जबलपुर हाईकोर्ट और जिला बार चुनाव पर दायर हुई याचिका, नोटिस जारी
समझें क्या है पूरा मामला
- ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका।
- हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ और जिला अधिवक्ता संघ में एडहॉक समिति बनाने की मांग।
- याचिका में कहा गया कि दोनों संघों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है।
- मॉडल बायलॉज का हवाला देते हुए पुरानी कार्यकारिणी से चुनाव कराने पर सवाल उठाए गए।
- जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की बेंच ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
जबलपुर में हाईकोर्ट और जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर नया विवाद सामने आया है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद पुरानी कार्यकारिणी चुनाव करा रही है। हाईकोर्ट ने मामले में मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
कार्यकाल खत्म, फिर भी चुनाव कराने की तैयारी पर सवाल
जबलपुर हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ और जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है।
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका दायर कर मांग की है कि दोनों अधिवक्ता संघों में तत्काल एडहॉक (भारसाधक) समिति नियुक्त की जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ का कार्यकाल 23 मई 2026 और जिला अधिवक्ता संघ का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद पुरानी कार्यकारिणी ही चुनाव कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
मॉडल बायलॉज का हवाला देकर निष्पक्ष चुनाव की मांग
याचिका में कहा गया है कि मॉडल बायलॉज के अनुसार यदि दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने तक कार्यकारिणी चुनाव नहीं करा पाती है तो उसके बाद राज्य बार काउंसिल को एडहॉक समिति नियुक्त कर चुनाव कराने का अधिकार और दायित्व है।
ऐसे में पुरानी कार्यकारिणी द्वारा चुनाव प्रक्रिया संचालित करना नियमों के विपरीत बताया गया है। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि एडहॉक समिति का गठन करते समय विविधता (डाइवर्सिटी) का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
पहले दिए गए ज्ञापन, फिर पहुंचा मामला हाईकोर्ट
एसोसिएशन के अनुसार इस संबंध में 30 जून 2026 को ई-मेल के माध्यम से और 1 जुलाई 2026 को भौतिक रूप से मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष एवं महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को ज्ञापन सौंपकर एडहॉक समिति गठित करने की मांग की गई थी।
संगठन का कहना है कि कई बार मौखिक अनुरोध भी किए गए, लेकिन कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद मजबूर होकर हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर और अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसका असर हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ और जिला अधिवक्ता संघ, दोनों के चुनाव पर पड़ सकता है।
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