
चार सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट
राज्य सरकार की ओर से पेश उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए मामला वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखा जाएगा। कोर्ट ने इस आश्वासन के बाद चार सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
इसके अलावा अमित कुमार गजभिए से भी जवाब मांगा गया है। उन्हें बताना होगा कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उनके व्यवहार के लिए आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस सवाल पर भी चार सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।