MP हाईकोर्ट सख्त: आदेश की अनदेखी पर प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह समेत 3 अफसरों पर वारंट
News in short
- हाईकोर्ट ने तीन अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए हैं।
- प्रमुख सचिव सहित MSME कमिश्नर और जनरल मैनेजर पर जमानती वारंट जारी किए हैं।
- मामला जिला उद्योग केंद्र रीवा के कर्मचारी की पदोन्नति से जुड़ा है।
- कोर्ट ने 90 दिन में निर्णय लेने का आदेश दिया था।
- आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर हुई।
News in detail
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों द्वारा न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए हैं।
अदालत ने भोपाल और रीवा के पुलिस अधीक्षकों को वारंट तामीली कराने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
पदोन्नति नहीं मिलने पर कर्मचारी पहुंचा हाईकोर्ट
पूरा मामला जिला उद्योग केंद्र रीवा में पदस्थ असिस्टेंट मैनेजर जयप्रकाश तिवारी की पदोन्नति से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह मैनेजर पद पर प्रमोशन पाने के पात्र हैं, लेकिन विभाग की ओर से लंबे समय से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा था। लगातार देरी और विभागीय उदासीनता के बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली थी।
90 दिन में फैसला लेने का दिया गया था आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने 4 नवंबर 2024 को संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता की पदोन्नति पर निर्णय लिया जाए। हालांकि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग की ओर से आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में अवमानना याचिका दायर कर दी।
नोटिस मिलने के बाद भी पेश नहीं हुए अधिकारी
अवमानना याचिका में एमएसएमई मंत्रालय के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, आयुक्त दिलीप कुमार सिंह और जिला उद्योग केंद्र रीवा के जनरल मैनेजर राहुल दुबे को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि तीनों अधिकारियों को नोटिस विधिवत तामील किए जा चुके थे, इसके बावजूद उनकी ओर से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए तीनों अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के आदेश पारित कर दिए। मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की गई है।
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